- 91वें प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीएमजीएसवाई, ग्रामीण सड़क विकास, गुणवत्ता नियंत्रण और केशव प्रसाद मौर्य के विजन की दी जानकारी
भारत 19
लखनऊ। गांव की सड़क सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि किसानों के लिए बाजार, बच्चों के लिए स्कूल, मरीजों के लिए अस्पताल और युवाओं के लिए रोजगार तक पहुंच की राह भी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के जरिए गांवों की तस्वीर कैसे बदली जा सकती है, इसका मंत्र प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों को दिया गया।
डा. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में आयोजित पीसीएस के 91वें आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शिव सहाय अवस्थी ने ग्रामीण विकास में सड़कों की भूमिका और पीएमजीएसवाई के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी।
सड़क सिर्फ संपर्क नहीं, विकास की मजबूत कड़ी
प्रशिक्षण के दौरान शिव सहाय अवस्थी ने अपने प्रशासनिक अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि बेहतर ग्रामीण सड़क नेटवर्क का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहता। सड़क संपर्क मजबूत होने से किसानों की बाजार तक पहुंच आसान होती है, बच्चों को शिक्षा और मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिलती हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कें गांवों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ाती हैं। युवाओं और महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच आसान होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
केशव मौर्य के विजन में हर गांव तक संपर्क
प्रशिक्षण में उपमुख्यमंत्री एवं ग्राम्य विकास मंत्री केशव प्रसाद मौर्य के ग्रामीण विकास विजन और गांवों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने की कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लक्ष्य केवल सड़कें बनाना नहीं, बल्कि सड़क संपर्क के जरिए गांवों तक विकास की दूसरी सुविधाओं की पहुंच आसान करना है। सड़क, आवास, रोजगार, मनरेगा और ग्रामीण आजीविका जैसी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
पीएमजीएसवाई सड़कों में गुणवत्ता और समय सीमा अहम
शिव सहाय अवस्थी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया कि पीएमजीएसवाई के तहत सड़क निर्माण में गुणवत्ता, निर्धारित मानक और समयबद्धता सबसे महत्वपूर्ण हैं। निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा के साथ गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षु पीसीएस अधिकारियों को ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की योजना बनाने, काम की निगरानी करने और क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों को समझने की जानकारी भी दी गई।
एफडीआर तकनीक से लागत और संसाधनों की बचत
ग्रामीण सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया गया। फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से पुरानी सड़क सामग्री का पुनः उपयोग किया जा सकता है। इससे निर्माण में नई सामग्री की जरूरत कम होने के साथ लागत और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव घटाने में मदद मिलती है।
फाइलों से निकलकर गांव के अंतिम व्यक्ति तक योजना
प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा गया कि प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारी केवल योजनाओं को मंजूरी देने या उनके क्रियान्वयन की रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं है। असली कसौटी यह है कि सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दे और गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
शिव सहाय अवस्थी ने कहा कि गांवों को विकास की अंतिम इकाई नहीं, बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव के रूप में देखने की जरूरत है। मजबूत ग्रामीण सड़क नेटवर्क इसी नींव को मजबूती देने और गांवों की तस्वीर बदलने का अहम माध्यम बन सकता है।
