- CJP के प्रदर्शन से पहले और दौरान हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने उठाए सवाल, भारत ने बताया आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप; मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बहाल, 30 प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन
भारत 19/ नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में हुए प्रदर्शन और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई है। भारत ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीथान ने 10 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और प्रदर्शन करने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए। कार्यालय ने अधिकारियों से कानून लागू करने के दौरान अधिकतम संयम बरतने, हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की समीक्षा करने और प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक संवाद करने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर प्रतिबंध आवश्यकता और आनुपातिकता की कसौटी पर खरे उतरने चाहिए। उसने मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग भी की।
भारत ने UN की टिप्पणी को बताया अनुचित हस्तक्षेप
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है, लेकिन इसका इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू उचित प्रतिबंधों के अधीन होता है। भारत की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया कि देश में मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया मौजूद हैं। अधिकारियों की कार्रवाई कानून के अनुरूप होती है और किसी भी शिकायत के निवारण के लिए अदालतों का रास्ता खुला है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय से यह भी कहा कि उसे दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले बड़े प्रदर्शनों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। भारत के मुताबिक, कार्यालय की टिप्पणी उसके निष्पक्षता और गैर-चयनात्मकता के दायित्वों के अनुरूप नहीं है।
CJP के प्रदर्शन के दौरान 2000 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए
दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए व्यापक बंदोबस्त किए और 2000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के मध्य हिस्सों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए। कुछ मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए गए और रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा। पुलिस के अनुसार, पहले दिन हिरासत में लिए गए अधिकांश लोगों को शनिवार देर रात तक रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों तथा प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए।
दिल्ली मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य, 30 मार्गों पर डायवर्जन
प्रदर्शन के मद्देनजर बंद किए गए दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों को फिर खोल दिया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने प्रभावित स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बहाल करने की जानकारी दी। उत्तर रेलवे ने भी रविवार, 11 अक्टूबर से सामान्य ट्रेन सेवाएं बहाल करने की घोषणा की है। इससे यात्रियों को राहत मिली है। हालांकि, कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार सुबह छह बजे से 30 प्रमुख यातायात बिंदुओं और उनसे जुड़े मार्गों पर डायवर्जन की एडवाइजरी जारी की है। इनमें कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, मंडी हाउस, धौला कुआं और नई दिल्ली के आसपास के प्रमुख मार्ग शामिल हैं। यातायात में बदलाव मौके की स्थिति के अनुसार किया जा सकता है। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने और रेलवे स्टेशन, बस अड्डे या हवाई अड्डे जाने के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी है। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताजा एडवाइजरी देखने को कहा गया है।


