- छह साल से बंद ऐतिहासिक पुल की जगह बन रहा नया सेतु, उन्नाव-ट्रांसगंगा सिटी की राह होगी सुगम; लखनऊ कनेक्टिविटी भी होगी बेहतर
भारत 19
कानपुर। छह साल से पुराने गंगा पुल पर यातायात बंद होने के कारण फिलहाल शहर और शुक्लागंज के बीच यातायात सीमित रास्तों पर निर्भर है। इसका सीधा दबाव जाजमऊ पुल पर भी पड़ रहा है। अब 1875 में बने ऐतिहासिक पुल के स्थान पर फोरलेन नया गंगा सेतु आकार ले रहा है। करीब 1,200 मीटर लंबे इस पुल का 15 से 20 फीसदी काम हो चुका है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक बारिश थमने के बाद पिलर निर्माण फिर तेज होगा और जून 2028 तक सेतु पूरा करने का लक्ष्य है।
डीएम ने बताया कि पुल बनने के बाद कानपुर शहर का वह यातायात जो अभी जाजमऊ पुल होकर जाता है, उसका एक बड़ा हिस्सा शुक्लागंज रूट से निकल सकेगा। इससे ट्रैफिक की रफ्तार बढ़ने के साथ शहर से उन्नाव और आगे लखनऊ की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
फोरलेन पुल से घटेगा मौजूदा रूट का दबाव
पुराना पुल बंद होने से कानपुर-शुक्लागंज आवाजाही के लिए विकल्प सीमित हैं। नया फोरलेन सेतु तैयार होने पर मध्य कानपुर से शुक्लागंज और उन्नाव की ओर जाने वाले यातायात को नया कॉरिडोर मिलेगा। इससे जाजमऊ पुल पर मौजूदा दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।
1200 मीटर पुल, 24 पिलर पर चल रहा काम
राज्य सेतु निगम की इस परियोजना की लागत करीब 235 करोड़ रुपये है। सेतु की लंबाई लगभग 1,200 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर होगी। कुल 24 पिलर बनाए जाने हैं, जिनमें से 14 पिलर पर प्रारंभिक संरचनात्मक कार्य किया जा चुका है। अभी परियोजना का करीब 15 से 20 फीसदी काम पूरा हुआ है।
बारिश थमते ही पिलर निर्माण फिर होगा तेज
गंगा का जलस्तर बढ़ने और बारिश के कारण नदी क्षेत्र में पिलर निर्माण प्रभावित हुआ है। डीएम ने बताया कि बारिश बंद होने के बाद काम फिर शुरू किया जाएगा और संसाधन बढ़ाकर निर्माण की रफ्तार तेज की जाएगी। परियोजना को जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ट्रांसगंगा सिटी के लिए 750 करोड़ का पुल
ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर शहर से सीधे जोड़ने के लिए 750 करोड़ रुपये की फोरलेन पुल परियोजना भी स्वीकृत हो चुकी है। इसके बनने से कल्याणपुर, स्वरूपनगर, तिलकनगर, काकादेव और कानपुर दक्षिण की ओर से आने-जाने वाले यातायात को भी वैकल्पिक कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
शहर से लखनऊ तक मजबूत होगा कनेक्टिविटी नेटवर्क
दोनों परियोजनाएं पूरी होने पर कानपुर शहर, शुक्लागंज, उन्नाव और ट्रांसगंगा सिटी के बीच संपर्क मजबूत होगा। इसका असर आगे लखनऊ जाने वाले यातायात पर भी पड़ेगा और शहर के भीतर कई प्रमुख मार्गों पर यातायात दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।


