- यूपी डिफेंस कॉरिडोर के अगले चरण का कानपुर में रोडमैप तैयार; IIT कानपुर और BHU की रिसर्च को उद्योगों से जोड़ने, MSME को डिफेंस सप्लाई चेन में उतारने और युवाओं को प्रशिक्षित करने पर जोर
भारत 19
कानपुर, 2 सितंबर। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) में कानपुर को सिर्फ रक्षा उपकरण बनाने वाले औद्योगिक केंद्र के बजाय रिसर्च, तकनीक, स्किल और उत्पादन को जोड़ने वाले डिफेंस हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। कानपुर में हुई क्षेत्रीय डिफेंस वर्कशॉप में रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, शोध संस्थानों, MSME और नीति निर्माताओं ने ऐसा नेटवर्क तैयार करने पर मंथन किया, जिसमें IIT कानपुर और BHU की रिसर्च से लेकर स्थानीय उद्योगों में उत्पादन और युवाओं के लिए रोजगार तक पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।
फैक्ट्रियों से आगे बढ़ेगा डिफेंस कॉरिडोर
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और प्रदेश सरकार की साझेदारी में आयोजित ‘कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप’ में रक्षा कॉरिडोर के अगले चरण की जरूरतों पर चर्चा हुई। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि डिफेंस कॉरिडोर की सफलता केवल बड़ी कंपनियों और नई फैक्ट्रियों की संख्या से नहीं मापी जाएगी। इसके लिए रिसर्च संस्थानों, स्थानीय उद्योगों, MSME, प्रशिक्षित युवाओं और रक्षा निर्माताओं के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कानपुर की इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षमता का उल्लेख करते हुए इसे बड़े रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाएं बताईं। ORF के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष पंत ने कहा कि भारत रक्षा उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन बढ़ाने आगे बढ़ रहा है।
IIT कानपुर-BHU की रिसर्च उद्योगों तक पहुंचेगी
कार्यशाला में IIT कानपुर और BHU जैसे संस्थानों की शोध क्षमता को रक्षा उद्योग से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि विज्ञान, रिसर्च और नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को रक्षा उपकरण निर्माण का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है। व्यवस्था में उच्च शिक्षण संस्थानों में विकसित तकनीक को स्थानीय तकनीकी संस्थानों और ITI तक पहुंचाने की योजना है। इससे रिसर्च को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उद्योगों में उसके व्यावहारिक इस्तेमाल का रास्ता तैयार होगा।
युवाओं को डिफेंस सेक्टर के लिए तैयार करेंगे
रक्षा उद्योग के विस्तार के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी कार्यशाला का प्रमुख मुद्दा रहा। प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को डिफेंस सेक्टर की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित करने पर जोर दिया गया। डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने बुनियादी ढांचे के साथ प्रशिक्षण और कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उद्योगों के सहयोग से ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के अवसर बढ़ाने की योजना है। इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ रक्षा उद्योगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे।
MSME को डिफेंस सप्लाई चेन में उतारने पर जोर
कानपुर के छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए रक्षा क्षेत्र में प्रवेश की बड़ी बाधाओं में टेस्टिंग, क्वालिटी चेक, ट्रायल और सर्टिफिकेशन शामिल हैं। कार्यशाला में इन प्रक्रियाओं को आसान बनाने और साझा टेस्टिंग सुविधाओं तक MSME की पहुंच बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पीके सैनी ने रक्षा खरीद प्रक्रिया में किए गए बदलावों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि नए प्रावधानों से स्थानीय उद्योगों के लिए रक्षा क्षेत्र में भागीदारी के अवसर बढ़ेंगे। साझा सुविधाओं का इस्तेमाल बढ़ने से छोटे उद्योगों के लिए डिफेंस सप्लाई चेन में प्रवेश आसान हो सकता है।
डिजाइन और IP पर भी रहेगा जोर
कार्यशाला में मेक इन इंडिया को अगले स्तर तक ले जाने के लिए देश में ही डिजाइन, बौद्धिक संपदा (IP), सॉफ्टवेयर और अपग्रेड तकनीक विकसित करने पर जोर दिया गया। लक्ष्य सिर्फ विदेश से कलपुर्जे मंगाकर उन्हें जोड़ना नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर तकनीक और उत्पाद विकसित करना है। कानपुर की पहले से मौजूद इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को इसके लिए महत्वपूर्ण आधार माना गया।
MRO और स्पेयर पार्ट्स का केंद्र बनाने की तैयारी
कानपुर को बड़ी रक्षा कंपनियों से जोड़ते हुए मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) और स्पेयर पार्ट्स का केंद्र बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने कानपुर में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया। TKM इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह ने भी भारत के बड़े रक्षा बाजार में विदेशी कंपनियों की बढ़ती रुचि का उल्लेख किया।
रक्षा तकनीक का फायदा नागरिक उद्योगों को भी
योजना का असर केवल रक्षा उद्योग तक सीमित रखने के बजाय ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया गया। IIT कानपुर जैसे संस्थानों की मदद से विकसित ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा के साथ नागरिक उद्योगों में भी किया जा सकेगा। इससे कानपुर के व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम को फायदा मिलने की उम्मीद है। नीति निर्माण में ‘बॉटम-अप’ मॉडल अपनाने की बात भी सामने आई। इसमें जमीन पर काम कर रहे उद्यमियों की व्यावहारिक और वित्तीय समस्याओं को नीति तैयार करते समय शामिल किया जाएगा। कानपुर में बेहतर समन्वय के लिए अलग संस्थागत व्यवस्था बनाने पर भी चर्चा हुई।
कानपुर की कार्यशाला के बाद झांसी में अगली कार्यशाला और वर्ष के अंत में लखनऊ में डिफेंस कॉन्क्लेव प्रस्तावित है। इन बैठकों से सामने आने वाली सिफारिशों के आधार पर उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन, तकनीक और सप्लाई चेन को मजबूत करने की आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।


