छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर ने दो असिस्टेंट प्रोफेसरों के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। जांच समिति द्वारा आरोपों की पुष्टि के बाद यह निर्णय लिया गया। एक प्रोफेसर पर परीक्षा प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप था, जबकि दूसरी प्रोफेसर पर परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में गंभीर लापरवाही के आरोप लगे।
KANPUR/ कानपुर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में परीक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मामलों में दो असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्कूल ऑफ लाइफ साइंस एंड बायोटेक्नोलॉजी के डॉ. शाश्वत कटियार और बायोइनफॉर्मेटिक्स विभाग की डॉ. ममता सागर को जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद पद से हटाया गया है। रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा द्वारा जारी आदेश में दोनों शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की जानकारी दी गई। दोनों शिक्षक विश्वविद्यालय की सेल्फ फाइनेंस स्कीम के अंतर्गत कार्यरत थे।
प्रश्नपत्र वायरल करने का आरोप

एक मीडिया में छपी खबर के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार डॉ. शाश्वत कटियार पर एमएससी बायोकेमिस्ट्री द्वितीय सेमेस्टर के प्रश्नपत्र को परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप लगा था। जानकारी के मुताबिक 4 मई को आयोजित होने वाली ‘बायोएनर्जेटिक्स एंड इंटरमीडियरी मेटाबॉलिज्म’ परीक्षा का प्रश्नपत्र 2 मई को ही सीएसजेएमयू से जुड़े एक व्हाट्सएप ग्रुप में प्रसारित हो गया था। मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. कटियार को निलंबित कर जांच समिति गठित की थी। जांच समिति की रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कठोर कार्रवाई करते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बायोइनफॉर्मेटिक्स विभाग में कार्यरत डॉ. ममता सागर पर परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार वह 2 मई को निर्धारित परीक्षा में अनुपस्थित रहीं। इसके अतिरिक्त 9 मई को आयोजित होने वाली ‘एनवायरमेंटल नैनो टेक्नोलॉजी’ परीक्षा का प्रश्नपत्र समय पर परीक्षा समिति को उपलब्ध नहीं कराया गया। इन घटनाओं को लेकर गठित जांच समिति ने संबंधित दस्तावेजों और परिस्थितियों का परीक्षण किया। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने उनकी सेवाएं भी समाप्त करने का निर्णय लिया।
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जांच समिति की रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच कराई गई। आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। सीएसजेएमयू प्रशासन के अनुसार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले वायरल होने की घटना ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता पैदा की है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई संस्थान की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है।
छात्रों और शिक्षकों में चर्चा

दो शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की कार्रवाई विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बनी हुई है। छात्र संगठन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
सीएसजेएमयू द्वारा दो असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दे सकता है।



