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तकनीक का सही इस्तेमाल करें युवा, तभी शहर बनेंगे हाईटेक

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में आयोजित अर्बन गवर्नेंस कार्यशाला में छात्रों को शहरी प्रशासन, नागरिक सहभागिता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने युवाओं से तकनीक का सही इस्तेमाल कर शहरों के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की।

– सीएसजेएमयू की कार्यशाला में छात्रों को बताया गया अर्बन गवर्नेंस का महत्व, नागरिक सहभागिता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग पर दिया जोर

कानपुर/शहरों के विकास में तकनीक केवल एक साधन नहीं, बल्कि बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। जरूरत है कि युवा सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित न रखें, बल्कि शहर की समस्याओं के समाधान और बेहतर शहरी शासन के लिए भी करें। यदि युवा तकनीक का सही इस्तेमाल करें तो जाम, कूड़े के ढेर, जलभराव और बुनियादी सुविधाओं जैसी समस्याओं से जूझ रहे शहर भी तेजी से हाईटेक और व्यवस्थित बन सकते हैं।

इसी सोच के साथ छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के समाज कार्य विभाग ने प्रजा फाउंडेशन के सहयोग से सोमवार को ‘अर्बन गवर्नेंस प्रोग्राम’ पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें छात्र-छात्राओं को शहरी प्रशासन, नागरिक सहभागिता और डेटा आधारित सुशासन की व्यवहारिक जानकारी दी गई।

शिकायत करें, बदलाव की शुरुआत करें

प्रजा फाउंडेशन की प्रशिक्षक आयुषी खरे ने कहा कि आज लगभग सभी सरकारी और गैर-सरकारी परियोजनाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हैं। यदि युवा इन प्लेटफॉर्म का सकारात्मक उपयोग करें और अपनी समस्याएं सही मंच पर दर्ज कराएं तो शहरों के विकास की रफ्तार तेज हो सकती है। उन्होंने छात्रों से अपने क्षेत्र के पार्षद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की जानकारी रखने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि गली-मोहल्लों की वर्षों पुरानी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के पोर्टलों पर शिकायत दर्ज कराना भी जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है।

किताबी ज्ञान से आगे बढ़ने की जरूरत

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संकाय अधिष्ठाता प्रो. संदीप कुमार सिंह ने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री सफलता की गारंटी नहीं है। कौशल, व्यवहारिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सरोकार ही युवाओं की वास्तविक पहचान बनते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य शिक्षा का उद्देश्य केवल समस्याओं का अध्ययन करना नहीं, बल्कि समाज के साथ मिलकर उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना भी है। ऐसे प्रशिक्षण विद्यार्थियों को भविष्य में बेहतर सामाजिक कार्यकर्ता और विकास पेशेवर बनने में मदद करेंगे।

अर्बन गवर्नेंस की व्यवहारिक समझ

कार्यशाला में छात्रों को भारत की त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था, केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की भूमिका, भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची तथा नगरपालिकाओं को सौंपे गए 18 प्रमुख दायित्वों की जानकारी दी गई। इसके अलावा शहरी नियोजन, सहभागी शासन (Participatory Governance), सार्वजनिक नीति, डेटा विश्लेषण, नागरिक उत्तरदायित्व और सूचना के अधिकार (आरटीआई) से जुड़े व्यवहारिक अभ्यास भी कराए गए, ताकि छात्र प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवहारिक रूप से समझ सकें।

छात्रों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए समाधान

कार्यशाला के दौरान छात्र-छात्राओं ने शहरी प्रशासन और नागरिक अधिकारों से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया। कार्यक्रम में स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के निदेशक डॉ. अमित कुमार मिश्रा, समाज कार्य विभाग के समन्वयक डॉ. सत्येन्द्र सिंह चौहान, प्रजा फाउंडेशन की विशेषज्ञ प्रशिक्षक झरना दास और प्रज्ञा सहित अन्य शिक्षाविदों ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

सीएसजेएमयू में आयोजित कार्यशाला के माध्यम से छात्रों को अर्बन गवर्नेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और नागरिक सहभागिता की व्यवहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने युवाओं से तकनीक का सकारात्मक उपयोग कर शहरों के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

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