- तिरुपति लड्डू विवाद के बाद प्रसाद की शुद्धता पर बढ़ी सतर्कता, FSSAI के मूल्यांकन में राम मंदिर को 114 में से मिले 103 अंक; ‘अति विशिष्ट’ श्रेणी में शामिल
भारत 19/ अयोध्या। रामलला को अर्पित किए जाने वाले भोग-प्रसाद की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की मान्यता मिली है। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप-भोग’ प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े निर्धारित मानकों के मूल्यांकन में मंदिर को 114 में से 103 अंक मिले हैं। इस स्कोर के आधार पर मंदिर को ‘अति विशिष्ट’ श्रेणी में रखा गया है।
10 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचे FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुन्हानी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों को प्रमाणपत्र सौंपा। इस प्रक्रिया में मंदिर की रसोई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, पानी, बर्तनों की सफाई, भंडारण और प्रसाद तैयार करने की व्यवस्था से जुड़े मानकों का आकलन किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर की रसोई से लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच में खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों के अनुरूप परिणाम मिले।
47 मानकों पर हुआ मूल्यांकन, दो साल तक वैध रहेगा प्रमाणपत्र
राम मंदिर को प्रमाणपत्र देने से पहले खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े 47 मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। कुल 114 अंकों में से 103 अंक मिलने पर मंदिर को ‘अति विशिष्ट’ श्रेणी में स्थान मिला। प्रमाणन प्रक्रिया में रसोई और भंडार गृह की स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित रखरखाव, पानी की गुणवत्ता, प्रसाद बनाने की प्रक्रिया और खाद्य पदार्थों को संभालने वाले कर्मचारियों की साफ-सफाई जैसे पहलुओं को शामिल किया गया। FSSAI की ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप’ पहल का उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर प्रसाद और श्रद्धालुओं को वितरित किए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके तहत निरीक्षण, खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और निर्धारित मानकों के पालन का आकलन किया जाता है। प्रमाणपत्र की वैधता दो वर्ष की बताई गई है।
तिरुपति विवाद के बाद प्रसाद की गुणवत्ता पर बढ़ी सतर्कता
सितंबर 2024 में तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू में इस्तेमाल घी की गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आया था। घी में मिलावट के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए स्वतंत्र विशेष जांच दल गठित करने का आदेश दिया था। इस प्रकरण के बाद देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ी। कुछ स्थानों पर प्रसाद के नमूनों की जांच भी कराई गई। इसी पृष्ठभूमि में राम मंदिर को मिला FSSAI प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण है। यह मंदिर में प्रसाद तैयार करने और वितरित करने की व्यवस्था का निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के आधार पर हुए मूल्यांकन को दर्शाता है।
राम मंदिर की रसोई में तैयार होता है रामलला का भोग
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में स्थित रसोई में रामलला के लिए प्रतिदिन भोग तैयार किया जाता है। इसके लिए खाद्य सामग्री के रखरखाव, प्रसाद तैयार करने और वितरण की अलग-अलग व्यवस्थाएं निर्धारित हैं। भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद ट्रस्ट के कर्मचारियों, पुजारियों और श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। विशेष अवसरों पर रामलला को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। राम मंदिर को मिला यह प्रमाणपत्र प्रसाद की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किए गए प्रयासों को मान्यता देता है। अयोध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रसाद तैयार करने से लेकर उसके वितरण तक स्वच्छता और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन महत्वपूर्ण है।


