- नेपाल बाढ़ का असली कारण, पहाड़ से नदी तक ऐसे पहुंची तबाही
भारत 19
नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड को केवल सामान्य मानसूनी बाढ़ मानना पूरी तस्वीर को अधूरा छोड़ देगा। शुरुआती वैज्ञानिक आकलन और उपग्रह विश्लेषणों से संकेत मिल रहे हैं कि तबाही की शुरुआत ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में बर्फ, ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के ढहने से हुई। इसके बाद पानी, मिट्टी, बर्फ और विशाल बोल्डरों का तेज प्रवाह नीचे की घाटियों तक पहुंचा और विनाश का कारण बना।
पहाड़ पर शुरू हुई तबाही, नदी तक पहुंचा मलबा
यह एक कास्केडिंग डिजास्टर जैसी स्थिति थी, जिसमें एक घटना ने दूसरी आपदा को जन्म दिया। ऊंचाई वाले इलाके में बर्फ और चट्टान का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आया। इसके साथ मिट्टी और पत्थरों का भारी मलबा संकरी घाटियों और नदी तंत्र तक पहुंचा। इससे पानी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ा और नदी का सामान्य व्यवहार तेजी से बदल गया।

पानी के साथ दौड़े बोल्डर और मलबा
दबाव बढ़ने के बाद नीचे की ओर बढ़ा प्रवाह केवल पानी नहीं था। उसमें मिट्टी, चट्टानें, बोल्डर और अन्य मलबा भी शामिल था। यही वजह है कि ऐसी फ्लैश फ्लड सामान्य बाढ़ से कहीं अधिक खतरनाक होती है। संकरी हिमालयी घाटियों में पानी और मलबे का तेज बहाव कुछ ही समय में पुलों, सड़कों और बस्तियों को अपनी चपेट में ले सकता है।
नदी बन गई तबाही का गलियारा
हिमालयी आपदा का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि खतरा जहां पैदा होता है, उसका असर वहीं खत्म नहीं होता। पहाड़ पर टूटा ग्लेशियर या चट्टान घाटी तक पहुंचता है, मलबा नदी के प्रवाह को प्रभावित करता है और वही नदी कई किलोमीटर नीचे बसे इलाकों तक तबाही पहुंचा देती है। इस दौरान सड़कें, पुल, बस्तियां और नदी किनारे बना इंफ्रास्ट्रक्चर एक साथ खतरे में आ जाता है।
हिमालय में खतरे के पांच नए ट्रिगर
हिमालय में आपदा केवल बादल फटने या भारी बारिश से नहीं आती। ग्लेशियर टूटना, भूस्खलन, ग्लेशियल झील का फटना, मलबे से नदी का रास्ता रुकना और अचानक फ्लैश फ्लड अब ऐसे खतरे हैं, जिन्हें एक-दूसरे से जोड़कर समझना होगा। ऐसे में केवल मौसम आधारित चेतावनी पर्याप्त नहीं है।
गर्म होता हिमालय बढ़ा रहा जोखिम
वैज्ञानिक लंबे समय से हिमालयी ग्लेशियरों के पीछे हटने और पर्वतीय ढलानों की बढ़ती अस्थिरता को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। हालांकि इस विशेष घटना को केवल जलवायु परिवर्तन का परिणाम कहना अभी वैज्ञानिक रूप से जल्दबाजी होगी, लेकिन बदलते तापमान के बीच हिमालयी क्षेत्र में ऐसे जोखिमों की गंभीरता बढ़ रही है।
खतरे को वहीं पहचानना होगा, जहां वह पैदा होता है
नेपाल की इस त्रासदी ने साफ कर दिया कि जब तक नदी में तबाही दिखाई देती है, उसकी शुरुआत अक्सर पहाड़ की ऊंचाइयों में हो चुकी होती है। इसलिए भविष्य की सुरक्षा केवल मजबूत सड़क और पुल बनाने से नहीं होगी। ग्लेशियर, अस्थिर ढलानों, नदी के प्रवाह और मलबे के जमाव की रियल टाइम निगरानी जरूरी होगी।


