- 2013 में बोड़ाकी में इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट हब की घोषणा हुई थी; 2020 में MMTH को मंजूरी, 2024 में स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट का दर्जा और मई 2025 में ESP स्वीकृत हुआ, फिर भी मुख्य निर्माण की तारीख तय नहीं
भारत 19
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लिए अपना आधुनिक रेलवे टर्मिनल पाने की करीब 13 साल पुरानी कवायद अब भी निर्माण शुरू होने का इंतजार कर रही है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बोड़ाकी में मौजूदा रेलवे हॉल्ट/स्टेशन है, लेकिन जिस परियोजना की घोषणा हुई थी, वह एक बड़े मल्टी मोडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) और क्षेत्रीय रेलवे टर्मिनल के विकास की है। इसका मकसद रेलवे, सड़क और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों को एक ही केंद्र से जोड़ना है।
2013 में हुई थी इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट हब की घोषणा
बोड़ाकी में इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट हब विकसित करने की घोषणा 5 अप्रैल 2013 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने की थी। योजना में क्षेत्रीय रेलवे टर्मिनल के साथ मेट्रो पैसेंजर टर्मिनल, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और प्रस्तावित रैपिड रेल टर्मिनल को एकीकृत करने की परिकल्पना की गई थी। यानी शुरुआत में ही इसे केवल रेलवे स्टेशन के तौर पर नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र के लिए एक बड़े परिवहन केंद्र के रूप में तैयार करने की योजना बनाई गई थी।
सरकार बदली, परियोजना की रफ्तार धीमी रही
2014 में केंद्र में सरकार बदलने के बाद भी बोड़ाकी परियोजना आगे बढ़ती रही, लेकिन इसकी टाइमलाइन बताती है कि जमीन पर काम शुरू होने में लंबा वक्त लगा। घोषणा के करीब साढ़े सात साल बाद 30 दिसंबर 2020 को केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने ग्रेटर नोएडा में Multi Modal Transport Hub (MMTH) और Multi Modal Logistics Hub (MMLH) परियोजनाओं को मंजूरी दी। सरकार के मुताबिक बोड़ाकी के मौजूदा रेलवे स्टेशन के पास MMTH विकसित किया जाना है। इसमें रेलवे, सड़क और MRTS कनेक्टिविटी के साथ ISBT, स्थानीय बस टर्मिनल और मेट्रो जैसी सुविधाओं को एकीकृत करने की योजना है।
2023 में तकनीकी तैयारी ने पकड़ी रफ्तार
परियोजना के अगले चरण में 26 दिसंबर 2023 को MMTH के लिए जनरल कंसल्टेंट की नियुक्ति हुई और अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद NCR, NMRC, UPSRTC और DFCCIL समेत संबंधित एजेंसियों के साथ परियोजना की तकनीकी तैयारी और समन्वय का काम आगे बढ़ा। सरकारी परियोजना दस्तावेजों के अनुसार साइट सर्वे और आकलन की प्रक्रिया भी पूरी की गई। परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय मंजूरी भी अप्रैल 2023 में मिल चुकी थी।
2024 में रेलवे की तकनीकी मंजूरी की तैयारी
2024 में बोड़ाकी स्टेशन के विकास के Engineering Scale Plan (ESP) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। सितंबर 2024 में ESP को उत्तर मध्य रेलवे के पास समीक्षा और सहमति के लिए भेजे जाने की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। इसी दौरान MMTH का DPR भी रेलवे की स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया गया। इसके बाद परियोजना ने रेलवे की औपचारिक प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया। दिसंबर 2024 में बोड़ाकी MMTH को स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया गया। इसके बाद रेलवे के स्तर पर स्टेशन विकास से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। यह दर्जा मिलने के बावजूद परियोजना का मुख्य निर्माण तत्काल शुरू नहीं हो सका।
मई 2025 में ESP मंजूर, निर्माण अब भी बाकी
बोड़ाकी रेलवे टर्मिनल परियोजना के लिए सबसे अहम तकनीकी प्रगति मई 2025 में हुई, जब उत्तर मध्य रेलवे ने स्टेशन विकास के Engineering Scale Plan को मंजूरी दी। केंद्रीय सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक ESP की मंजूरी के बाद मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने, लागत अनुमान तैयार करने और EPC ठेकेदार की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़नी है। 2013 में घोषणा से लेकर सितंबर 2026 तक परियोजना कई मंजूरियों और तकनीकी चरणों से गुजर चुकी है, लेकिन रेलवे टर्मिनल का मुख्य निर्माण कब शुरू होगा, इसकी तारीख अब भी तय नहीं है। ताजा केंद्रीय सरकारी रिकॉर्ड में मई 2025 की ESP मंजूरी के बाद अगला चरण मास्टर प्लान, लागत अनुमान और EPC ठेकेदार की नियुक्ति बताया गया है। इसका मतलब है कि परियोजना निर्माण की दिशा में आगे बढ़ी जरूर है, लेकिन अभी निर्माण शुरू होने की स्थिति में नहीं पहुंची है।
जमीन अधिग्रहण भी परियोजना का अहम हिस्सा
रेलवे से जुड़े हिस्से के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी परियोजना का महत्वपूर्ण चरण है। सरकारी रिकॉर्ड में संबंधित प्रक्रिया, अधिसूचनाओं और परियोजना के रेल यार्ड के लिए आवश्यक अतिरिक्त जमीन का उल्लेख किया गया है। बोड़ाकी में प्रस्तावित MMTH का क्षेत्र मौजूदा दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के आसपास स्थित है। परियोजना दस्तावेजों में इसे मौजूदा बोड़ाकी रेलवे हॉल्ट के नजदीक विकसित करने की योजना बताई गई है।
सिर्फ स्टेशन नहीं, पूरा परिवहन केंद्र होगा
बोड़ाकी परियोजना पूरी होने पर यहां केवल यात्रियों के लिए रेलवे टर्मिनल नहीं होगा। योजना में रेलवे, बस और MRTS कनेक्टिविटी को एकीकृत करने की परिकल्पना है। इससे ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों के यात्रियों को दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है। परियोजना का एक उद्देश्य बढ़ते यातायात के बीच क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारना और दिल्ली के प्रमुख परिवहन केंद्रों पर दबाव कम करना भी है।
घोषणा से मंजूरी तक 13 साल का सफर
बोड़ाकी परियोजना की टाइमलाइन अपने आप में इसकी गति की कहानी बताती है—2013 में इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट हब की घोषणा, 2020 में MMTH-MMLH को केंद्रीय मंजूरी, 2023 में जनरल कंसल्टेंट की नियुक्ति, 2024 में स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट का दर्जा और 2025 में ESP मंजूरी। अब परियोजना के सामने अगला सवाल यही है कि मास्टर प्लान और लागत निर्धारण कब पूरा होगा, EPC ठेका कब दिया जाएगा और 13 साल से प्रस्तावित बोड़ाकी रेलवे टर्मिनल का वास्तविक निर्माण आखिर कब शुरू होगा।


