- कानपुर मंडल की 27 विधानसभा और सात लोकसभा सीटों पर टटोलेंगे सियासी समीकरण, 19 भाजपा विधायकों के क्षेत्रों में लोकसभा चुनाव के घटे वोट भी निशाने पर
भारत 19
कानपुर। लोकसभा चुनाव में कमजोर पड़े विधानसभा क्षेत्रों, हारी हुई सीटों और बदलते जातीय समीकरणों के बीच भाजपा अब कानपुर मंडल में अपनी कमजोर कड़ियां तलाशेगी। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष शनिवार से कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। दो दिन के दौरे में वह कानपुर मंडल के छह जिलों की 27 विधानसभा और सात लोकसभा सीटों के राजनीतिक समीकरणों की पड़ताल करेंगे।
सांसद, राज्यसभा सदस्य, विधायक, विधान परिषद सदस्य और विधानसभा चुनाव में हारे प्रत्याशियों से सीधे फीडबैक लेकर पार्टी उन इलाकों की पहचान करेगी, जहां चुनावी जमीन खिसकी है या संगठन अपेक्षित मजबूती नहीं दिखा सका। खास नजर उन विधानसभा क्षेत्रों पर होगी, जहां भाजपा के विधायक होने के बावजूद लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों को कम वोट मिले। इन सीटों पर घटे समर्थन की वजहों के साथ स्थानीय राजनीतिक और जातीय समीकरण भी खंगाले जाएंगे। साथ ही पार्टी के भीतर जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही खींचतान को भी चुनावी तैयारियों की कमजोर कड़ी मानकर उस पर चर्चा संभव है।
सात लोकसभा सीटों में चार पर सपा का कब्जा
बीएल संतोष का उत्तर प्रदेश का चुनावी अभियान कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र से शुरू हो रहा है। 12 और 13 सितंबर को वह कानपुर मंडल के छह जिलों कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, कन्नौज और फर्रुखाबाद की सात लोकसभा क्षेत्र और 27 विधानसभा सीटें आती हैं। सात लोकसभा सीटों में भाजपा के पास तीन सीटें हैं, जबकि चार सीटें सपा के कब्जे में हैं। आने वाले चुनाव में यही चार लोकसभा क्षेत्र भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विधानसभा स्तर पर इन छह जिलों में भाजपा के 19 विधायक हैं। एक सीट सहयोगी दल अपना दल एस के पास है, जबकि सात विधानसभा सीटों पर भाजपा को हार मिली थी।
कानपुर की तीन हारी सीटें सबसे बड़ी चुनौती
मंडल की सात हारी हुई विधानसभा सीटों में तीन अकेले कानपुर नगर की हैं और तीनों पर सपा का कब्जा है। ऐसे में कानपुर की इन सीटों के राजनीतिक और जातीय समीकरण भाजपा की समीक्षा के केंद्र में रह सकते हैं। पार्टी यह भी देखेगी कि इन क्षेत्रों में संगठन की पकड़ कहां कमजोर हुई और बूथ स्तर पर किन कमियों को दूर करने की जरूरत है। लोकसभा चुनाव के आंकड़े भी इस समीक्षा का अहम आधार होंगे। खासतौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों पर चर्चा हो सकती है, जहां भाजपा का विधायक होने के बावजूद लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
55 नेताओं के साथ पहली बैठक में होगा मंथन
शुक्रवार शाम होटल लैंडमार्क में होने वाली बैठक में सिर्फ 55 लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी। इसमें सांसद, राज्यसभा सदस्य, विधायक, विधान परिषद सदस्य और विधानसभा चुनाव में हारे हुए प्रत्याशी मौजूद रहेंगे। पार्टी नेतृत्व इनसे क्षेत्रवार चुनावी स्थिति और संगठन की जमीनी पकड़ का फीडबैक लेगा। शनिवार को बीएल संतोष तीन बैठकें करेंगे। सुबह क्षेत्रीय पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और मंडल अध्यक्षों के साथ बैठक होगी। दूसरी बैठक सोशल मीडिया से जुड़े पदाधिकारियों की होगी। इसके बाद वह गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित बूथ सम्मेलन में पहुंचेंगे। एस्सेल पैलेस में होने वाले सम्मेलन में बूथ अध्यक्ष शामिल होंगे।
गोविंद नगर में घटे वोट ने बढ़ाई हलचल
गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र में बूथ सम्मेलन रखे जाने को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा है। यह भाजपा की जीती हुई सीट है, फिर भी बीएल संतोष का यहां बूथ सम्मेलन रखा गया है। इसकी अहम वजह लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के वोटों में आई कमी मानी जा रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में गोविंद नगर में भाजपा को मजबूत समर्थन मिला था, जबकि लोकसभा चुनाव में पार्टी के वोट कम हुए। ऐसे में बूथ सम्मेलन के जरिए इस बदलाव की वजह और संगठन की मौजूदा स्थिति को समझने की कोशिश भी हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों की खींचतान भी बनेगी समीक्षा का मुद्दा
दो दिन की बैठकों में भाजपा के जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही आपसी खींचतान पर भी चर्चा होने की संभावना है। पार्टी में सांसदों और विधायकों के बीच मतभेद तथा क्षेत्रीय स्तर पर चल रही खींचतान को चुनावी तैयारी के लिए कमजोर कड़ी माना जा रहा है। ऐसे में बीएल संतोष सांसदों और विधायकों को आपसी खींचतान से दूर रहने तथा संगठन के साथ मिलकर चुनावी तैयारी करने की नसीहत दे सकते हैं। इन बैठकों के जरिए पार्टी का मकसद सिर्फ चुनावी समीकरण समझना नहीं, बल्कि 27 विधानसभा सीटों में कमजोर कड़ियों की पहचान कर समय रहते उन्हें मजबूत करना भी माना जा रहा है।

