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फिजियोथेरेपी प्रशिक्षण में मानकीकरण से सुधरेगा मरीजों का इलाज

  • सीएसजेएमयू में 15 दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला शुरू, विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण; पोश्चर, मांसपेशीय असंतुलन और कोर ट्रेनिंग से उपचार कौशल बढ़ाने पर जोर

भारत 19/ कानपुर। फिजियोथेरेपी में बेहतर उपचार के लिए सिर्फ तकनीकों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। मरीज की शारीरिक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन, मांसपेशियों के असंतुलन की सही पहचान और उपचार की मानकीकृत प्रक्रिया भी उतनी ही जरूरी है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर में विद्यार्थियों के लिए 15 दिवसीय हैंड्स-ऑन फिजियोथेरेपी कार्यशाला शुरू हुई है। इसमें आधुनिक तकनीकों के साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक और क्लिनिकल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यशाला के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि गलगोटियास यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा के स्कूल ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज की डीन प्रो. शगुन अग्रवाल ने कहा कि फिजियोथेरेपी शिक्षा और उपचार में एक समान मानकों को अपनाना समय की जरूरत है। नियमित अभ्यास और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की उपचार संबंधी दक्षता बढ़ेगी, जिससे वे भविष्य में मरीजों को अधिक प्रभावी उपचार दे सकेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की ओर से निःशुल्क कार्यशाला आयोजित करने की पहल की सराहना की। उनके अनुसार इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल में बदलने में मदद मिलती है और उनका पेशेवर विकास मजबूत होता है।

किताबी ज्ञान के साथ क्लिनिकल कौशल पर जोर

स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के निदेशक प्रो. मुनीश रस्तोगी ने कहा कि फिजियोथेरेपी के विद्यार्थियों के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। मरीज की समस्या को समझने, उसकी शारीरिक स्थिति का आकलन करने और उसके अनुरूप उपचार देने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्लिनिकल कौशल जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक उपचार परिस्थितियों में तकनीकों का सही इस्तेमाल सीखना विद्यार्थियों के पेशेवर कौशल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे वे मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। प्रो. दिग्विजय शर्मा ने विद्यार्थियों से विशेषज्ञों के साथ संवाद करने, सवाल पूछने और प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। उन्होंने फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं में एकरूपता लाने पर भी जोर दिया।

पोश्चर और मांसपेशीय असंतुलन का आकलन

कार्यशाला के पहले दिन ‘पोश्चरल डिसफंक्शन एवं मांसपेशीय असंतुलन : मसल एनर्जी टेक्नीक (एमईटी) और कोर ट्रेनिंग से आकलन एवं सुधार’ विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों को शरीर की मुद्रा से जुड़ी समस्याओं की पहचान, मांसपेशियों के असंतुलन का आकलन और उसे सुधारने की तकनीकों के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण में मसल एनर्जी टेक्नीक और कोर ट्रेनिंग के जरिए मरीज की शारीरिक स्थिति को समझने तथा उपचार की दिशा तय करने पर व्यावहारिक जोर दिया गया।

15 दिन चलेगी हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण प्रक्रिया

कार्यशाला का आयोजन डॉ. नेहा शुक्ला और डॉ. आदर्श कुमार श्रीवास्तव कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा शुक्ला ने किया। इसमें शिक्षक और फिजियोथेरेपी के विद्यार्थी मौजूद रहे। 15 दिवसीय कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न फिजियोथेरेपी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की क्लिनिकल समझ और उपचार संबंधी कौशल को मजबूत करना है, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद मरीजों की शारीरिक समस्याओं के आकलन और उपचार में तकनीकों का अधिक व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

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