- धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने के बाद मुख्यमंत्री की सक्रियता बढ़ी, कौशल किशोर के परिवार, रीता बहुगुणा जोशी और गंगाचरण राजपूत से मुलाकात; चुनाव से पहले संवाद और समन्वय पर जोर
भारत 19/ लखनऊ। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़कर सपा में जाने के बाद पार्टी में शुरू हुई भगदड़ जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2027 के चुनाव से पहले ही मोर्चा संभाल लिया है। पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने के बाद भाजपा के भीतर नाराजगी और असंतोष को लेकर बढ़ी चर्चाओं के बीच योगी ने खुद असंतुष्ट नेताओं और उनके परिवारों से संवाद की पहल की है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की शिकायतें सुनने और उन्हें भाजपा के साथ बनाए रखने की इस कोशिश को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक असंतोष थामने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। धर्मेंद्र के इस्तीफे से भाजपा के भीतर नेताओं की नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं को नया संदर्भ मिला है। ऐसे में मुख्यमंत्री की हालिया मुलाकातें अहम हो गई हैं।
कौशल किशोर के परिवार से मुलाकात अहम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व सांसद कौशल किशोर के परिवार से मुलाकात की। इस दौरान मलिहाबाद से भाजपा विधायक जय देवी और उनके बेटे विकास किशोर भी मौजूद थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत में परिवार की राजनीतिक अपेक्षाओं और विकास किशोर के भविष्य को लेकर चर्चा हुई। कौशल किशोर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की उनसे जुड़े परिवार के सदस्यों के साथ मुलाकात को संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए नेताओं और उनके परिवारों की राजनीतिक अपेक्षाओं पर चर्चा भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी संभावित टिकट या चुनावी भूमिका पर सहमति बनने की पुष्टि नहीं हुई है।
रीता बहुगुणा जोशी से संवाद पर नजर
भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी के साथ मुख्यमंत्री की मुलाकात भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले रीता बहुगुणा जोशी ने अपने बेटे के लिए टिकट की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की थी। इसके बाद उनके बेटे ने समाजवादी पार्टी का रुख किया था। इस पृष्ठभूमि में योगी आदित्यनाथ और रीता बहुगुणा जोशी की मुलाकात को पुराने मुद्दों पर संवाद और आगामी चुनाव से पहले बेहतर तालमेल बनाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मुलाकात के बाद उनकी या उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
गंगाचरण राजपूत से मुलाकात के भी मायने
मुख्यमंत्री की गंगाचरण राजपूत से मुलाकात भी चर्चा में है। गंगाचरण राजपूत के बेटे बृजभूषण राजपूत महोबा जिले की चरखारी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। वह कुछ मुद्दों पर अपनी ही सरकार और पार्टी के नेताओं के सामने सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं। बुंदेलखंड की राजनीति में इस परिवार की भूमिका को देखते हुए मुलाकात को संगठनात्मक संवाद के लिहाज से अहम माना जा रहा है। आगामी चुनाव में क्षेत्रीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल बनाए रखना भाजपा की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने से चर्चा तेज
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में जाने और अपनी बेटी कीर्ति कश्यप के साथ अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में इस घटनाक्रम पर चर्चा तेज हुई है। मीडिया रिपोर्टों में इस कदम को उनकी बेटी की राजनीतिक दावेदारी से भी जोड़कर देखा गया है। हालांकि, स्पष्ट बयान या आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे उनके दल बदलने का अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। इस घटनाक्रम ने चुनाव से पहले नेताओं की राजनीतिक अपेक्षाओं, परिवार के सदस्यों की दावेदारी और संगठन में उनकी भूमिका जैसे विषयों को फिर चर्चा में ला दिया है। भाजपा के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं से संवाद बनाए रखना और स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक तालमेल मजबूत करना चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
2027 की तैयारी में संवाद और समन्वय पर जोर
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार के कामकाज, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति पर ध्यान दे रही है। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाओं को समझना भी पार्टी की तैयारियों का हिस्सा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया मुलाकातों को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि इन बैठकों के बाद संगठनात्मक समन्वय को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है और चुनाव के करीब आने पर पार्टी उम्मीदवारों के चयन तथा क्षेत्रीय समीकरणों को लेकर क्या रणनीति अपनाती है। फिलहाल, मुख्यमंत्री की सक्रियता को भाजपा के मिशन 2027 की तैयारियों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।


