- ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने अमेरिका और इजरायल को चेताया; कहा- दोबारा हमला हुआ तो संघर्ष का दायरा हिंद महासागर तक फैल सकता है, इसी बीच न्यूयॉर्क में होर्मुज खोलने और युद्ध से बाहर निकलने के रास्ते पर अमेरिका-ईरान की बातचीत जारी
भारत 19 डेस्क
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को संघर्ष का दायरा बढ़ने की चेतावनी दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने कहा है कि अगर अमेरिका या इजरायल ने ईरान पर दोबारा हमला किया तो संघर्ष का दायरा हिंद महासागर और उससे आगे तक फैल सकता है। यह अभी ईरान की चेतावनी है, हिंद महासागर तक युद्ध पहुंचने की पुष्टि नहीं। सफवी का बयान ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी के जरिए सामने आया।
दोबारा हमला हुआ तो नया मोर्चा खोलने की चेतावनी
सफवी ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिका या इजरायल की ओर से किसी नए हमले की स्थिति के लिए संभावित परिस्थितियों की तैयारी की है। उनके मुताबिक, अगर फिर हमला होता है तो संघर्ष का भौगोलिक दायरा और बढ़ सकता है। उन्होंने फार्स के जरिए जारी बयान में कहा कि संघर्ष फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लाल सागर तक पहुंच चुका है और संभावित नए युद्ध की स्थिति में इसका विस्तार हिंद महासागर या उससे आगे तक हो सकता है। यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि हिंद महासागर में युद्ध फैलने की कोई नई सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट नहीं हुई है। सफवी ने भविष्य में अमेरिकी या इजरायली हमले की स्थिति में संभावित विस्तार की बात कही है।
अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत भी चल रही है
ईरान की इस चेतावनी के समानांतर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी खुला हुआ है। रॉयटर्स के मुताबिक, न्यूयॉर्क में दोनों देशों के वार्ताकार युद्ध से बाहर निकलने के चरणबद्ध रास्ते पर चर्चा कर रहे हैं। इस संभावित व्यवस्था में ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर खोलना और इसके बदले अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक नाकाबंदी हटाने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। हालांकि बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन यह है कि दोनों पक्ष अपने-अपने दबाव के साधन पहले छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
होर्मुज बना अमेरिका-ईरान बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस पूरे संकट में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दों में से एक बन गया है। ईरान के लिए यह दबाव बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जबकि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए इस समुद्री मार्ग को खोलना चाहता है। रॉयटर्स के अनुसार 24 सितंबर को करीब 60 वाणिज्यिक जहाज होर्मुज से गुजरे। इनमें करीब 40 जहाजों ने सुरक्षा के लिए अमेरिकी सेना के साथ समन्वय किया था। यह जुलाई की शुरुआत के बाद उस दिन होर्मुज से गुजरने वाला कच्चे तेल का सबसे अधिक दैनिक परिवहन बताया गया। यही वजह है कि होर्मुज को लेकर किसी भी बदलाव का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। इस मार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार जुड़ा हुआ है।
होर्मुज खुलने पर युद्ध से बाहर निकलने की राह
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान जिस चरणबद्ध समझौते पर विचार कर रहे हैं, उसमें पहले होर्मुज को दोबारा खोलने और इसके समानांतर अमेरिकी आर्थिक दबाव कम करने की संभावना पर चर्चा हुई है। हालांकि यह अभी प्रस्तावित बातचीत का हिस्सा है, अंतिम समझौता नहीं। इसका अर्थ यह है कि मौजूदा स्थिति में दो समानांतर घटनाक्रम चल रहे हैं। एक तरफ ईरान भविष्य में हमले की स्थिति में संघर्ष फैलाने की चेतावनी दे रहा है, दूसरी तरफ दोनों देश युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं।
हिंद महासागर का जिक्र भारत के लिए क्यों अहम
ईरान की चेतावनी में हिंद महासागर का नाम आने से भारत के लिए भी इस घटनाक्रम का महत्व बढ़ जाता है। पश्चिम एशिया से भारत का ऊर्जा और समुद्री व्यापार महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से जुड़ा है। अगर भविष्य में संघर्ष वास्तव में हिंद महासागर के किसी हिस्से तक फैलता है तो जहाजों की सुरक्षा, समुद्री बीमा, माल ढुलाई और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। लेकिन अभी ऐसे किसी विस्तार की घटना सामने नहीं आई है, इसलिए इन संभावित प्रभावों को भविष्य की आशंका के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
लाल सागर और बाब-अल-मंदेब भी बने अहम मोर्चे
सफवी ने अपने बयान में फारस की खाड़ी और होर्मुज से लेकर लाल सागर तक संघर्ष के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने बाब-अल-मंदेब को भी संभावित नए मोर्चे के संदर्भ में जोड़ा। बाब-अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके बाद समुद्री रास्ता हिंद महासागर की ओर जाता है। इसलिए ईरानी बयान में इन समुद्री क्षेत्रों का उल्लेख रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में होर्मुज खोलने की मांग
इसी बीच संयुक्त राष्ट्र में करीब 80 देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर खोलने की मांग की। संयुक्त बयान में समुद्री यातायात, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर को लेकर चिंता जताई गई। बयान में लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में हूती गतिविधियों से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया गया। हालांकि ईरान और उसके सहयोगी इन कार्रवाइयों को अपने दृष्टिकोण से रक्षात्मक कदम बताते रहे हैं। ऐसे में होर्मुज और लाल सागर को लेकर कूटनीतिक तथा सैन्य दोनों स्तरों पर तनाव बना हुआ है।
एक तरफ चेतावनी, दूसरी तरफ कूटनीति
ईरान के ताजा बयान को मौजूदा संकट की दोहरी तस्वीर के तौर पर देखा जा सकता है। तेहरान एक तरफ संभावित नए अमेरिकी या इजरायली हमले की स्थिति में संघर्ष का दायरा हिंद महासागर तक बढ़ाने की चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ होर्मुज खोलने और युद्ध से बाहर निकलने के संभावित रास्ते पर बातचीत भी चल रही है।


