- हल्द्वानी में ‘शुद्धीकरण’ और दलित भेदभाव के आरोप पर भाजपा का जवाब, बोले- कांग्रेस दलित नेता को अध्यक्ष बना सकती है, लेकिन असली निर्णय शक्ति गांधी परिवार से बाहर नहीं जाती
भारत 19
लखनऊ। हल्द्वानी में दलित भेदभाव के आरोप को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की भूमिका पर ही सवाल खड़ा कर दिया। मौर्य ने कहा कि कांग्रेस दलित नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी दे सकती है, लेकिन पार्टी की वास्तविक निर्णय शक्ति गांधी परिवार के बाहर नहीं जाती।
‘शुद्धीकरण’ के आरोप पर राहुल को घेरा
मौर्य ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सामाजिक न्याय की बात करने से पहले अपनी पार्टी के भीतर झांकें और बताएं कि कांग्रेस अध्यक्ष होने के बावजूद खरगे के पास वास्तविक निर्णय लेने की कितनी स्वतंत्र शक्ति है। उन्होंने कहा कि खरगे जैसे अनुभवी नेता को केवल नाम का अध्यक्ष बनाए रखना उनके राजनीतिक अनुभव और दलित नेतृत्व, दोनों का अनादर है। उन्होंने हल्द्वानी में खरगे के कार्यक्रम को लेकर राहुल गांधी की ओर से लगाए गए ‘शुद्धीकरण’ और दलितों से भेदभाव के आरोपों को निराधार बताया। ऐसे आरोप सामाजिक न्याय की राजनीति नहीं हैं, बल्कि समाज में अविश्वास पैदा करने का प्रयास हैं। उन्होंने राहुल से सवाल किया कि देवभूमि उत्तराखंड को कठघरे में खड़ा करने से पहले कांग्रेस को अपनी पार्टी की व्यवस्था पर जवाब देना चाहिए। मौर्य के मुताबिक, अगर कांग्रेस वास्तव में दलित नेतृत्व को सम्मान और अधिकार देती है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पार्टी के सर्वोच्च पद पर बैठे खरगे के पास कितनी निर्णायक ताकत है।
खरगे की वरिष्ठता के बहाने कांग्रेस पर निशाना
मौर्य ने खरगे की राजनीतिक वरिष्ठता को भी अपने हमले का आधार बनाया। उन्होंने कहा कि खरगे कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में हैं और कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। इसके बावजूद उनकी वरिष्ठता और अनुभव के अनुरूप निर्णायक भूमिका को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक ओर दलित सम्मान की बात करती है, दूसरी ओर पार्टी की सत्ता संरचना गांधी परिवार के इर्द-गिर्द रखती है। मौर्य ने कहा कि सामाजिक न्याय भाषणों से नहीं, बल्कि अधिकार, अवसर और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी से साबित होता है।
मोदी के जरिए परिवारवाद पर साधा निशाना
मौर्य ने कांग्रेस के परिवारवाद पर भी हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि अति पिछड़े समाज से आने वाले मोदी का देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना उस राजनीति के लिए चुनौती है, जिसमें सत्ता और नेतृत्व को कुछ परिवारों की विरासत मान लिया गया था। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने दलित, पिछड़े, गरीब और वंचित वर्गों को केवल राजनीतिक नारों में जगह नहीं दी, बल्कि गरीब कल्याण और सामाजिक सशक्तीकरण की नीतियों में प्राथमिकता दी है।
‘दिखावटी दलित प्रेम’ पर भाजपा का हमला
उप मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दलित सम्मान को राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को समाज को बांटने वाले आरोप लगाने से पहले कांग्रेस के भीतर सामाजिक न्याय की कसौटी लागू करनी चाहिए। मौर्य ने कहा कि जनता अब दिखावटी दलित प्रेम और परिवारवादी राजनीति के बीच अंतर समझ रही है। उनके मुताबिक देश की जनता सम्मान, समान अवसर, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प को प्राथमिकता दे रही है।
मौर्य के बयान में भाजपा ने राहुल गांधी के हल्द्वानी आरोप का जवाब देने के साथ कांग्रेस के नेतृत्व मॉडल को राजनीतिक निशाना बनाया है। विवाद को ‘शुद्धीकरण’ के आरोप से आगे ले जाकर भाजपा ने इसे दलित प्रतिनिधित्व, खरगे की भूमिका और गांधी परिवार के प्रभाव से जोड़ दिया है।


