- अजय राय बोले- अखिलेश रायबरेली-अमेठी जा सकते हैं तो कांग्रेस भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकती है; 2027 चुनाव से पहले दोनों दलों की अलग-अलग राजनीतिक सक्रियता ने गठबंधन की तस्वीर पर चर्चा बढ़ाई
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के साथ दोनों दलों के बीच तालमेल को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। इसकी ताजा वजह अखिलेश यादव की रायबरेली से शुरू हुई पीडीए रथयात्रा और उस पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की प्रतिक्रिया है। हालांकि, दोनों दलों के बीच गठबंधन टूटने या अलग चुनाव लड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। अजय राय ने कहा कि चुनाव का समय है और कोई भी नेता कहीं भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं तो कांग्रेस के नेता कन्नौज, इटावा और सैफई भी जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि देश राहुल गांधी की ओर देख रहा है।
रायबरेली से अखिलेश ने शुरू की पीडीए यात्रा
अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से अपनी पीडीए रथयात्रा शुरू की। रायबरेली को चुनना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है और लंबे समय से कांग्रेस के राजनीतिक प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। यात्रा को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सपा की ओर से यात्रा का उद्देश्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों तक पहुंच बढ़ाना और पार्टी के जनसंपर्क अभियान को विस्तार देना बताया जा रहा है। अखिलेश ने रायबरेली में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में मुकाबला भाजपा और पीडीए के बीच होगा।
अजय राय ने इटावा-सैफई का नाम क्यों लिया
अजय राय का बयान सीधे तौर पर किसी गठबंधन-विच्छेद की घोषणा नहीं है। उनका कहना था कि जब चुनाव का समय है तो किसी नेता के किसी क्षेत्र में जाने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस के नेताओं के कन्नौज, इटावा और सैफई जाने की बात कही। लेकिन राजनीतिक संदर्भ में यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कन्नौज, इटावा और सैफई को समाजवादी पार्टी के मजबूत राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों के रूप में देखा जाता है। ऐसे में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की ओर से इन क्षेत्रों का नाम लेना दोनों दलों के बीच राजनीतिक क्षेत्र और संगठनात्मक सक्रियता को लेकर संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी का भी किया जिक्र
अजय राय ने अपनी प्रतिक्रिया को केवल अखिलेश यादव की यात्रा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आम लोगों के मुद्दे उठा रहे हैं और चुनाव आयोग से जुड़े सवाल भी लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय रहने की बात भी कही। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 2027 की तैयारी के दौरान अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक सक्रियता को बनाए रखने पर जोर दे रही है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन की असली परीक्षा सीटों पर
दोनों दलों के बीच मौजूदा राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए सीट बंटवारा और चुनावी रणनीति सबसे अहम मुद्दे होंगे। अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों दलों के 2027 विधानसभा चुनाव में साथ रहने की संभावनाओं पर चर्चा है, लेकिन सीटों का अंतिम बंटवारा सार्वजनिक नहीं हुआ है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। इसलिए 2027 के लिए दोनों दलों की अलग-अलग यात्राओं और क्षेत्रीय गतिविधियों को उसी व्यापक गठबंधन संदर्भ में देखना होगा।
भाजपा ने सपा-कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा की ओर से भी अखिलेश की रायबरेली यात्रा पर प्रतिक्रिया आई है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि रायबरेली से यात्रा शुरू करने का उद्देश्य कांग्रेस के साथ राजनीतिक प्रभाव का संदेश देना था। उन्होंने कांग्रेस से कन्नौज या मैनपुरी जैसे सपा प्रभाव वाले क्षेत्रों से अभियान शुरू करने को कहा। यह भाजपा नेता का राजनीतिक आकलन है, जिसे तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनके बयान के रूप में देखना चाहिए।
अभी रार या रणनीतिक दबाव, तस्वीर बाकी
फिलहाल उपलब्ध बयानों से इतना जरूर दिखता है कि सपा और कांग्रेस दोनों उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं, जबकि 2027 चुनाव की रणनीति अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। अखिलेश का रायबरेली से अभियान शुरू करना और अजय राय का इटावा-सैफई जाने की बात कहना इसी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।


