KANPUR/ कानपुर में आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां का इलाज के दौरान हाथ कटने का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल टीम की संशोधित जांच रिपोर्ट में उपचार में देरी को गंभीर लापरवाही माना गया है, जिसके बाद दोनों अस्पतालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। महाराजपुर स्थित आईटीबीपी 32वीं बटालियन में तैनात जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी को 13 मई को सांस संबंधी समस्या के चलते टाटमिल स्थित कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान उनके हाथ की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, लेकिन संक्रमण बढ़ने के कारण 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा। घटना के बाद विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर न्याय की मांग करते हुए पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे। इस घटना ने पूरे प्रदेश में चर्चा पैदा कर दी थी।
संशोधित जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?
पहले स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट को लेकर कई सवाल उठे थे। पुलिस अधिकारियों और पीड़ित पक्ष ने रिपोर्ट को अस्पष्ट बताया था क्योंकि उसमें स्पष्ट रूप से किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई थी। इसके बाद मेडिकल टीम से दोबारा बिंदुवार रिपोर्ट मांगी गई। संशोधित रिपोर्ट में कहा गया कि मरीज के उपचार में अत्यधिक विलंब हुआ, जिससे स्थिति गंभीर होती चली गई। मेडिकल टीम ने माना कि यदि समय रहते आवश्यक चिकित्सकीय निर्णय लिए जाते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उपचार में देरी के कारण संक्रमण बढ़ता गया और अंततः मरीज का हाथ काटना पड़ा।
PARAS और KRISHNA HOSIPITAL पर FIR करने की तैयारी
संशोधित रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट के आधार पर संबंधित धाराओं में दोनों अस्पतालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार आगे की जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर अतिरिक्त कार्रवाई भी की जाएगी। मामले के दौरान यह चर्चा भी सामने आई कि आईटीबीपी और पुलिस के बीच टकराव जैसी स्थिति बन गई थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई विवाद नहीं था।
पुलिस के अनुसार:
आईटीबीपी कमांडेंट और मेडिकल ऑफिसर को चर्चा के लिए बुलाया गया था।
जांच रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
पुलिस कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में आईटीबीपी जवानों की मौजूदगी से गलत संदेश गया।
बाद में जवानों को वापस भेज दिया गया।
पुलिस ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी आईटीबीपी मुख्यालय और महानिदेशक को भेजी गई है। साथ ही संबंधित स्तर पर विभागीय और अनुशासनात्मक जांच कराने की भी अनुशंसा की गई है।
यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है। इसने अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला प्रदेश में मेडिकल जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो सकता है। आईटीबीपी जवान की मां का हाथ कटने का मामला अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। संशोधित जांच रिपोर्ट में उपचार में देरी को गंभीर लापरवाही मानने के बाद पुलिस कार्रवाई शुरू हो गई है। अब सभी की नजर आगामी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि जिम्मेदारी किसकी थी और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।



