- PwBD प्रमाणपत्र सत्यापन में फोटो और चेहरे में अंतर मिलने पर एक व्यक्ति पकड़ा गया; दूसरे अभ्यर्थी की जगह पहुंचा व्यक्ति दस्तावेज मांगने पर चला गया, पुलिस को दी गई सूचना
भारत 19/ इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में NEET UG-2026 के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों के PwBD प्रमाणपत्रों के मूल्यांकन के दौरान पहचान से जुड़े दो संदिग्ध मामले सामने आए हैं। एक मामले में दस्तावेजों पर दर्ज अभ्यर्थी के फोटो और मूल्यांकन के लिए पहुंचे व्यक्ति के चेहरे में अंतर मिला। दूसरे मामले में एक व्यक्ति किसी अन्य अभ्यर्थी के स्थान पर मूल्यांकन कराने पहुंचा, लेकिन पहचान संबंधी दस्तावेज मांगने पर वह परिसर से चला गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों प्रकरणों की जानकारी पुलिस को दे दी है।
फोटो और दस्तावेजों में अंतर से हुआ संदेह
विश्वविद्यालय में PwBD प्रमाणपत्रों के मूल्यांकन के दौरान रितिक राज पुत्र प्रमोद कुमार, निवासी गांव छाती, ब्लॉक धनारौ, पटना, बिहार के नाम से दस्तावेजों की छायाप्रतियां और शपथपत्र लेकर एक व्यक्ति पहुंचा था। अभिलेखों में दर्ज फोटो और मौके पर मौजूद व्यक्ति के चेहरे में अंतर मिलने पर उसकी पहचान को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोककर पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपना नाम श्याम सुंदर यादव पुत्र योगेंद्र प्रसाद यादव, निवासी गांव इनरवा, पोस्ट जागेस्तर, जिला मधुबनी, बिहार बताया। पहचान में अंतर सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया।
दूसरे अभ्यर्थी की जगह पहुंचा व्यक्ति, दस्तावेज मांगने पर गया
मूल्यांकन के दौरान दूसरा संदिग्ध मामला भी सामने आया। इसमें एक व्यक्ति किसी अन्य अभ्यर्थी के स्थान पर मूल्यांकन कराने पहुंचा था। वरिष्ठ अधिकारियों को संदेह होने पर उससे पूछताछ की गई, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद अधिकारियों ने उससे पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। संबंधित व्यक्ति ने विश्वविद्यालय के बाहर से दस्तावेज लाकर दिखाने की बात कही और वहां से चला गया। वह वापस नहीं लौटा। दोनों घटनाओं में एक व्यक्ति को पकड़कर पूछताछ की गई, जबकि दूसरा व्यक्ति परिसर से चला गया।
सैफई पुलिस को दी गई सूचना, जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, दोनों प्रकरणों की जानकारी सैफई थाने की पुलिस को दे दी गई है। आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। प्रशासन ने मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया है। NEET UG-2026 की प्रवेश प्रक्रिया के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों के PwBD प्रमाणपत्रों का सत्यापन महत्वपूर्ण चरण है। ऐसे में पहचान और दस्तावेजों के मिलान में सामने आई विसंगतियों की जांच अहम है। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित अनियमितताओं की प्रकृति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


