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मिशन 27K से दूसरे नंबर वाली सीटों पर सपा की नजर

  • 2027 के लिए अखिलेश यादव ने हर विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य रखा; 2022 में 347 सीटों पर लड़ी सपा 223 में दूसरे नंबर पर रही, करीबी मुकाबलों वाली सीटों को भी रणनीति में शामिल करने की तैयारी

भारत 19

राजीव सक्सेना, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए समाजवादी पार्टी ने वोट बढ़ाने और पिछली हार वाली सीटों को जीत में बदलने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 20 सितंबर को लखनऊ में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद हर विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य सामने रखा। इसके लिए घर-घर संपर्क, मतदाताओं की समस्याओं को समझने, तकनीक के इस्तेमाल और बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया गया है। इस रणनीति का दूसरा आधार 2022 का प्रदर्शन है। उस चुनाव में सपा ने 347 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, 111 सीटें जीतीं और 223 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। अब पार्टी इन सीटों में उन क्षेत्रों को अलग से देख रही है जहां पिछली बार जीत का अंतर कम था और संगठन के जरिए वोटों में बढ़ोतरी की गुंजाइश बन सकती है।

27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य क्या है

अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विधानसभा स्तर पर वोट आधार बढ़ाने की रणनीति पर काम करने को कहा है। इसमें घर-घर संपर्क के साथ तकनीक के इस्तेमाल और लोगों की स्थानीय समस्याओं को समझने पर जोर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि सपा चुनाव से कुछ महीने पहले अभियान तेज करने के बजाय अभी से संगठन को सक्रिय करना चाहती है। विधानसभा स्तर के लक्ष्य को बूथवार संपर्क और मतदाता संवाद में बदलना पार्टी के सामने प्रमुख संगठनात्मक चुनौती होगी।

223 सीटों का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है

2022 में सपा ने 347 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें 111 सीटों पर उसे जीत मिली, जबकि 223 सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। यह आंकड़ा बताता है कि पार्टी के उम्मीदवार बड़ी संख्या में विधानसभा क्षेत्रों में मुख्य मुकाबले में थे। हालांकि 223 सीटों को संभावित जीत की संख्या मानना सही नहीं होगा। पांच साल के अंतराल में उम्मीदवार, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। इसलिए पार्टी के लिए इन सीटों में से वास्तविक रूप से प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों की पहचान अहम होगी।

करीबी मुकाबले सपा के लिए बड़ा डेटा प्वाइंट

2022 में उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर जीत बेहद कम अंतर से तय हुई थी। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक 15 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर एक हजार से कम था। धामपुर में भाजपा उम्मीदवार ने सपा प्रत्याशी को महज 203 वोटों से हराया था, जबकि कुर्सी सीट पर जीत का अंतर 217 वोट रहा। इसके अलावा कुल 53 सीटों पर जीत का अंतर पांच हजार से कम था। इनमें सपा ने 21 सीटें जीती थीं। यही आंकड़े बताते हैं कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में अपेक्षाकृत सीमित वोटों का बदलाव भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है। हालांकि 2027 में यही समीकरण दोहरेंगे, ऐसा मानना उचित नहीं होगा।

27K रणनीति केवल करीबी सीटों तक सीमित नहीं

सपा का 27K लक्ष्य सिर्फ उन सीटों के लिए नहीं है जहां 2022 में जीत-हार का अंतर कम था। पार्टी ने विधानसभा स्तर पर वोट बढ़ाने की बात कही है। यानी रणनीति में दो समानांतर काम शामिल हैं—मौजूदा आधार को मजबूत करना और नए मतदाताओं को जोड़ना। यही कारण है कि पार्टी बूथ स्तर के संगठन, घर-घर संपर्क और स्थानीय मुद्दों को अभियान से जोड़ रही है। 27 हजार का लक्ष्य प्रत्येक क्षेत्र की अलग चुनावी परिस्थितियों के बीच संगठन के लिए एक व्यापक लक्ष्य के रूप में सामने आया है।

PDA के साथ नए वोटरों पर फोकस

सपा की चुनावी रणनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों के साथ युवाओं और अन्य सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास भी शामिल है। इसका उद्देश्य केवल मौजूदा समर्थकों को बनाए रखना नहीं, बल्कि नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ना भी है। युवाओं के बीच रोजगार, भर्ती, परीक्षा और शिक्षा जैसे मुद्दों पर संपर्क बढ़ाने की कोशिश इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यहां पार्टी के लिए चुनौती यह होगी कि इन मुद्दों को बूथ और विधानसभा स्तर के संगठन से किस तरह जोड़ा जाए।

दूसरे नंबर से जीत तक पहुंचने की चुनौती

सपा के लिए 223 दूसरे नंबर वाली सीटें एक बड़ा चुनावी आधार जरूर हैं, लेकिन हर सीट की स्थिति एक जैसी नहीं है। कहीं पार्टी कुछ सौ या कुछ हजार वोट से पीछे रही थी तो कहीं अंतर काफी बड़ा था। इसलिए 2027 की तैयारी में केवल पिछली रैंकिंग के बजाय हार का अंतर, मौजूदा संगठन, उम्मीदवार की स्थिति, स्थानीय मुद्दे और संभावित गठबंधन जैसे कारक ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे। यही वह जगह है जहां 27K रणनीति और 223 सीटों का आंकड़ा एक-दूसरे से जुड़ता है। पार्टी को यह तय करना होगा कि अतिरिक्त वोट जुटाने का सबसे ज्यादा असर किन विधानसभा क्षेत्रों में पड़ सकता है।

2022 का चुनावी आधार क्या कहता है

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 और सपा ने 111 सीटें जीती थीं। भाजपा और सपा के बीच कई सीटों पर सीधा मुकाबला रहा। पांच हजार से कम वोटों के अंतर वाली 53 सीटों में भाजपा ने 27 और सपा ने 21 सीटें जीती थीं। ये आंकड़े सपा की मौजूदा रणनीति के लिए पिछला चुनावी संदर्भ देते हैं। लेकिन 2027 में नए उम्मीदवारों, गठबंधनों और स्थानीय समीकरणों के कारण मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। 27 हजार अतिरिक्त वोट जुटाने का लक्ष्य जमीन पर तभी लागू हो सकता है जब संगठन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और बूथ तक सक्रिय हो। इसलिए सपा के लिए अब केवल बड़े राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मतदाता संपर्क और बूथ प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होगा। पार्टी की रणनीति में तकनीक के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। इसका इस्तेमाल मतदाता संपर्क, स्थानीय मुद्दों की पहचान और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय के लिए किया जा सकता है।

2027 तक बदल सकते हैं पूरे समीकरण

2022 के आंकड़ों को 2027 का सीधा चुनावी गणित मानना जल्दबाजी होगी। अगले चुनाव तक सपा के संभावित गठबंधन, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे, मतदान प्रतिशत और विभिन्न सामाजिक समूहों का रुख बदल सकता है। इसलिए फिलहाल 27K को सपा का संगठनात्मक लक्ष्य और 223 को पिछले चुनाव के प्रदर्शन का आधार माना जा सकता है। पार्टी की असली परीक्षा यह होगी कि इन दोनों को सीटवार रणनीति में कितनी प्रभावी तरह बदला जाता है। 2027 की तैयारी में सपा के सामने फिलहाल दो प्रमुख आंकड़े हैं, 27 हजार और 223। पहला हर विधानसभा क्षेत्र में वोट आधार बढ़ाने का घोषित लक्ष्य है, जबकि दूसरा 2022 में सपा के दूसरे स्थान पर रहने वाली सीटों की संख्या है।

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