- 10 हजार रुपये से कम के कर विवादों में नोटिस नहीं जारी करने की सिफारिश; पांच करोड़ रुपये तक टर्नओवर वालों को शर्तों के साथ विलंब शुल्क में छूट और पात्र मामलों में 90% रिफंड स्वचालित जारी करने का प्रस्ताव
भारत 19/ नई दिल्ली। छोटे कारोबारियों को जीएसटी के मामूली कर विवादों, रिटर्न में देरी के शुल्क और रिफंड के लंबे इंतजार से राहत मिल सकती है। जीएसटी परिषद ने 10 हजार रुपये से कम की कर राशि वाले मामलों में कारण बताओ नोटिस नहीं जारी करने, पांच करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार वाले पात्र करदाताओं को विलंब शुल्क से छूट देने और चुनिंदा रिफंड दावों में 90 प्रतिशत राशि स्वचालित रूप से जारी करने की सिफारिश की है। साथ ही, छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्यों में कारोबार करना आसान बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि, इन बदलावों का लाभ संबंधित कानूनी संशोधन और अधिसूचनाएं जारी होने के बाद ही मिल सकेगा।
10 हजार रुपये से कम के कर विवादों में नहीं आएगा नोटिस
जीएसटी परिषद ने केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी, एकीकृत जीएसटी और उपकर को मिलाकर 10 हजार रुपये से कम की कर राशि वाले मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी नहीं करने की सिफारिश की है। प्रस्ताव में नई व्यवस्था लागू होने की तारीख पर ऐसे मामलों से जुड़े लंबित नोटिस और अपीलों के निपटारे को भी शामिल किया गया है। इससे छोटी कर देनदारियों को लेकर जवाब तैयार करने, दस्तावेज जुटाने और कर सलाहकार की मदद लेने में कारोबारियों का समय और खर्च बच सकता है। परिषद ने गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में जुर्माने को लेकर भी राहत सुझाई है। संबंधित आदेश के बाद तय अवधि में बकाया कर और ब्याज जमा करने पर कुछ मामलों में जुर्माना कर राशि के पांच प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रस्ताव है। केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 73 के तहत यह अवधि 30 दिन और धारा 74ए के तहत 60 दिन प्रस्तावित है। इसके अलावा, गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में न्यूनतम 10 हजार रुपये के जुर्माने की अनिवार्यता हटाने और सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25 हजार से घटाकर 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है। ये अलग-अलग प्रावधान हैं और सभी प्रकार के कर विवादों पर एक समान लागू नहीं होंगे।
पांच करोड़ तक कारोबार वालों को विलंब शुल्क में छूट
परिषद ने पिछले वित्त वर्ष में पांच करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार वाले पात्र करदाताओं को जीएसटी रिटर्न देर से दाखिल करने पर विलंब शुल्क से छूट देने की सिफारिश की है। यह राहत जीएसटी अधिनियम की धारा 39(1) के तहत आने वाले रिटर्न के लिए प्रस्तावित है। इसके लिए समयसीमा की शर्त भी रखी गई है। देरी से दाखिल रिटर्न उस महीने के अंत तक जमा करना होगा, जिसमें उसकी मूल नियत तारीख पड़ती है। यानी केवल पांच करोड़ रुपये तक टर्नओवर होना पर्याप्त नहीं होगा; कारोबारी को निर्धारित शर्त भी पूरी करनी होगी। प्रस्ताव लागू होने पर पात्र कारोबारियों को रिटर्न में देरी के कारण लगने वाले विलंब शुल्क से राहत मिल सकती है।
रिफंड के लिए 15 की जगह 10 दिन में पावती
कारोबारियों की पूंजी जल्द वापस दिलाने के लिए परिषद ने रिफंड आवेदन पर पावती जारी करने या कमी बताने वाला ज्ञापन देने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की है। यदि अधिकारी इस अवधि में पावती या कमी संबंधी ज्ञापन जारी नहीं करता है, तो सिस्टम के जरिए आवेदन की पावती माने जाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का रिफंड भी अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना स्वचालित रूप से मंजूर करने की सिफारिश की गई है। इससे कारोबारियों को अपनी अतिरिक्त जमा राशि वापस पाने के लिए कम इंतजार करना पड़ सकता है।
पात्र दावों में 90% रिफंड स्वचालित जारी करने का प्रस्ताव
निर्यात से जुड़ी शून्य-दर वाली आपूर्ति और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के पात्र मामलों में जोखिम आकलन के बाद रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि अनंतिम रूप से स्वचालित जारी करने की सिफारिश की गई है। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर उस स्थिति को कहते हैं, जब इनपुट पर जीएसटी की दर तैयार माल की तुलना में अधिक होती है। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो सकता है और कारोबारी की पूंजी फंस जाती है। प्रस्तावित व्यवस्था के अगले चरण में सिस्टम से सत्यापन के बाद शून्य-दर वाली आपूर्ति से जुड़े पात्र रिफंड दावों को स्वचालित मंजूरी देने की भी सिफारिश है। इसमें जोखिम आकलन और लंबित बकाया राशि का समायोजन शामिल होगा। इसलिए 90 प्रतिशत अग्रिम रिफंड को सभी प्रकार के दावों पर लागू नहीं माना जा सकता। रिफंड आवेदन में दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने की जरूरत कम करने और जानकारी को सिस्टम के अनुकूल प्रारूप में दर्ज कराने का प्रस्ताव भी है। इससे कागजी औपचारिकताएं घट सकती हैं।
छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्यों में कारोबार आसान
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों को उन राज्यों में भी कारोबार करने की सुविधा देने की सिफारिश की गई है, जहां उनका अपना भौतिक कारोबारी प्रतिष्ठान नहीं है। प्रस्ताव के तहत ई-कॉमर्स ऑपरेटर के संबंधित राज्य में स्थित गोदाम को विक्रेता के कारोबार का प्रमुख स्थान घोषित करने की सुविधा मिल सकती है। इसके लिए निर्धारित शर्तें लागू होंगी। इनमें संबंधित राज्य में विक्रेता की ओर से प्रति माह 2.5 लाख रुपये से अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे हस्तांतरित नहीं करने की शर्त भी शामिल है। पात्र मामलों में पंजीकरण स्वचालित रूप से देने का प्रस्ताव है। इससे छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को दूसरे राज्यों में ग्राहकों तक पहुंचने के लिए अलग कारोबारी परिसर स्थापित करने की जरूरत कम हो सकती है।
राहत के लिए अधिसूचना का इंतजार
जीएसटी परिषद की सिफारिशों का उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ घटाना, मामूली कर विवादों में पत्राचार कम करना और कारोबार में नकदी की उपलब्धता बेहतर बनाना है। लेकिन सिफारिश और लागू नियम के बीच कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। संबंधित संशोधन, अधिसूचनाएं या परिपत्र जारी होने के बाद ही पात्र कारोबारी इन सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। तब तक मौजूदा नियमों और रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा का पालन करना जरूरी होगा।


