- नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद मची तबाही में 626 मौतें, करीब 2500 लोग नेपाल में लापता; खराब मौसम से खोज-बचाव प्रभावित
भारत 19 डेस्क
नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ अब भी तबाही का नया चेहरा दिखा रही है। ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ों से पानी, मलबा और चट्टानों का सैलाब नीचे उतरा और देखते ही देखते बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के शनिवार के अपडेट के मुताबिक देश में मृतकों की संख्या 626 पहुंच गई है, जबकि 2,426 लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी सात मौतें और 554 लोगों के लापता होने की सूचना है।
इस पूरी त्रासदी का सबसे बड़ा भारतीय पहलू यह है कि 320 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो सका है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक करीब 100 भारतीय मूल के ऐसे लोग भी संपर्क से बाहर हैं, जिनके पास दूसरे देशों की नागरिकता है। मंत्रालय ने साफ किया है कि 320 का आंकड़ा संपर्क नहीं हो पाने या लापता लोगों का है, इसे भारतीयों की मौत का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
84 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
भारत के लिए राहत की बात यह है कि प्रभावित क्षेत्र से अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीय और तमिलनाडु के 21 नागरिक शामिल हैं। शुक्रवार को 21 नागरिक नेपाल से नई दिल्ली पहुंचे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनसे मुलाकात की। चीन की ओर फंसे भारतीयों को भी निकालने का अभियान चल रहा है। MEA के मुताबिक 149 भारतीय सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय चीन की ओर सुरक्षित हैं और अपने परिवारों के संपर्क में हैं। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर उनके निकासी की व्यवस्था कर रहा है।
62 टन राहत लेकर पहुंचा भारत
नेपाल की त्रासदी के बीच भारत ने राहत अभियान तेज कर दिया है। तीन एयरलिफ्ट के जरिए करीब 62 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है। इसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाएं, खाद्य सामग्री, जनरेटर, पानी निकालने के उपकरण और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। भारत ने राहत सामग्री के साथ विशेषज्ञ सहायता भी बढ़ाई है। 11 सदस्यीय मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम नेपाल पहुंच चुकी है। विशेष रूप से उन स्थानों पर बचाव की तैयारी की जा रही है जहां लोग मलबे और सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। भारत ने बेली ब्रिज, तकनीकी टीम और जरूरत पड़ने पर एनडीआरएफ की सहायता देने की भी पेशकश की है।
खराब मौसम ने रोका खोज-बचाव
नेपाल में शनिवार को खराब मौसम ने बचाव अभियान की रफ्तार पर असर डाला। भारी बारिश और कठिन पहाड़ी भूभाग के कारण हेलीकॉप्टर और जमीनी अभियान दोनों में मुश्किलें बनी हुई हैं। नेपाल ने खराब मौसम के कारण खोज और बचाव गतिविधियों को रोकने की जानकारी दी है, जबकि बचाए गए लोगों को सुरक्षित स्थानों और काठमांडू पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क और संचार संपर्क टूट गया है। मलबे और भूस्खलन से रास्ते बंद हैं। नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव में लगाए गए हैं और अब तक 4,451 लोगों को बचाए जाने की सूचना है।
सुरंग में फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती
बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना का इलाका बचाव अभियान के सबसे मुश्किल केंद्रों में है। यहां सुरंगों में मलबा भर जाने के कारण अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। भारत की टनल रेस्क्यू टीम को इसी तरह के जटिल अभियान में तकनीकी मदद के लिए भेजा गया है। रेस्क्यू टीमों के सामने सिर्फ मलबा ही चुनौती नहीं है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बदलता मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें, कमजोर संचार व्यवस्था और दोबारा बाढ़ का खतरा अभियान को और मुश्किल बना रहा है।
ग्लेशियर टूटने से आया था सैलाब
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नदी तंत्र में जा गिरा। इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में अचानक भीषण बाढ़ आई। पानी का सैलाब इतनी तेजी से नीचे आया कि कई इलाकों में लोगों को संभलने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का मौका तक नहीं मिला। बाढ़ ने नेपाल के रसुवा समेत कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। पुल, सड़कें, मकान और बिजली ढांचे बह गए। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी ग्यिरोंग सीमा चौकी को भारी नुकसान हुआ है।
लापता लोगों के आंकड़े में लगातार बदलाव
नेपाल त्रासदी में लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है। इसका बड़ा कारण कई इलाकों में संचार व्यवस्था का ठप होना और अलग-अलग सूचियों का मिलान जारी रहना है। इसलिए नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को जोड़कर किसी एक अंतिम संख्या के रूप में पेश करना फिलहाल उचित नहीं है। भारतीय नागरिकों के मामले में भी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 320 का आंकड़ा फिलहाल संपर्क से बाहर या लापता लोगों का है और सूचियों का मिलान जारी है। ऐसे में इन लोगों को मृत घोषित करना गलत होगा।
भारत ने खोला 24 घंटे का कंट्रोल रूम
भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके परिजनों को अपडेट देने के लिए विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम बनाया है। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों ने भी हेल्पलाइन शुरू की है। भारत की कोशिश प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की पहचान, सुरक्षित निकासी और परिजनों तक सूचना पहुंचाने की है। नेपाल के लिए भारत की राहत अब केवल सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है। मेडिकल टीम, टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ और संपर्क बहाली के लिए तकनीकी मदद की पेशकश के जरिए भारत ने राहत अभियान में अपनी भूमिका बढ़ा दी है। दूसरी ओर, नेपाल को इस आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की जरूरत पड़ने का अनुमान है।


