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मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी

  • सौरभ राजपूत की हत्या में अदालत का बड़ा फैसला, 30 सितंबर को दोनों को ठहराया था दोषी, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद सुनाई गई मौत की सजा

भारत 19/ मेरठ। मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। दोनों को मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में 30 सितंबर को दोषी करार दिया गया था। 14 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई के बाद जिला जज की अदालत ने दोनों के लिए मृत्युदंड का फैसला सुनाया। इस मामले ने हत्या के तरीके और शव को छिपाने के प्रयास के कारण देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। सौरभ के परिवार ने शुरू से ही दोनों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी।

मार्च 2025 में हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या

मामला मार्च 2025 का है। सौरभ राजपूत पूर्व में मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे और बाद में लंदन में नौकरी कर रहे थे। वह परिवार के साथ जन्मदिन मनाने के लिए भारत लौटे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 को मुस्कान ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर सौरभ को बेहोश किया। इसके बाद साहिल को बुलाया गया और दोनों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें घर में रखे नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से छिपा दिया गया। शव को इस तरह छिपाने के कारण ही यह मामला ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ।

गुमशुदगी की जांच से खुला नीला ड्रम हत्याकांड

सौरभ के भाई ने 18 मार्च 2025 को उनके लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी। शिकायत में मुस्कान और साहिल पर संदेह जताया गया। पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर घर से नीले ड्रम में छिपाया गया शव बरामद हुआ। इसके बाद दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने से जुड़े आरोपों में कार्रवाई की गई।

126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद फैसला

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए और कुल 126 सुनवाइयों के बाद अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था। दोषसिद्धि के बाद सजा पर बहस के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी। बुधवार को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।

सौरभ के परिवार ने की थी कड़ी सजा की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान सौरभ के परिवार ने दोनों आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने दोनों से उनकी बात पूछी। मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का जिक्र किया। अदालत की कार्यवाही और दोषियों की प्रतिक्रिया से जुड़े विवरणों को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में जो जानकारी सामने आई, उसी के आधार पर मामले की सुनवाई चर्चा में रही।

मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे क्या

अदालत से मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती। भारतीय कानून के तहत मौत की सजा पर हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है। दोषियों को कानून के अनुसार अपील करने का अधिकार भी रहता है। इसलिए अदालत का फैसला अहम पड़ाव जरूर है, लेकिन सजा के अंतिम क्रियान्वयन से पहले आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में आया यह फैसला सौरभ राजपूत के परिवार की लंबी कानूनी लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब मामले में हाईकोर्ट की पुष्टि और आगे की अपीलीय प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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