- बैराज पर सुबह 8 बजे जलस्तर 113.570 मीटर पहुंचा, चेतावनी स्तर से महज 43 सेंटीमीटर नीचे; शुक्लागंज में भी बढ़ रहा पानी, गंगा किनारे झोपड़ियों में रहने वालों को पुलिस की चेतावनी
भारत 19
कानपुर। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से कानपुर में नदी के किनारे बसे इलाकों और कटरी गांवों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। 19 अगस्त की सुबह 8 बजे कानपुर बैराज के अपस्ट्रीम में गंगा का जलस्तर 113.570 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 114 मीटर से महज 43 सेंटीमीटर नीचे है। बैराज से इस समय 2,91,413 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ गंगा के डूब क्षेत्र में आने वाली बस्तियों और कटरी के गांवों में पानी पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
चेतावनी स्तर के करीब पहुंचा जलस्तर
फ्लड कंट्रोल कार्यालय के सुबह 8 बजे के आंकड़ों के मुताबिक कानपुर बैराज पर अपस्ट्रीम जलस्तर 113.570 मीटर और डाउनस्ट्रीम 113.420 मीटर रहा। यहां चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर निर्धारित है। खतरे के स्तर पर बैराज से डिस्चार्ज 5,44,373 क्यूसेक तक पहुंचने का उल्लेख है। इस लिहाज से फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी ने निचले इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.180 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। यानी शुक्लागंज में भी पानी चेतावनी स्तर से करीब 82 सेंटीमीटर नीचे है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर नदी के दोनों किनारों के निचले और डूब क्षेत्र वाले इलाकों पर पड़ने की आशंका है।
हरिद्वार और नरौरा बैराज से भी छोड़ा जा रहा पानी
गंगा के ऊपरी हिस्से के बैराजों से छोड़े जा रहे पानी पर भी कानपुर में निगाह रखी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हरिद्वार बैराज से 1,18,622 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,15,137 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इन बैराजों से आने वाले पानी का असर आगे चलकर गंगा के जलस्तर पर पड़ सकता है। इसलिए स्थानीय प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण तंत्र के लिए अगले कुछ घंटे महत्वपूर्ण हैं।
कटरी के गांवों में बढ़ने लगा पानी
गंगा के बाएं किनारे की कटरी में पानी बढ़ने लगा है। कटरी पीपरखेड़ा तक डूब क्षेत्र में बसे गांवों और रिहाइशी इलाकों पर खतरा बढ़ गया है। वहीं शुक्लागंज से लेकर गंगा किनारे के दूसरे निचले इलाकों में भी पानी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विशेष चिंता उन बस्तियों को लेकर है जो गंगा के फ्लड एरिया अथवा डूब क्षेत्र में बसी हैं। इनमें कई जगह अस्थायी झोपड़ियां और रिहाइश बनी हुई है।
पुलिस कमिश्नर ने घाटों और प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा
फिलहाल कानपुर बैराज पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन चेतावनी स्तर के करीब पहुंच चुके पानी को देखते हुए डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। बढ़ते जलस्तर के बीच कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने पुलिस अधिकारियों और जल पुलिस के दस्ते के साथ गंगा किनारे के घाटों और संभावित प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने जलस्तर की स्थिति और उससे पैदा होने वाली संभावित मुश्किलों का जायजा लिया। पुलिस ने गंगा किनारे झोपड़ियां डालकर रह रहे लोगों को बढ़ते पानी के खतरे को लेकर आगाह किया और सतर्क रहने को कहा। प्रशासन और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदी किनारे अनधिकृत या अस्थायी बस्तियों में रह रहे लोगों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाने की है। जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में ऐसे इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना प्राथमिकता बन सकता है।

