- एमएसएमई विकास कार्यालय के कार्यक्रम में 122 विश्वकर्मा कारीगरों ने लिया हिस्सा, ऑनलाइन बिक्री, डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग की दी गई जानकारी, यूपी में 1.43 लाख से अधिक कारीगरों को मिल चुका कौशल प्रशिक्षण
भारत 19/ कानपुर। पारंपरिक हुनर को बदलते बाजार से जोड़कर कारीगरों की कमाई बढ़ाने की तैयारी है। अब सिर्फ अच्छा उत्पाद बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसकी पहचान बनाने, ऑनलाइन बिक्री और डिजिटल बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। एमएसएमई-विकास कार्यालय में गुरुवार को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कारीगरों को ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन कारोबार के तौर-तरीके बताए गए।
हुनर को कारोबार में बदलने पर जोर
एमएसएमई-विकास कार्यालय के निदेशक विष्णु कुमार वर्मा ने कहा कि कारीगरों के व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालय हर समय उनके साथ है। ऋण से लेकर तकनीकी दक्षता बढ़ाने तक जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कारीगरों से सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक उद्यम में बदलने का आह्वान किया। आईएमटी हॉल में हुए कार्यक्रम में गुड़िया एवं खिलौने बनाने वाले, सोनार, लोहार, बढ़ई, मोची, धोबी, नाई और दर्जी समेत विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े करीब 122 कारीगर शामिल हुए।
करीब दो साल में 30 लाख लाभार्थियों का लक्ष्य पूरा
एमएसएमई-विकास कार्यालय के सहायक निदेशक नीरज कुमार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में पांच वर्ष में 30 लाख विश्वकर्मा कारीगरों को योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। यह लक्ष्य करीब दो वर्ष पूरे होने से पहले ही हासिल कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक 1,78,031 विश्वकर्मा लाभार्थियों का पंजीकरण हुआ है। इनमें 1,43,280 को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 16,675 लाभार्थियों के ऋण स्वीकृत हुए हैं, जबकि 146.5 करोड़ रुपये की ऋण राशि वितरित की जा चुकी है। इसके अलावा 72,634 टूलकिट का वितरण हुआ है।
पांच लाख तक बिना ब्याज ऋण की जानकारी
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र, कानपुर नगर के सहायक आयुक्त उद्योग अरुण कुमार ने कारीगरों को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज के प्राप्त किया जा सकता है और लाभार्थी को 4.50 लाख रुपये ही वापस करने होंगे। उन्होंने विश्वकर्मा योजना के प्रशिक्षणार्थियों से इसका लाभ उठाकर कारोबार आगे बढ़ाने की अपील की। बैंक ऑफ बड़ौदा के अग्रणी जिला प्रबंधक आदित्य चंद्रा ने भी कारीगरों को कारोबार विस्तार के लिए ऋण उपलब्ध कराने की जानकारी दी। उन्होंने ऋण से जुड़ी योजनाओं और आवेदन प्रक्रिया के बारे में बताया।
ऑनलाइन बाजार में उत्पाद की पहचान बनाने की सीख
एमएसएमई-विकास कार्यालय के सहायक निदेशक अमित बाजपेयी ने कहा कि बदलते बाजार में केवल अच्छा उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उत्पाद की ब्रांडिंग, डिजिटल पहचान और ऑनलाइन बिक्री भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार का प्रयास है कि विश्वकर्मा कारीगरों के उत्पाद देश के किसी भी हिस्से के ग्राहक तक पहुंच सकें। इससे बाजार का विस्तार होने के साथ कारीगरों की आय भी बढ़ सकती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेकर एआई तक की जानकारी
तकनीकी सत्र में अंशुल गुप्ता और डॉ. संजय भारती ने कारीगरों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण की चरणबद्ध जानकारी दी। डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग के जरिए उत्पादों को बाजार में बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के तरीके भी समझाए गए। यंग प्रोफेशनल अंकिता पाण्डेय ने कारीगरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के संभावित उपयोग के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में यंग प्रोफेशनल रजत कटियार ने लाभार्थियों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी सोनिका रस्तोगी ने किया।


