- 73 वर्ष की उम्र में लखनऊ के SGPGI में ली अंतिम सांस; आठ बार विधायक रहे चौधरी 2017 से 2022 तक यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे, लंबे समय से हृदय और किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। सपा के मीडिया प्रभारी सुशील पांडेय के मुताबिक, उन्होंने रात करीब 9 बजे अंतिम सांस ली। उन्हें करीब दो सप्ताह पहले SGPGI में भर्ती कराया गया था।
राम गोविंद चौधरी लंबे समय से हृदय और किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। इससे पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनकी हार्ट सर्जरी हुई थी। इसके बाद मैक्स अस्पताल में भी उनका लंबे समय तक उपचार और डायलिसिस चला। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें SGPGI में भर्ती कराया गया था। SGPGI निदेशक डॉ. आरके धीमान ने भी उनके निधन की पुष्टि की थी। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, वह उपचार के दौरान पोस्टऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती थे।
आठ बार विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे
राम गोविंद चौधरी का उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबा संसदीय और संगठनात्मक सफर रहा। वह आठ बार विधानसभा के सदस्य चुने गए। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली और उन्होंने 2017 से 2022 तक यह पद संभाला। विधानसभा की आधिकारिक सूची में उनका नाम नेता प्रतिपक्ष के रूप में 27 मार्च 2017 से दर्ज है। वह बलिया की चिलकहर और बांसडीह विधानसभा सीटों से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में बांसडीह से चुनाव हारने के बाद उनका लंबा चुनावी कार्यकाल समाप्त हुआ।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। 1970 के दशक में वह बलिया के मुरली मनोहर टाउन कॉलेज की छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और छात्रसंघ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से भी जुड़े और आपातकाल के दौरान जेल गए। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चिलकहर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता रहा।
मुलायम और अखिलेश सरकार में मंत्री रहे
राम गोविंद चौधरी ने उत्तर प्रदेश की अलग-अलग सरकारों में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में वह पहली बार 1990-91 के दौरान मंत्री बने। बाद में 2003 से 2007 के बीच भी उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में 2012 से 2017 तक उन्होंने बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली। बाद में समाज कल्याण और पंचायती राज से जुड़े विभाग भी उनके पास रहे।
अखिलेश यादव ने जताया गहरा शोक
राम गोविंद चौधरी के निधन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनके निधन पर शोक जताया और उन्हें पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मंत्री के रूप में श्रद्धांजलि दी। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि उनके निधन से प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता और समर्पित जनप्रतिनिधि खो दिया।
बलिया की राजनीति में लंबे समय तक रहा प्रभाव
बलिया से आने वाले राम गोविंद चौधरी ने करीब पांच दशक के राजनीतिक जीवन में छात्र राजनीति, समाजवादी आंदोलन, विधानसभा और सरकार में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। वह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के संपर्क में भी रहे और समाजवादी राजनीति से जुड़े रहे। उनके निधन की खबर के बाद बलिया और लखनऊ में उनके समर्थकों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच शोक का माहौल है। शनिवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की।


