समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। सपा नेताओं ने यूपी पुलिस से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जबकि भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
LUCKNOW/ उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है। सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव के संबंध में सोशल मीडिया पर कथित रूप से की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सपा नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां न केवल व्यक्तिगत मर्यादा के खिलाफ हैं, बल्कि राजनीतिक संवाद के स्तर को भी प्रभावित करती हैं। पार्टी नेताओं ने इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
किसने उठाया मामला?

सपा प्रवक्ता मनोज काका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय को टैग करते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी नेता या नागरिक की बेटी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। मनोज काका ने अपने पोस्ट में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस प्रकार की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।
इस विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी बेटी अदिति यादव को लेकर पिछले दो दिनों से गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी नेता के परिवार, विशेषकर बेटियों, को राजनीति का विषय बनाना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जिन लोगों के अपने परिवार नहीं हैं, उन्हें दूसरों की बेटियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार मिल जाता है? सपा प्रमुख ने इस तरह की राजनीति की आलोचना करते हुए इसे सामाजिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
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फखरुल हसन चांद ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक मुद्दों पर घिरने के बाद कुछ लोग व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर टिप्पणी करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया पर इस प्रकार की टिप्पणियां जारी रहती हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(3) के तहत भी शिकायत दर्ज कराई जाएगी। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सपा सांसद राजीव राय ने भी जताई नाराजगी

सपा सांसद राजीव राय ने भी सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित आपत्तिजनक पोस्टों की निंदा करते हुए कहा कि किसी राजनीतिक नेता के परिवार को निशाना बनाना लोकतांत्रिक राजनीति का स्वस्थ तरीका नहीं है। राजीव राय ने कानून-व्यवस्था एजेंसियों से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की।
भाजपा की क्या है प्रतिक्रिया?
समाचार लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। हालांकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में भाजपा से जुड़े कुछ सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी इस प्रकार की व्यक्तिगत या आपत्तिजनक टिप्पणियों का समर्थन नहीं करती। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक मर्यादा पर फिर उठे सवाल

यह विवाद एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक विमर्श की गुणवत्ता और मर्यादा को लेकर बहस छेड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और परिवार के सदस्यों को निशाना बनाना सामाजिक और राजनीतिक संवाद को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मामलों में साइबर कानूनों और आईटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की संभावनाएं भी बनती हैं, यदि संबंधित सामग्री कानून का उल्लंघन करती पाई जाती है। अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर हुई कथित टिप्पणियों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। सपा नेताओं ने कार्रवाई की मांग की है, जबकि भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में क्या कदम उठाती हैं और क्या किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।



