- सीएम योगी की समीक्षा बैठक के बाद तेज हुई कार्रवाई, छह मुकदमे, दो गिरफ्तार, आगरा का गोविंद शर्मा फरार
- ठेकेदारों को डराने-धमकाने, अवैध वसूली और फर्जी दस्तावेजों की जांच; 100 करोड़ के टेंडर रद, सात फर्में ब्लैकलिस्ट
भारत 19
कानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक में उठे कानपुर नगर निगम में कथित अवैध वसूली और ठेकेदारी के फर्जीवाड़े के मामले में अब पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। नगर निगम की जांच के बाद अब तक छह मुकदमे दर्ज किए गए हैं। दो आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि आगरा निवासी गोविंद शर्मा फरार है। पुलिस के अनुसार, गोविंद पर नगर निगम के ठेकों को मैनेज करने और ठेकेदारों को डराने-धमकाने का आरोप है। पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि नगर निगम ने स्वरूप नगर थाने में पांच मुकदमे दर्ज कराए हैं, जबकि ठेकेदार सनी सिंह भदौरिया की शिकायत पर फजलगंज थाने में भी मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में अब तक छह एफआईआर हो चुकी हैं।
जांच में खुली ठेकेदारी के नेटवर्क की परतें
पुलिस जांच में यह सामने आया है कि नगर निगम में ठेकों को लेकर एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय था, जो कथित तौर पर तय करता था कि किस ठेकेदार को काम मिलेगा और किसे बाहर रखा जाएगा। पुलिस आयुक्त के अनुसार, गोविंद शर्मा की भूमिका इसी नेटवर्क में सामने आई है। उस पर आरोप है कि ठेकेदारों पर दबाव बनाया जाता था और 85 प्रतिशत कम दर पर ठेका डालने के बाद लॉटरी प्रणाली के जरिए टेंडर पास कराकर काम आवंटित कराए जाते थे। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस व्यवस्था से किन लोगों को लाभ मिला और इसमें कौन-कौन शामिल था।
रंगदारी के मुकदमे में दो गिरफ्तार
फजलगंज थाने में दर्ज मुकदमे में गोविंद शर्मा के साथ संदीप जैन और रज्जन तिवारी को नामजद किया गया है। इन पर ठेकेदारों को डराने-धमकाने और रंगदारी मांगने के आरोप हैं। पुलिस ने संदीप जैन और रज्जन तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। गोविंद शर्मा की तलाश जारी है। पुलिस आयुक्त के मुताबिक उसकी लोकेशन पहले मध्य प्रदेश और बाद में राजस्थान में मिली है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हैं।
100 करोड़ के टेंडर रद, ई-टेंडरिंग बहाल
मामले की जांच के बीच नगर निगम ने ठेके आवंटित करने की लॉटरी प्रणाली को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। नगर आयुक्त ने करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर भी रद कर दिए हैं। इन कार्यों के लिए अगले 10 से 15 दिनों में दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नगर निगम ने अब ई-टेंडरिंग की व्यवस्था बहाल कर दी है, ताकि लंबित विकास कार्यों को नए सिरे से शुरू कराया जा सके।
फर्जी दस्तावेजों से ठेके पाने वालों की जांच
नगर आयुक्त की ओर से गठित टीम ने नगर निगम में पंजीकृत ठेकेदारों के दस्तावेज और उनके कार्यों की जांच की थी। जांच में मिली कमियों के बाद पांच मुकदमे दर्ज कराए गए। अब पुलिस उन ठेकेदारों को भी चिह्नित कर रही है, जिनके दस्तावेज संदिग्ध या गलत पाए गए हैं। जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि दस्तावेजों में कमी के बावजूद ऐसे ठेकेदारों को काम किन अधिकारियों या कर्मचारियों के संरक्षण में मिलता रहा।
सात फर्में ब्लैकलिस्ट, बैंक खातों की भी पड़ताल
नगर निगम ने अब तक सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया है। इन फर्मों के दस्तावेज, बैंक खाते और संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि इन फर्मों के मालिकों की अन्य कंपनियां या फर्में कौन-कौन सी हैं और ठेकेदारी के इस नेटवर्क में उन्हें किसका सहयोग मिलता था। पुलिस आयुक्त ने साफ किया कि जांच केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहेगी। ठेके हासिल करने के लिए कथित फर्जीवाड़े, धमकी या दबाव बनाने और इसमें सहयोग करने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जाएगी।
मुख्यमंत्री की समीक्षा से बदली कार्रवाई की रफ्तार
नगर निगम में ठेकों और कथित अवैध वसूली को लेकर जांच पहले से चल रही थी, लेकिन इसमें निर्णायक तेजी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक के बाद आई। मुख्यमंत्री ने कानपुर की समीक्षा के दौरान नगर निगम में कथित अवैध वसूली और ठेकों में फर्जीवाड़े को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम की आंतरिक जांच को गति मिली और मामला अब प्रशासनिक जांच के साथ पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। छह मुकदमे, दो गिरफ्तारियां और एक प्रमुख आरोपित की तलाश के बीच अब जांच की दिशा इस बात पर टिकी है कि नगर निगम की ठेकेदारी व्यवस्था में यह नेटवर्क आखिर कितने समय से सक्रिय था और इसके पीछे किन लोगों का संरक्षण था।


