- मस्क ने अंबानी को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर कसा तंज, ज्योतिरादित्य सिंधिया बोले- भारत में एकाधिकार की अनुमति नहीं, स्टारलिंक को सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी होगी
भारत 19 डेस्क । भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत में देरी को लेकर एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच जुबानी टकराव तेज हो गया है। स्पेसएक्स के प्रमुख मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अंबानी को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ संबोधित करते हुए उन पर एकाधिकार बनाए रखने का आरोप लगाया। मस्क का दावा है कि स्टारलिंक भारत के उन इलाकों में इंटरनेट पहुंचा सकती है, जहां कनेक्टिविटी सीमित है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने बाजार में किसी कारोबारी समूह को विशेष लाभ देने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी सैटेलाइट संचार कंपनियों को निर्धारित सुरक्षा और नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी।
मस्क ने अंबानी को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर साधा निशाना
9 अक्टूबर को एक्स पर की गई पोस्ट में मस्क ने व्यंग्यात्मक अंदाज में अंबानी को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने से रोकना चाहते हैं। मस्क ने यह भी कहा कि स्टारलिंक की सेवा से दूरदराज के इलाकों में बच्चों की शिक्षा, छोटे कारोबार और आपातकालीन संचार को मदद मिल सकती है। इससे पहले मस्क ने भारत में स्टारलिंक की शुरुआत में देरी को लेकर कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूहों पर सवाल उठाए थे। हालांकि, अंबानी द्वारा नियामकीय प्रक्रिया को प्रभावित करने के उनके आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
सिंधिया बोले- भारत में एकाधिकार की अनुमति नहीं
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 9 अक्टूबर को कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को प्राधिकरण दिया गया है और सभी को निर्धारित शर्तों के तहत ही परिचालन शुरू करने की अनुमति मिलेगी। संचार मंत्रालय के अनुसार, स्टारलिंक सहित संबंधित कंपनियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं पूरी करनी होंगी। गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही व्यावसायिक सेवाएं शुरू की जा सकेंगी। सरकार ने अपने नियामकीय ढांचे को निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण बताया है।
स्टारलिंक को लाइसेंस, व्यावसायिक सेवा की मंजूरी बाकी
स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट संचार सेवा के लिए जरूरी शुरुआती प्राधिकरण मिल चुके हैं, लेकिन व्यावसायिक परिचालन शुरू करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सुरक्षा संबंधी शर्तों का अनुपालन और स्पेक्ट्रम आवंटन इसके अहम चरण हैं। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए स्टारलिंक के अलावा रिलायंस जियो की सैटेलाइट इकाई और भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब को भी प्राधिकरण मिला है। सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इसलिए लाइसेंस मिलना अपने आप में व्यावसायिक सेवा शुरू करने की अंतिम अनुमति नहीं है।
सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा
सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक उन दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का विकल्प है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर आधारित इंटरनेट पहुंचाना मुश्किल होता है। इस क्षेत्र में स्टारलिंक के अलावा जियो और यूटेलसैट वनवेब भी सेवाएं देने की तैयारी कर रहे हैं। रिलायंस जियो और भारती समूह की मौजूदा दूरसंचार बाजार में मजबूत उपस्थिति है, जबकि स्टारलिंक उपग्रहों के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ सुरक्षा अनुपालन, स्पेक्ट्रम की उपलब्धता और व्यावसायिक शर्तें भी इस बाजार के विकास को प्रभावित करेंगी।
नियामकीय मंजूरी पर टिकी स्टारलिंक की शुरुआत
मस्क के आरोपों और सरकार के जवाब के बीच स्टारलिंक की भारत में व्यावसायिक शुरुआत की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। सरकार ने सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन को अनिवार्य प्रक्रिया बताया है, जबकि मस्क ने देरी को लेकर कारोबारी प्रतिस्पर्धा का मुद्दा उठाया है। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि मुकेश अंबानी ने व्यक्तिगत रूप से स्टारलिंक की मंजूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। आगे की स्थिति सुरक्षा संबंधी औपचारिकताओं, स्पेक्ट्रम आवंटन और कंपनी की नियामकीय शर्तें पूरी होने पर निर्भर करेगी।


