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कोरोना में फ्रंटलाइन वॉरियर बने एंबुलेंस ड्राइवर, अब नौकरी के लिए सड़क पर

लखनऊ के हजरतगंज में डायल-108 और डायल-102 एंबुलेंस के पूर्व ड्राइवरों ने नौकरी से हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कोरोना काल में सेवा देने के बाद करीब 9 हजार कर्मचारियों को 2021 में नौकरी से हटा दिया गया। उन्होंने दोबारा रोजगार देने की मांग की।

Bharat 19/ लखनऊ में शुक्रवार को डायल-108 और डायल-102 एंबुलेंस सेवा से जुड़े रहे पूर्व ड्राइवरों ने रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास पहुंचकर अपनी मांगें उठाईं। प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारी भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान एंबुलेंस सेवाओं में काम करने का हवाला देते हुए कहा कि उस समय उन्हें फ्रंटलाइन वॉरियर कहा गया था, लेकिन बाद में रोजगार से बाहर कर दिया गया।

2021 में नौकरी जाने का दावा

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, 2021 में GVK-EMRI कंपनी ने करीब 9 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया था। उनका दावा है कि इसके बाद से वे लगातार रोजगार और बहाली की मांग कर रहे हैं। हालांकि, यह आंकड़ा और नौकरी समाप्त किए जाने से जुड़ा दावा प्रदर्शनकारियों की ओर से दिया गया है। उपलब्ध सामग्री में संबंधित कंपनी या सरकार की ओर से इस दावे पर कोई स्वतंत्र प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

हाथों में तख्तियां, लगाए नारे

प्रदर्शनकारी अपने हाथों में अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे। इनमें कोरोना काल में कर्मचारियों की भूमिका और वर्तमान स्थिति को लेकर नाराजगी जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से दोबारा रोजगार देने और उनकी समस्या में हस्तक्षेप करने की मांग की। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि नौकरी जाने के बाद उन्हें परिवार चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

चारबाग में साथियों को हिरासत में लेने का दावा

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि हजरतगंज पहुंचने से पहले चारबाग रेलवे स्टेशन पर उनके 40 से 50 साथियों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद जो कर्मचारी हजरतगंज पहुंचे, उन्होंने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर उन्हें भी हिरासत में लेने का आरोप लगाया। उपलब्ध सामग्री में पुलिस की ओर से इस दावे पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

रोजगार के लिए लगातार आंदोलन

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने बताया कि वे रोजगार की मांग को लेकर लखनऊ और कन्नौज के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार उन्हें आर्थिक परेशानियों के बीच लखनऊ आकर अपनी मांग उठानी पड़ती है। अजय नामक एक प्रदर्शनकारी ने भावुक होते हुए कहा कि 2021 में नौकरी जाने के बाद से वह न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के आवास पर कई बार जाने का भी दावा किया।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर नौकरी वापस दिलाने की मांग की। कुछ कर्मचारियों ने रोजगार नहीं मिलने पर आगे भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने की बात भी कही। उनकी मुख्य मांग नौकरी और रोजगार की बहाली है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोरोना काल में उनकी सेवाओं को देखते हुए उनके भविष्य पर भी सरकार को विचार करना चाहिए। लखनऊ में एंबुलेंस सेवा के पूर्व कर्मचारियों का प्रदर्शन उनके रोजगार से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे दावे को सामने लाता है। प्रदर्शनकारियों ने 2021 में करीब 9 हजार कर्मचारियों की नौकरी जाने का दावा किया है। अब उनकी नजर सरकार की ओर से संभावित हस्तक्षेप और रोजगार से जुड़ी कार्रवाई पर है।

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