- निजी हॉस्टल, पीजी और आवासों में रहने वाले गैर-जिले के छात्रों का बनेगा डेटाबेस; आपात स्थिति में छात्रों और परिजनों तक तुरंत पहुंचेगी विश्वविद्यालय की मदद
भारत 19
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) अब अपने कैंपस से बाहर रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों का भी ख्याल रखेगा। दूसरे जिलों से आकर विश्वविद्यालय में पढ़ रहे और निजी हॉस्टल, पीजी या अन्य आवासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं की जानकारी जुटाकर विश्वविद्यालय डेटाबेस तैयार करेगा। किसी आपात स्थिति में इसी रिकॉर्ड के आधार पर विद्यार्थियों और उनके परिजनों तक समय पर पहुंचने के साथ उन्हें जरूरी संस्थागत सहायता और काउंसिलिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने चीफ प्रॉक्टर को गैर-जिले के विद्यार्थियों की जानकारी जुटाकर डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें विद्यार्थियों के वर्तमान आवास की आवश्यक जानकारी के साथ उनके साथ रहने वाले व्यक्तियों का जरूरी विवरण भी दर्ज किया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि परिवार से दूर रह रहे विद्यार्थियों की आवासीय जानकारी उपलब्ध होने से किसी आकस्मिक परिस्थिति में उनसे संपर्क करना आसान होगा।
कैंपस से बाहर रहने वाले छात्र भी सुरक्षा दायरे में
दूसरे जिलों से आने वाले सभी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के छात्रावास में जगह मिलना संभव नहीं होता। ऐसे में कई छात्र-छात्राएं शहर में निजी हॉस्टल, पीजी या अन्य आवासों में रहते हैं। अब विश्वविद्यालय ऐसे विद्यार्थियों को भी अपनी सहायता व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। डेटाबेस में विद्यार्थी के वर्तमान आवास और आवश्यक संपर्क संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। साथ ही उसके साथ रहने वाले व्यक्तियों का जरूरी विवरण भी रखा जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विद्यार्थी तक पहुंचने में परेशानी न हो।
आपात स्थिति में परिजनों तक पहुंचेगी सूचना
विश्वविद्यालय के पास विद्यार्थियों की वर्तमान आवासीय जानकारी उपलब्ध होने से किसी आकस्मिक स्थिति में उनसे तत्काल संपर्क किया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर उनके परिजनों को भी समय पर सूचना दी जा सकेगी। इससे परिवार से दूर रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों को परेशानी के समय विश्वविद्यालय का संस्थागत सहयोग मिल सकेगा।
निजी हॉस्टल और पीजी में रहने वालों पर फोकस
प्रस्तावित डेटाबेस में कानपुर के बाहर के जिलों से आने वाले छात्र-छात्राओं को शामिल किया जाएगा। निजी हॉस्टल, पीजी और अन्य निजी आवासों में रहने वाले विद्यार्थियों की वर्तमान आवासीय जानकारी जुटाई जाएगी। साथ रहने वाले व्यक्तियों का आवश्यक विवरण भी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।
काउंसिलिंग और सहायता व्यवस्था से भी जुड़ेंगे छात्र
विश्वविद्यालय की पहल केवल विद्यार्थियों का रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी। निजी आवासों में रहने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की सहायता और काउंसिलिंग व्यवस्था से भी जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों की व्यक्तिगत और शैक्षणिक समस्याओं को समझना और जरूरत के समय उन्हें संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना है।
सुरक्षित माहौल में पढ़ाई विश्वविद्यालय की प्राथमिकता
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी की सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्राथमिकता है। गैर-जिले से आने वाले विद्यार्थियों के वर्तमान आवास की सामान्य जानकारी उपलब्ध रहने से आवश्यकता के समय विश्वविद्यालय उनके साथ खड़ा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि डेटाबेस के माध्यम से विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों के बीच संपर्क को और मजबूत किया जाएगा। यह पहल खास तौर पर उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो परिवार से दूर रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
डेटाबेस में दर्ज होगी ये जानकारी
- कानपुर के बाहर के जिलों से आने वाले छात्र-छात्राएं
- निजी हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी
- पीजी में रहने वाले विद्यार्थी
- अन्य निजी आवासों में रहने वाले विद्यार्थी
- वर्तमान आवास और आवश्यक संपर्क संबंधी जानकारी
- साथ रहने वाले व्यक्तियों का आवश्यक विवरण
जरूरत के समय ऐसे काम आएगा डेटाबेस
तत्काल संपर्क: आकस्मिक स्थिति में विद्यार्थी तक पहुंचना आसान होगा।
परिजनों को सूचना : जरूरत पड़ने पर परिवार से समय पर संपर्क किया जा सकेगा।
काउंसिलिंग : विद्यार्थियों की व्यक्तिगत और शैक्षणिक समस्याओं को समझने में मदद मिलेगी।
संस्थागत सहायता : निजी आवास में रहने वाले विद्यार्थी भी विश्वविद्यालय की सहायता व्यवस्था से जुड़े रहेंगे।


