- सैफई आर्थ्रोप्लास्टी अपडेट में विशेषज्ञों ने बताईं नई तकनीक की संभावनाएं; हर मरीज की संरचना के हिसाब से सर्जिकल प्लान बनाने पर जोर, अगले साल यूपीयूएमएस में रोबोटिक सर्जरी शुरू होने की तैयारी
भारत 19
इटावा। घुटना प्रत्यारोपण की तकनीक अब रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में प्रवेश कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक रोबोटिक्स की मदद से सर्जरी में एलाइनमेंट और बैलेंस को अधिक सटीक तरीके से हासिल करने में मदद मिल सकती है। इसका असर ऑपरेशन के बाद होने वाले दर्द, रिकवरी और इंप्लांट की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। भविष्य में AI और रोबोटिक्स मिलकर हर मरीज की शारीरिक संरचना के मुताबिक अलग सर्जिकल प्लान और डिजाइन तैयार करने में मदद कर सकते हैं।
यह जानकारी उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई में आयोजित चतुर्थ सैफई आर्थ्रोप्लास्टी अपडेट-2026 में विशेषज्ञों ने साझा की। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के हड्डी रोग एवं एनाटॉमी विभाग और सैफई ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में किया। उद्घाटन कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह ने किया।
दर्द और रिकवरी पर रहेगा तकनीक का फोकस
एम्स दिल्ली ट्रॉमा सेंटर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजेश मल्होत्रा ने बताया कि रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण में मरीज के दर्द को कम करना प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है। घुटना प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों में ऑपरेशन और उसके बाद होने वाले दर्द को लेकर आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि देशभर के मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में रोबोटिक्स तकनीक पर लगातार काम और अनुसंधान हो रहा है। सही एलाइनमेंट और बैलेंस हासिल होने पर ऑपरेशन से लेकर रिकवरी तक मरीज के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
इंप्लांट की उम्र बढ़ाने में भी मदद की उम्मीद
विशेषज्ञों के मुताबिक नई तकनीक के साथ घुटना प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट भी पहले की तुलना में विकसित हुए हैं। सही एलाइनमेंट और बैलेंस इंप्लांट के बेहतर काम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
AI और रोबोटिक्स मरीज की व्यक्तिगत शारीरिक संरचना को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की योजना बनाने में चिकित्सकों की सहायता कर सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने इसकी ऊंची लागत को बड़ी चुनौती बताया। नई तकनीक के विकास और उसके लगातार अपग्रेड होने का खर्च अंततः इलाज की लागत पर असर डाल सकता है।
हर मरीज के लिए अलग होगी सर्जरी की योजना
उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संतोष सिंह ने कहा कि रोबोटिक्स सर्जरी से भविष्य में इंप्लांट के असफल होने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। AI और रोबोटिक्स के संयोजन से मरीज के घुटने की संरचना का विश्लेषण कर उसके अनुरूप अलग सर्जिकल प्लान और डिजाइन तैयार किया जा सकेगा। इससे एक जैसी प्रक्रिया के बजाय मरीज की जरूरत के मुताबिक सर्जरी की योजना बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
अगले साल यूपीयूएमएस में रोबोटिक सर्जरी
यूपीयूएमएस के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी में ऑपरेशन से पहले ही तकनीक की मदद से सर्जिकल प्लानिंग की जाती है। इससे सर्जरी के दौरान सटीकता बढ़ाने में चिकित्सकों को मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में रोबोट खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि अगले साल से यूपीयूएमएस में मरीजों को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी।
ग्रामीण इलाकों में टेलीमेडिसिन से जुड़ सकती है तकनीक
कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह ने कहा कि भविष्य में रोबोटिक्स तकनीक अनुभवी चिकित्सकों के साथ मिलकर काम करेगी। टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में भी इसके इस्तेमाल की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं की सीमित उपलब्धता के बीच तकनीक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल रोबोट खरीदना पर्याप्त नहीं होगा। तकनीक के पैकेज और इलाज की लागत पर भी ध्यान देना जरूरी है।
आयुष्मान के दायरे में लाने की जरूरत
कुलपति ने रोबोटिक सर्जरी को आयुष्मान योजना के दायरे में शामिल करने की जरूरत बताई, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने तकनीक को कम लागत में उपलब्ध कराने और उसे टिकाऊ बनाने के लिए अनुसंधान पर जोर दिया।
सौ से ज्यादा डॉक्टरों ने साझा किए अनुभव
आयोजन सचिव डॉ. हरीश कुमार ने बताया कि दो दिन चले कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर, फरीदाबाद, आगरा और लखनऊ समेत कई शहरों के सौ से अधिक डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने घुटना प्रत्यारोपण में नई तकनीकों, मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किए।

