कानपुर में ITBP जवान की मां का हाथ काटे जाने के चर्चित मामले में रेलबाजार पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर ली है। जांच में कृष्णा और पारस अस्पताल के प्रबंधन तथा डॉक्टरों सहित 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि इलाज में गंभीर लापरवाही और निगरानी व्यवस्था की कमी सामने आई है।
KANPUR/ कानपुर के महाराजपुर स्थित ITBP की 32वीं वाहिनी में तैनात जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी के हाथ काटे जाने का मामला अब कानूनी कार्रवाई के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। रेलबाजार पुलिस ने मामले की जांच पूरी करते हुए कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल के प्रबंधन एवं डॉक्टरों समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह सामने आया कि मरीज के इलाज की निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण स्थिति गंभीर होती चली गई।
कब और कैसे बिगड़ी थी निर्मला देवी की तबीयत?
जानकारी के अनुसार 13 मई को निर्मला देवी की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी और हृदय संबंधी दिक्कतें थीं। उनके पुत्र विकास सिंह ने उन्हें कानपुर के टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया। 14 मई तक अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन इसी दौरान उनका दाहिना हाथ काला पड़ने लगा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इस गंभीर संकेत पर समय रहते उचित चिकित्सकीय कदम नहीं उठाए।
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दूसरे अस्पताल में भी नहीं मिला समय पर उपचार
14 मई की शाम निर्मला देवी को पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि यहां भी उन्हें समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिला। जांच रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 घंटे तक आवश्यक उपचार में देरी हुई। स्थिति लगातार बिगड़ने के बाद संक्रमण इतना फैल गया कि 17 मई को डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा। इस घटना ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
जांच में क्या सामने आया?
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के संज्ञान लेने के बाद 19 मई को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी के निर्देश पर छह सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार कृष्णा हॉस्पिटल में मरीज के हाथ की समस्या का समुचित उपचार नहीं किया गया। संक्रमण बढ़ने के बावजूद किसी सर्जन को नहीं बुलाया गया और परिजनों को समय पर सही जानकारी भी नहीं दी गई।
वहीं पारस हॉस्पिटल में भी मरीज को किसी सर्जन से तत्काल नहीं दिखाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि संक्रमण के गंभीर स्तर तक पहुंचने के बावजूद आवश्यक विशेषज्ञ उपचार में देरी हुई।
कटे हाथ को परिवार को सौंपना भी माना गया लापरवाही
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू कटे हुए हाथ के संरक्षण से जुड़ा है। जांच अधिकारियों के अनुसार हाथ को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निस्तारित करने के बजाय परिजनों को सौंप दिया गया था। इस संबंध में हिस्टोपैथोलॉजी जांच कराने का प्रयास किया गया, लेकिन मेडिकल कॉलेज और सीएमओ कार्यालय के बीच तकनीकी विवाद के कारण रिपोर्ट लंबित है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए इस रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट आने पर उसे अदालत में अलग से प्रस्तुत किया जाएगा।
पुलिस क्या कह रही है?
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता के अनुसार जांच में दोनों अस्पतालों के प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकीय कर्मियों की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर चार्जशीट तैयार कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही यह चार्जशीट अदालत में दाखिल की जाएगी, जिसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ITBP जवान की मां निर्मला देवी का हाथ काटे जाने का मामला अब कानूनी कार्रवाई के निर्णायक चरण में पहुंच गया है। पुलिस जांच में उपचार में कथित लापरवाही और निगरानी की कमी जैसे गंभीर पहलू सामने आए हैं। अब अदालत में प्रस्तुत होने वाली चार्जशीट के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी। इस मामले पर स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक चर्चा जारी है।



