- PDA रथ के रंग पर मायावती ने सपा की रणनीति और मुस्लिम समर्थन को लेकर उठाए सवाल; अखिलेश ने बिना नाम लिए दिया जवाब, 24 सितंबर को रायबरेली से रथ अभियान की शुरुआत
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी वार-पलटवार तेज हो गया है। ताजा विवाद सपा के PDA रथ के रंग को लेकर शुरू हुआ। बसपा प्रमुख मायावती ने रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में भगवा रंग अधिक नजर आने का दावा करते हुए इसे पार्टी की चुनावी रणनीति से जोड़ा। इसके जवाब में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मायावती का नाम लिए बिना कहा, “सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखाई देता है।” उन्होंने रथ की तस्वीरों में रंग अलग दिखाई देने की बात कही और यह भी कहा कि रथ अभी सिर्फ डीजल भरवाने गया था।
मायावती ने PDA रथ के रंग पर उठाए सवाल
मायावती ने 21 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सपा के प्रस्तावित PDA रथ को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ सपा के पारंपरिक लाल रंग से कम और आरएसएस-भाजपा से जुड़े भगवा रंग में ज्यादा नजर आ रहा है। मायावती ने इसे चुनावी स्वार्थ से जोड़ते हुए सवाल किया कि क्या यह वोटों के लिए राजनीतिक रंग बदलने की रणनीति है या फिर सपा का मुस्लिम मतदाताओं पर भरोसा पहले जैसा नहीं रहा। मायावती ने अपने बयान में सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले की भी व्याख्या पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अलग-अलग मौकों पर PDA के अर्थ को अलग तरीके से पेश करती रही है। ये मायावती के राजनीतिक आरोप और दावे हैं।
मुस्लिम वोट को लेकर भी साधा निशाना
मायावती ने अपने बयान को केवल रथ के रंग तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं के सपा के पक्ष में जाने के बावजूद भाजपा को उत्तर प्रदेश और केंद्र में सत्ता में आने से नहीं रोका जा सका। इसी आधार पर उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं के सपा के साथ संबंधों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका रुख बसपा की ओर बदल रहा है। हालांकि, मुस्लिम मतदाताओं के किसी बड़े पैमाने पर बसपा की ओर रुख करने का दावा मायावती का राजनीतिक आकलन है। इसे स्वतंत्र चुनावी आंकड़े के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
अखिलेश ने दिखाए लाल गमछे, फिर कसा तंज
मायावती के बयान के बाद अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने लाल रंग के गमछे दिखाए और PDA रथ की तस्वीरों का संदर्भ देते हुए कहा कि कैमरे में कई बार रंग अलग दिखाई देता है। इसके बाद उन्होंने बिना मायावती का नाम लिए कहा कि “सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखाई देता है।” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों को आंखों के इलाज की जरूरत है। अखिलेश ने रथ को लेकर कहा कि वह अभी केवल डीजल भरवाने गया था, लेकिन उसके रंग को लेकर पहले ही चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रथ की वास्तविक राजनीतिक यात्रा शुरू होने से पहले ही उस पर बहस शुरू हो गई है।
24 सितंबर को पहली बार सड़क पर उतरेगा रथ
रंग विवाद के बीच सपा का PDA रथ 24 सितंबर को रायबरेली में पहली बार अभियान के लिए उतरेगा। अखिलेश यादव रायबरेली के हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी के आवास जाएंगे। कार्यक्रम के मुताबिक वह रायबरेली सीमा के चुरुआ से PDA रथ पर सवार होंगे और इसी रथ से विधायक के आवास तक पहुंचेंगे। इस दौरे को सपा के 2027 चुनावी अभियान में PDA सामाजिक समीकरण को जमीन पर ले जाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। रथ के जरिए आगे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी संपर्क अभियान चलाने की तैयारी है।
रायबरेली से क्यों शुरू हो रहा PDA रथ
रायबरेली का दौरा हाल में सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुए विवाद की पृष्ठभूमि में अहम है। अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम को PDA से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा था और 24 सितंबर को राहुल लोधी के आवास पहुंचने की घोषणा की थी। अब इसी दौरे के लिए PDA रथ का इस्तेमाल किया जा रहा है। कार्यक्रम के अनुसार अखिलेश लखनऊ से रायबरेली सीमा तक कार से जाएंगे और चुरुआ से रथ पर सवार होंगे।
रथ के रंग से शुरू हुई सियासत PDA तक पहुंची
पूरे विवाद में दो अलग राजनीतिक नैरेटिव सामने आए हैं। मायावती ने रथ के रंग को सपा की चुनावी रणनीति और मुस्लिम मतदाताओं से जोड़कर सवाल उठाया है, जबकि अखिलेश ने रंग को लेकर उठे सवालों को खारिज करते हुए मायावती पर परोक्ष तंज किया है। इससे विवाद केवल लाल और भगवा रंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सपा के PDA फॉर्मूले, मुस्लिम मतदाताओं के साथ उसके राजनीतिक संबंध और 2027 की चुनावी तैयारियों तक पहुंच गया है।
2027 से पहले सपा-बसपा में बढ़ी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां शुरू होने के साथ सपा और बसपा दोनों अपने-अपने सामाजिक आधार को लेकर सक्रिय हैं। सपा PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को अभियान के केंद्र में रख रही है, जबकि मायावती लगातार सपा के इसी राजनीतिक दावे पर सवाल उठा रही हैं।
