- बछरावां के चुरुआ से PDA रथ पर सवार हुए सपा प्रमुख, राहुल लोधी के घर पहुंचे, लोधी-पासी सामाजिक समीकरण के साथ संगठन सक्रिय करने पर जोर, राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र से शुरुआत ने सपा-कांग्रेस के संभावित सीट तालमेल को भी चर्चा में ला दिया
भारत 19
लखनऊ। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रायबरेली के बछरावां क्षेत्र के चुरुआ से अपने PDA रथ की शुरुआत की। लखनऊ से कार से पहुंचे अखिलेश चुरुआ से रथ पर सवार होकर हरचंदपुर के सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पहुंचे। सपा के मुताबिक, इस दौरे की तत्काल वजह हाल में छात्र सभा के नेताओं और पुलिस-प्रशासन के बीच हुआ विवाद है, लेकिन रायबरेली से PDA रथ को आगे बढ़ाने के कदम ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़ दिया है।
रायबरेली इसलिए भी अहम है क्योंकि यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है। ऐसे समय में जब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच संभावित सीट तालमेल को लेकर चर्चा चल रही है, अखिलेश का यहां से PDA रथ निकालना दोनों दलों के संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने स्पष्ट किया है कि 24 सितंबर का रायबरेली कार्यक्रम अलग है और PDA यात्रा की औपचारिक प्रदेशव्यापी शुरुआत बाद में होगी।
चुरुआ से राहुल लोधी के घर तक PDA रथ
अखिलेश यादव सुबह लखनऊ स्थित अपने आवास से कार से रायबरेली के लिए रवाना हुए। बछरावां क्षेत्र के चुरुआ पहुंचने के बाद उन्होंने कार छोड़कर PDA रथ की सवारी की और रायबरेली शहर में राहुल लोधी के आवास पहुंचे। निर्धारित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों से मुलाकात भी शामिल रही। राहुल लोधी के आवास तक पहुंचने के कार्यक्रम का सीधा संबंध पिछले दिनों हुए छात्र विवाद से भी है। फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा और एबीवीपी से जुड़े छात्रों के बीच विवाद के बाद सपा नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। राहुल लोधी ने भी पुलिस पर कार्रवाई के दौरान मारपीट और अभद्रता के आरोप लगाए थे, जबकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया था। अखिलेश ने इसके बाद रायबरेली जाकर लोधी से मिलने की घोषणा की थी।
लोधी-पासी समीकरण पर सपा की नजर
रायबरेली कार्यक्रम में सपा के स्थानीय सामाजिक आधार की तस्वीर भी दिखाई देती है। हरचंदपुर के विधायक राहुल लोधी लोधी समाज से आते हैं, जबकि बछरावां के विधायक श्याम सुंदर भारती पासी समुदाय से हैं। अखिलेश के कार्यक्रम में इन दोनों क्षेत्रों और नेताओं की मौजूदगी को सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण के संदर्भ में देखा जा रहा है। सपा पिछले कुछ समय से PDA के जरिए अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने पर जोर देती रही है। रायबरेली में रथ की शुरुआत और स्थानीय पिछड़े-दलित नेतृत्व को कार्यक्रम के केंद्र में रखना इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। रायबरेली की विधानसभा राजनीति भी इस चयन को संदर्भ देती है। जिले की पांच विधानसभा सीटों में बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी पर सपा के विधायक हैं, जबकि रायबरेली सदर और ऊंचाहार में भाजपा के विधायक हैं।
राहुल गांधी के क्षेत्र से सपा की सक्रियता
रायबरेली से PDA रथ निकालने का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कांग्रेस से जुड़ा है। लोकसभा में रायबरेली का प्रतिनिधित्व राहुल गांधी करते हैं। ऐसे में कांग्रेस के मजबूत राजनीतिक आधार वाले जिले से सपा का अपना अभियान शुरू करना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बना है। सपा और कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में साथ रही थीं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच संभावित सीट तालमेल की चर्चा के बीच रायबरेली में सपा की सक्रियता को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे सपा की विधानसभा स्तर की अपनी ताकत सामने रखने के संकेत के तौर पर देखा गया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इसे दलों के अपने-अपने संगठन को मजबूत करने की सामान्य प्रक्रिया बताया गया है। रायबरेली से रथ की शुरुआत को फिलहाल सीट बंटवारे पर किसी तय संदेश या दबाव के रूप में नहीं, बल्कि सपा के अपने संगठनात्मक अभियान के रूप में देखना अधिक तथ्यात्मक होगा। सीटों को लेकर अंतिम स्थिति दोनों दलों की बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगी।
छात्र विवाद बना दौरे का तत्काल कारण
17 सितंबर के विवाद के बाद सपा ने आरोप लगाया था कि उसके छात्र नेताओं और विधायकों के साथ पुलिस ने अनुचित व्यवहार किया। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया। इसी घटनाक्रम के बाद अखिलेश ने राहुल लोधी के घर जाकर उनसे मिलने की घोषणा की थी। यानी रायबरेली दौरे की तत्काल वजह पार्टी की ओर से स्थानीय विवाद को बताया गया, जबकि PDA रथ के इस्तेमाल ने इसे 2027 की व्यापक राजनीतिक तैयारियों से जोड़ दिया।
रथ पर सामाजिक न्याय की पूरी तस्वीर
अखिलेश यादव के लिए तैयार PDA रथ सामान्य चुनावी वाहन से अलग तरीके से डिजाइन किया गया है। रथ पर समाजवादी आंदोलन और सामाजिक न्याय से जुड़े नेताओं के चित्र तथा PDA से जुड़े संदेश लगाए गए हैं। इसका इस्तेमाल पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक संदेश को अलग-अलग क्षेत्रों तक ले जाने के लिए किया जाना है। रथ की डिजाइन में लाल रंग और समाजवादी पार्टी के प्रतीकों के साथ सामाजिक न्याय का संदेश प्रमुखता से रखा गया है। इस तरह पार्टी अपने संगठनात्मक अभियान और PDA सामाजिक समीकरण को एक ही दृश्य पहचान देने की कोशिश कर रही है।
औपचारिक प्रदेशव्यापी यात्रा बाद में
रायबरेली से रथ निकलने के बावजूद सपा ने 24 सितंबर के कार्यक्रम को औपचारिक प्रदेशव्यापी PDA यात्रा की शुरुआत नहीं बताया है। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी के अनुसार, इस दिन का कार्यक्रम छात्र सभा से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में है और PDA यात्रा की औपचारिक लॉन्चिंग बाद में होगी। इसका मतलब है कि रायबरेली का कार्यक्रम आने वाले अभियान की पहली सार्वजनिक झलक जरूर है, लेकिन पूरे प्रदेश में रथ के मार्ग, जिलों और कार्यक्रमों की तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है।
रायबरेली से तीन संदेश
अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे में तीन स्तर साफ दिखाई देते हैं। पहला, स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना। दूसरा, लोधी और पासी जैसे स्थानीय सामाजिक समूहों से जुड़े नेतृत्व के जरिए PDA के राजनीतिक संदेश को सामने रखना। तीसरा, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की गतिविधियों को जमीन पर तेज करना।
राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र से PDA रथ की शुरुआत ने इसके साथ सपा-कांग्रेस संबंधों का पहलू भी जोड़ दिया है। लेकिन अभी इसे सीट बंटवारे पर सपा के किसी औपचारिक दावे के रूप में नहीं देखा जा सकता। आगे PDA रथ किन जिलों में जाता है और सपा किन सामाजिक समूहों को अभियान के केंद्र में रखती है, इससे 2027 के लिए पार्टी की रणनीति की तस्वीर और स्पष्ट होगी।


