- पूर्व सांसद ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नए प्रावधान वापस लेने की मांग की; सवर्ण समाज और युवाओं में बढ़ते आक्रोश का हवाला, आंदोलन तेज होने से पहले हस्तक्षेप की अपील
भारत 19
कानपुर। UGC के नए प्रावधानों को लेकर जारी विरोध के बीच कानपुर के पूर्व सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री सत्यदेव पचौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। पचौरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इन प्रावधानों को वापस लेने का आग्रह किया है। उन्होंने दावा किया कि नियमों को लेकर सवर्ण समाज में व्यापक नाराजगी है और विभिन्न हिस्सों में युवाओं व विद्यार्थियों के बीच भी असंतोष बढ़ रहा है।
पचौरी ने पत्र में कहा है कि हाल में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दौरे के दौरान उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों से व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर बातचीत की। उनके मुताबिक इन चर्चाओं में UGC के नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी सामने आई। उन्होंने इसे समाज के एक बड़े वर्ग के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
राजस्थान में आंदोलन का भी दिया हवाला
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में पचौरी ने राजस्थान में करणी सेना की ओर से आंदोलन के ऐलान और कई जिलों में सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों की ओर से निकाली गई आक्रोश रैलियों का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यह मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका सामाजिक असर भी दिखाई देने लगा है। पचौरी ने दावा किया कि UGC के नए प्रावधानों को लेकर बढ़ रही नाराजगी का भाजपा और एनडीए सरकार पर राजनीतिक असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से समय रहते इस मामले में फैसला लेने का अनुरोध किया है।
आंदोलन बढ़ने से पहले सरकार करे हस्तक्षेप
पूर्व सांसद ने प्रधानमंत्री से कहा कि नए प्रावधानों को वापस लेने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह फैसला केंद्र सरकार के स्तर से ही संभव है और इससे समाज में यह संदेश जाएगा कि सरकार सभी वर्गों की चिंताओं को गंभीरता से सुन रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन व्यापक होने से पहले सरकार का हस्तक्षेप जरूरी है। पचौरी के मुताबिक नियम वापस लेने से सवर्ण समाज में पैदा हुआ आक्रोश कम हो सकता है और सरकार के प्रति भरोसा मजबूत होगा।
UGC ने जनवरी में जारी किए थे नए नियम
UGC की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 को 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित किया गया था। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े मामलों के लिए व्यवस्था तय करना है। पचौरी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि जनभावना और पार्टी की छवि दोनों को ध्यान में रखते हुए इन प्रावधानों की वापसी पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम सवर्ण समाज की नाराजगी दूर करने के साथ सरकार की संवेदनशीलता का संदेश भी देगा।


