- India-Canada CEPA की पांचवीं दौर की वार्ता 5 अक्टूबर से, ऊर्जा, दाल, महत्वपूर्ण खनिज और औद्योगिक कच्चे माल की बढ़ सकती है आवक, शुल्क घटने पर उद्योगों की लागत कम होने की संभावना
भारत 19
नई दिल्ली। भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) यानी India-Canada CEPA पर बातचीत आगे बढ़ रही है। दोनों देशों के बीच वार्ता के चार दौर पूरे हो चुके हैं और पांचवां दौर 5 अक्टूबर से शुरू होना है। दोनों पक्षों ने 2026 के अंत तक समझौते को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। भारत के लिए इस समझौते का एक अहम पहलू कनाडा से ऊर्जा, दाल, महत्वपूर्ण खनिज और औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ना है। यदि CEPA के तहत शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं तो आयातित कच्चे माल की लागत घटने की गुंजाइश बनेगी। इससे संबंधित भारतीय उद्योगों की उत्पादन लागत पर असर पड़ सकता है।
ऊर्जा और खनिजों पर भारत की खास नजर
CEPA वार्ता में वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के साथ टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाएं, निवेश, बौद्धिक संपदा, मूल स्थान के नियम, सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी मानक और तकनीकी व्यापार बाधाएं शामिल हैं। भारत के लिए ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज विशेष महत्व रखते हैं। दोनों देशों के बीच LNG, LPG और मेटलर्जिकल कोल से जुड़े वाणिज्यिक सहयोग की प्रगति पर भी चर्चा हुई है। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति बढ़ने से बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े भारतीय उद्योगों को वैकल्पिक स्रोत मिल सकते हैं।
दाल से बैटरी उद्योग तक पड़ सकता है असर
कनाडा पहले से भारत को दालें, खनिज ईंधन एवं तेल, वुड पल्प और अन्य कच्चे माल का निर्यात करता है। यदि इन उत्पादों पर शुल्क और दूसरी व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं तो भारतीय आयातकों की लागत घट सकती है। दालों की आपूर्ति बढ़ने से खाद्य सुरक्षा और उपलब्धता को मदद मिल सकती है। वहीं महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर आपूर्ति से बैटरी, ईवी और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र को नए स्रोत मिलेंगे।
सस्ता कच्चा माल घटा सकता उत्पादन लागत
कनाडा से आने वाले कच्चे माल की लागत कम होने पर भारतीय कंपनियों की उत्पादन लागत घटने की संभावना है। इसका कुछ लाभ आगे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है, लेकिन यह स्वतः तय नहीं है। अंतिम कीमत पर वैश्विक कमोडिटी कीमतों, माल ढुलाई, बीमा, विनिमय दर, घरेलू कर और कंपनियों की मूल्य नीति का भी असर रहता है। इसलिए कच्चा माल सस्ता होने के बावजूद हर उत्पाद की खुदरा कीमत में समान कमी जरूरी नहीं है।
कनाडा में भारतीय उत्पादों के लिए खुलेगा बाजार
CEPA का दूसरा बड़ा पहलू कनाडा में भारतीय उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाना है। भारत फार्मास्यूटिकल, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, चमड़ा, दूरसंचार और आईटी जैसे क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुंच चाहता है। मई में कनाडा गए भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल में 100 से अधिक कंपनियां शामिल थीं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसरों को लेकर बढ़ती दिलचस्पी का संकेत मिलता है। 2025 में कनाडा ने भारत से करीब 9.7 अरब डॉलर के सामान का आयात किया, जबकि भारत ने कनाडा से करीब 3.9 अरब डॉलर का माल आयात किया। भारत से कनाडा जाने वाले प्रमुख उत्पादों में कीमती पत्थर एवं धातु, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल उत्पाद शामिल रहे।
अमेरिका-कनाडा तनाव से बढ़ी व्यापार विविधता
भारत-कनाडा CEPA को अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते व्यापार तनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिका पर काफी हद तक निर्भर रहा है, लेकिन 2026 में टैरिफ और व्यापार नियमों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में कनाडा अमेरिका के बाहर अपने निर्यात बाजारों का दायरा बढ़ा रहा है। भारत इस रणनीति में एक बड़ा संभावित बाजार है। कनाडा ने अगले दशक में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करने और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
CEPA में कई संवेदनशील मुद्दे अभी बाकी
तेजी से आगे बढ़ रही वार्ता के बावजूद कई मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। कनाडा के लिए डेयरी, पोल्ट्री और अंडे जैसे कृषि क्षेत्र संवेदनशील हैं। वहीं ऑटोमोबाइल क्षेत्र में नियमों और रूल्स ऑफ ओरिजिन का मुद्दा अहम रहेगा। भारत के लिए बाजार पहुंच के साथ कच्चे माल की विश्वसनीय आपूर्ति और घरेलू उद्योगों के हित महत्वपूर्ण हैं। इसलिए अंतिम समझौते की शर्तें दोनों देशों के कारोबार पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
कीमतों में कमी की राह शुल्क से तय होगी
India-Canada CEPA का असर केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकता। यदि समझौते के तहत कच्चे माल पर शुल्क और अन्य बाधाएं कम होती हैं तो ऊर्जा, दाल, खनिज, बैटरी, ईवी और विनिर्माण उद्योगों की लागत पर दबाव घट सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि समझौता लागू होते ही बाजार में हर वस्तु सस्ती हो जाएगी। कच्चे माल की लागत में कमी उपभोक्ता कीमतों तक कितनी पहुंचेगी, यह वैश्विक बाजार, लॉजिस्टिक्स, विनिमय दर और कंपनियों की मूल्य नीति पर निर्भर करेगा। इस लिहाज से CEPA का संभावित असर सस्ता कच्चा माल, कम उत्पादन लागत और कुछ क्षेत्रों में संभावित कीमत राहत के रूप में सामने आ सकता है।

