- पेट्रोल पर एक, डीजल पर पांच और एटीएफ पर चार रुपये प्रति लीटर शुल्क घटा; निर्यातकों को राहत, घरेलू ग्राहकों को सीधे फायदा नहीं
भारत 19 डेस्क
पश्चिम एशिया संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बढ़ी कीमतों और अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन एटीएफ के निर्यात पर शुल्क घटाकर भारतीय रिफाइनरों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत देने का संकेत दिया है। 16 सितंबर से लागू नई दरों के तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 1.50 रुपये से घटकर 0.50 रुपये, डीजल पर 25 रुपये से घटकर 20 रुपये और एटीएफ पर 19 रुपये से घटकर 15 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यानी पेट्रोल पर एक रुपये, डीजल पर पांच रुपये और एटीएफ पर चार रुपये प्रति लीटर शुल्क घटा है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के आधार पर रॉयटर्स ने इन बदलावों की पुष्टि की है। इस फैसले से राहत उन कंपनियों को मिलेगी जो पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं। शुल्क में कमी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रिफाइनरों की लागत कुछ कम होगी और उन्हें कीमत के मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
पश्चिम एशिया संकट के बीच क्यों घटाया शुल्क
सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर ये शुल्क 27 मार्च 2026 से लागू किए थे। उस समय उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और संकट के दौरान अत्यधिक निर्यात को हतोत्साहित करना था। इन शुल्कों की हर पखवाड़े समीक्षा की जाती है। एक सितंबर की समीक्षा में पेट्रोल का निर्यात शुल्क 1.50 रुपये, डीजल का 25 रुपये और एटीएफ का 19 रुपये प्रति लीटर किया गया था। अब 16 सितंबर की समीक्षा में तीनों पर शुल्क घटा दिया गया है। इससे सरकार ने निर्यात पर कर बोझ कुछ कम किया है।
रिफाइनरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत
भारत में बड़ी रिफाइनरियां घरेलू जरूरत पूरी करने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करती हैं। निर्यात शुल्क घटने से इनके प्रति लीटर कर बोझ में कमी आएगी। डीजल पर पांच रुपये की कटौती तीनों ईंधनों में सबसे बड़ी है। इससे भारतीय रिफाइनरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत तय करने और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में कुछ गुंजाइश मिल सकती है। हालांकि वास्तविक फायदा कच्चे तेल की लागत, अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन पर निर्भर करेगा।
एटीएफ निर्यात पर भी घटा शुल्क
एटीएफ पर निर्यात शुल्क 19 रुपये से घटाकर 15 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इससे विमान ईंधन का निर्यात करने वाली रिफाइनरियों को राहत मिलेगी। हालांकि इसका सीधा अर्थ घरेलू विमान ईंधन सस्ता होना या हवाई किराये में तत्काल कमी आना नहीं है।
अगली समीक्षा में फिर बदल सकती हैं दरें
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की सरकार हर पखवाड़े समीक्षा करती है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के दाम और वैश्विक बाजार की स्थिति के अनुसार अगली समीक्षा में दरें फिर बढ़ या घट सकती हैं। इसलिए मौजूदा कटौती को स्थायी राहत के बजाय पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक तेल बाजार की बदलती परिस्थितियों के बीच निर्यात नीति में किया गया ताजा समायोजन माना जाना चाहिए।
एक नजर में
- पेट्रोल निर्यात शुल्क : ₹1.50 से ₹0.50 प्रति लीटर
- डीजल निर्यात शुल्क : ₹25 से ₹20 प्रति लीटर
- एटीएफ निर्यात शुल्क : ₹19 से ₹15 प्रति लीटर
- घरेलू पेट्रोल-डीजल उत्पाद शुल्क : कोई बदलाव नहीं
- नई दरें : 16 सितंबर से अगले पखवाड़े तक


