- विशेष चेकिंग अभियान में PRESS और POLICE लिखे वाहनों की पड़ताल, पहचान नहीं मिलने पर स्टीकर हटाए; नियम टूटने पर चालान
भारत 19
कानपुर। वाहनों पर PRESS या POLICE लिखवाकर पहचान का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानपुर पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया है। पुलिस कमिश्नरेट के निर्देश पर शहर के प्रमुख चौराहों पर वाहनों की जांच की गई। ऐसे वाहनों को रोककर चालक की पहचान, वाहन के कागजात और लगाए गए स्टीकर की वैधता जांची गई। जांच के दौरान PRESS लिखे वाहनों के चालकों से प्रेस कार्ड और POLICE लिखे वाहनों के चालकों से विभागीय पहचान पत्र मांगा गया। दावा प्रमाणित नहीं होने पर स्टीकर हटवाए गए और अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन मिलने पर चालान किया गया।
वाहन पर लिखा नाम पहचान का प्रमाण नहीं
पुलिस का जोर इस बात पर है कि वाहन पर कोई पद या संस्था लिख देने से संबंधित व्यक्ति को विशेष दर्जा नहीं मिल जाता। पहचान की पुष्टि संबंधित विभाग, संस्थान या वैध दस्तावेज से ही होगी। PRESS लिखे वाहनों के चालकों से मीडिया संस्थान का पहचान पत्र अथवा उपलब्ध मान्यता संबंधी दस्तावेज मांगे गए। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए प्रेस कार्ड और कार पास की व्यवस्था करता है। सिर्फ वाहन पर PRESS लिखना पत्रकार होने का प्रमाण नहीं है। निजी वाहन पर POLICE लिखे होने से वह सरकारी पुलिस वाहन नहीं बन जाता। ऐसे मामलों में चालक के पुलिस विभाग से वास्तविक संबंध की जांच की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति झूठी पहचान के आधार पर खुद को लोक सेवक बताकर उस अधिकार का इस्तेमाल करता है, तो मामला अलग कानूनी कार्रवाई तक जा सकता है।
नंबर प्लेट पर लिखावट भी जांच के दायरे में
वाहनों की नंबर प्लेट निर्धारित पंजीकरण चिह्न के अनुरूप होनी चाहिए। उस पर PRESS, POLICE अथवा अन्य अनधिकृत शब्द या बदलाव नियमों के उल्लंघन का आधार बन सकते हैं। प्रेस कार्ड या विभागीय पहचान होने से वाहन को सामान्य यातायात जांच से स्वतः छूट नहीं मिलती। चालक का लाइसेंस, वाहन के कागजात और अन्य जरूरी दस्तावेज नियमानुसार जांचे जा सकते हैं। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य फर्जी पहचान के सहारे चेकिंग से बचने और अनुचित प्रभाव बनाने की कोशिश पर रोक लगाना है।
पहचान वाहन पर लिखने से नहीं, वैध दस्तावेज से होगी साबित
वाहन पर PRESS लिखना अपने आप पत्रकार की मान्य पहचान नहीं है। वैध संस्थागत या मान्यता संबंधी पहचान जरूरी है। निजी वाहन पर POLICE लिखने से वह पुलिस विभाग का वाहन नहीं बन जाता। झूठी पुलिस पहचान का इस्तेमाल अलग कानूनी कार्रवाई का आधार हो सकता है। निर्धारित पंजीकरण चिह्न के अलावा अनधिकृत शब्द या बदलाव से बचना चाहिए। प्रेस या विभागीय पहचान सामान्य यातायात जांच से छूट नहीं देती। सिर्फ स्टीकर मिलने पर कार्रवाई होगी? कार्रवाई परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। पुलिस पहचान की वैधता, उसके इस्तेमाल और वाहन से जुड़े अन्य उल्लंघनों को देखेगी।


