- नई दिल्ली घोषणा-पत्र सर्वसम्मति से मंजूर, पहलगाम हमले की कड़ी निंदा; मोदी ने BRICS के संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलने का दिया संदेश
भारत 19
नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के पहले दिन भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली। सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी देते हुए पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। घोषणा-पत्र में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाते हुए आतंकियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थकों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS देशों की एकजुटता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अब संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलने का समय है। उन्होंने BRICS को किसी के खिलाफ खड़ा करने के बजाय सहयोग, विकास और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने वाला मंच बनाने पर जोर दिया।
पहलगाम हमले की BRICS ने की कड़ी निंदा
घोषणा-पत्र में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, आतंकियों और उनके वित्तपोषकों पर कार्रवाई की जरूरत बताई गई। BRICS नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। घोषणा-पत्र में आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़ने का विरोध किया गया। BRICS ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देते हुए आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना, वित्तीय मदद और अन्य सहयोग देने वालों की जवाबदेही तय करने की बात कही।
मोदी ने BRICS के एजेंडे को नतीजों से जोड़ा
प्रधानमंत्री बोले, सर्वसम्मति महत्वपूर्ण है, लेकिन अब फैसलों को जमीन पर उतारना जरूरी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS की ताकत उसकी विविधता और सामूहिक सहमति में है। अब जरूरत इस बात की है कि समूह में लिए गए फैसलों और व्यक्त किए गए संकल्पों को व्यावहारिक परिणामों में बदला जाए। मोदी ने वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि विकासशील देशों को वैश्विक व्यवस्था में केवल नियमों का पालन करने वाला पक्ष नहीं, बल्कि नियमों को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
शी जिनपिंग ने शांति में BRICS की भूमिका बढ़ाई
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक और क्षेत्रीय शांति के लिए संवाद, सहयोग और बहुपक्षवाद पर जोर दिया। उन्होंने BRICS को वैश्विक और क्षेत्रीय शांति में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने वाला मंच बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद तथा कूटनीति को महत्व देने पर जोर दिया। BRICS बैठक के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन संबंधों और आगे के सहयोग को लेकर बातचीत हुई।
पश्चिम एशिया संकट पर BRICS ने जताई चिंता
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई। BRICS देशों ने तनाव कम करने, अधिकतम संयम बरतने और विवादों के कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिससे संघर्ष और व्यापक हो सकता है। घोषणा में अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद, परामर्श और कूटनीति को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
व्यापार और वैश्विक व्यवस्था पर भी बनी सहमति
BRICS देशों ने वैश्विक व्यापार में अनावश्यक बाधाओं, एकतरफा प्रतिबंधों और व्यापार बाधाओं पर चिंता जताने के साथ वैश्विक संस्थाओं में सुधार की वकालत की। बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की जरूरत दोहराई गई। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधिमूलक, न्यायसंगत और जवाबदेह बनाने की मांग BRICS के एजेंडे में प्रमुख रही।
BRICS में भारत का फोकस सहयोग और परिणाम पर
भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान समूह के एजेंडे को केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल सहयोग, सप्लाई चेन और विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की पहल इसका हिस्सा है।
BRICS Summit की दिनभर की बड़ी बातें
- नई दिल्ली घोषणा-पत्र सर्वसम्मति से मंजूर
- BRICS ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की
- आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश
- आतंकियों और उनके वित्तपोषकों की जवाबदेही पर जोर
- मोदी ने संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलने की बात कही
- शी जिनपिंग ने वैश्विक शांति में BRICS की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया
- पश्चिम एशिया के तनाव पर अधिकतम संयम की अपील
- संवाद और कूटनीति से विवादों के समाधान पर जोर
- वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की वकालत
- मोदी-शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक भी हुई

