Hot Topics

नोटबंदी से युद्ध तक, भारत की प्रति व्यक्ति आय बढ़ी

  • नोटबंदी, GST और कोविड के झटकों से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव तक के बीच 2013-14 से 2023-24 में सभी राज्यों की स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति NSDP बढ़ी; 2024-25 में भी कई राज्यों में बढ़ोतरी जारी रही, जबकि 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.6 प्रतिशत रही

भारत 19

नई दिल्ली। जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में प्रति व्यक्ति आर्थिक उत्पादन पर दबाव आया, तब भारत की तस्वीर अपेक्षाकृत अलग रही। Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD) के मुताबिक 2024 के पहले तीन तिमाहियों में करीब एक-पांचवें OECD सदस्य देशों में वास्तविक GDP प्रति व्यक्ति घटी। इसके विपरीत भारत के सभी राज्यों में 2013-14 से 2023-24 के बीच स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति नेट स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी प्रति व्यक्ति Net State Domestic Product (NSDP) बढ़ी। यानी नोटबंदी, GST के संक्रमण, कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके बाद पश्चिम एशिया के तनाव जैसे बड़े झटकों के बीच राज्यों के इस औसत आर्थिक उत्पादन का स्तर नीचे नहीं गया। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि देश के हर व्यक्ति की व्यक्तिगत आय समान रूप से बढ़ी। प्रति व्यक्ति NSDP एक औसत आर्थिक संकेतक है, जबकि रोजगार, मजदूरी, आय-वितरण और परिवारों की वास्तविक क्रयशक्ति इससे अलग सवाल हैं।

भारत की मौजूदा आर्थिक तस्वीर भी इसी कहानी का दूसरा हिस्सा है। विश्व बैंक के अप्रैल 2026 के भारत विकास अपडेट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.6 प्रतिशत रही और 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। बैंक ने पश्चिम एशिया संघर्ष से बढ़ी ऊर्जा कीमतों और सप्लाई-चेन व्यवधानों को आगे की वृद्धि के लिए जोखिम बताया है। सितंबर 2026 में IMF के उप प्रबंध निदेशक ने भारत को वैश्विक वृद्धि का प्रमुख चालक और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया है।

गुजरात, गोवा से यूपी-बिहार तक तस्वीर अलग

दस साल की अवधि में सबसे बड़ी वृद्धि मिजोरम में 125.4 प्रतिशत रही। गुजरात में 90.7 प्रतिशत, गोवा में 89.9 प्रतिशत और कर्नाटक में 88.5 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। तेलंगाना में 84.3 प्रतिशत, ओडिशा में 83.4 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 81.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति NSDP 34,044 रुपये से बढ़कर 50,341 रुपये हुई, यानी 47.9 प्रतिशत वृद्धि। बिहार में यह 22,776 रुपये से बढ़कर 32,227 रुपये हुई, यानी 41.5 प्रतिशत। वहीं मेघालय में वृद्धि 24.7 प्रतिशत रही, जो तालिका में सबसे कम है।

दस साल में अर्थव्यवस्था ने झेले कई बड़े झटके

यह दशक सामान्य आर्थिक परिस्थितियों वाला नहीं था। नवंबर 2016 में नोटबंदी से नकदी और आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल दबाव आया। जुलाई 2017 में GST लागू हुआ, जिसने अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को बड़े पैमाने पर बदला और कारोबार को नई कर प्रणाली के अनुरूप ढलना पड़ा। 2020-21 में कोविड महामारी और लॉकडाउन ने आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व झटका दिया। इसके बाद अर्थव्यवस्था में रिकवरी शुरू हुई, लेकिन वैश्विक परिस्थितियां लगातार चुनौतीपूर्ण बनी रहीं।

रूस-यूक्रेन युद्ध से ऊर्जा का बड़ा झटका

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कच्चे तेल, गैस, खाद्य पदार्थों और दूसरी कमोडिटी की वैश्विक कीमतों में तेज अस्थिरता आई। भारत के लिए इसका असर इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल, परिवहन लागत और उत्पादन लागत पर असर डालता है और इसका असर महंगाई के जरिए घरेलू अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है।

पश्चिम एशिया के तनाव ने बढ़ाई नई चुनौती

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और लाल सागर-सुएज मार्ग में व्यवधान ने वैश्विक व्यापार और शिपिंग लागत पर दबाव बढ़ाया। अब पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव ने ऊर्जा बाजार के लिए जोखिम और बढ़ाया है। विश्व बैंक ने अप्रैल 2026 में कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से ऊंची ऊर्जा कीमतें और सप्लाई-चेन व्यवधान भारत की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद भारत के मजबूत macroeconomic buffers कुछ सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।

2024-25 में भी कई राज्यों की आय बढ़ी

2024-25 के उपलब्ध राज्यवार आंकड़ों में भी कई राज्यों की प्रति व्यक्ति NSDP में बढ़ोतरी जारी रही। हालांकि यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा—2013-14 से 2023-24 की मुख्य तालिका स्थिर कीमतों पर है, जबकि कुछ 2024-25 आंकड़े मौजूदा कीमतों पर उपलब्ध हैं। इसलिए दोनों को सीधे एक ही श्रृंखला मानकर नहीं जोड़ा जाना चाहिए। केंद्र सरकार की उपलब्ध तालिका में 2014-15 से 2024-25 के लिए भी कई राज्यों में स्थिर कीमतों पर वृद्धि दर्ज है। उदाहरण के लिए आंध्र प्रदेश में 2024-25 का प्रति व्यक्ति NSDP 1,41,609 रुपये और असम में 81,127 रुपये दर्ज है। छत्तीसगढ़ में यह 93,161 रुपये रहा।

2025-26 में भी भारत की वृद्धि मजबूत रही

वैश्विक व्यापार तनाव और पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच भी विश्व बैंक के मुताबिक 2025-26 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.6 प्रतिशत रही, जो 2024-25 के 7.1 प्रतिशत से अधिक थी। हालांकि 2026-27 में वृद्धि 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसका एक कारण पश्चिम एशिया संघर्ष से ऊर्जा कीमतों पर बढ़ा दबाव है। IMF ने सितंबर 2026 में भारत को वैश्विक वृद्धि का key driver बताया है। लेकिन IMF के संबंधित वक्तव्य में साथ ही टिकाऊ और समावेशी वृद्धि के लिए रोजगार, उत्पादकता और नीतिगत सुधारों पर जोर दिया गया है।

प्रति व्यक्ति आय बढ़ी, लेकिन क्या हर घर समृद्ध हुआ?

यही इस पूरे आंकड़े की सबसे महत्वपूर्ण सीमा है। प्रति व्यक्ति NSDP राज्य के औसत आर्थिक उत्पादन का संकेतक है। इसे यह मान लेना सही नहीं होगा कि राज्य के प्रत्येक व्यक्ति की जेब में उतनी ही राशि पहुंची। किसी राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के बावजूद आय-वितरण असमान हो सकता है। रोजगार, मजदूरी, महंगाई, उपभोग और परिवारों की वास्तविक क्रयशक्ति अलग-अलग तरीके से बदल सकती है। इसलिए “प्रति व्यक्ति आय बढ़ी” और “हर परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी ही बेहतर हुई” दो समान बातें नहीं हैं।

राजनीतिक सवाल के सामने आंकड़ों की तस्वीर

विपक्ष लगातार मोदी सरकार से सवाल करता रहा है कि उसके लंबे कार्यकाल में आम लोगों की आर्थिक स्थिति कितनी बदली। सरकार आर्थिक वृद्धि, निवेश और भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को अपनी उपलब्धियों में गिनाती रही है। राज्यवार आंकड़े इस बहस में एक तथ्य जरूर जोड़ते हैं। 2013-14 से 2023-24 के बीच स्थिर कीमतों पर सभी राज्यों की प्रति व्यक्ति NSDP बढ़ी, हालांकि वृद्धि की मात्रा राज्यों के बीच काफी अलग रही। यह बढ़ोतरी ऐसे दौर में हुई जब अर्थव्यवस्था ने नोटबंदी, GST संक्रमण, कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के ऊर्जा संकट जैसे कई बड़े व्यवधानों का सामना किया।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News