कानपुर देहात के स्कूल में नो बैग डे पर बना मिनी बैंक; नुक्कड़ नाटक और डिजिटल माध्यम से बच्चों ने सीखी बचत, बैंकिंग और वित्तीय जिम्मेदारी
भारत 19/ कानपुर देहात। गुल्लक में पैसे जमा करने से लेकर बैंक में लेनदेन तक—कानपुर देहात के बच्चों ने शनिवार को बैंकिंग की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा। संविलियन विद्यालय डेराकरीमनगर, राजपुर में विशेष नो बैग डे पर बच्चों के लिए मिनी बैंक गतिविधि आयोजित की गई। इसमें बच्चे कभी बैंककर्मी तो कभी ग्राहक की भूमिका में नजर आए। किसी ने पैसे जमा करने और निकालने की प्रक्रिया समझी तो किसी ने लेनदेन का जिम्मा संभाला। नुक्कड़ नाटक और डिजिटल माध्यम से हुई इस गतिविधि ने बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर बचत, पैसे के सही इस्तेमाल और वित्तीय जिम्मेदारी का व्यावहारिक पाठ पढ़ाया।
मिनी बैंक में बच्चों ने सीखी बैंकिंग की प्रक्रिया
कानपुर देहात स्कूल में मिनी बैंक गतिविधि के दौरान बच्चों को बैंक में होने वाले विभिन्न कामों की जानकारी दी गई। बच्चों ने बैंककर्मी और ग्राहक की भूमिका निभाकर पैसे जमा करने, निकालने और लेनदेन से जुड़ी प्रक्रिया को समझा। बैंकिंग व्यवस्था को बच्चों के लिए आसान और रोचक बनाने के लिए नुक्कड़ नाटक का सहारा लिया गया। अभिनय के जरिए बैंक में होने वाली गतिविधियों को प्रस्तुत किया गया, जिससे बच्चों को उन प्रक्रियाओं को समझने का मौका मिला, जिन्हें वे आमतौर पर बड़ों के माध्यम से देखते हैं।
सिर्फ पैसे गिनना नहीं, सही इस्तेमाल भी सीखा
मिनी बैंक गतिविधि का मकसद बच्चों को सिर्फ बैंकिंग प्रक्रिया से परिचित कराना नहीं था। इसके जरिए उनमें वित्तीय साक्षरता और पैसे के जिम्मेदार इस्तेमाल की समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।
स्मार्ट टीवी के माध्यम से वित्तीय साक्षरता पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम दिखाया गया। इसमें बच्चों को बचत के महत्व, जरूरत और इच्छा के बीच अंतर, धन के सही इस्तेमाल और जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार के बारे में समझाया गया। गतिविधि के दौरान बच्चों को यह समझने का अवसर मिला कि पैसा केवल खर्च करने की चीज नहीं है, बल्कि उसका सही प्रबंधन भी जरूरी है।
नो बैग डे पर किताबों से अलग मिली सीख
शनिवार को आयोजित नो बैग डे में बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से अलग सीखने का अवसर मिला। बस्ते और किताबों से मुक्त दिन में बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता जैसी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जानकारी को खेल, अभिनय और डिजिटल माध्यम से समझाया गया। इस गतिविधि में बच्चों ने सिर्फ जानकारी सुनी नहीं, बल्कि अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर बैंकिंग व्यवस्था को समझने की कोशिश की। इससे सीखने की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और रुचिकर बनी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी सीखने की प्रक्रिया को गतिविधियों और अनुभवों से जोड़ने पर जोर दिया गया है। विद्यालय की यह पहल इसी तरह के अनुभव आधारित शिक्षण की दिशा में प्रयास रही।
बचत की आदत से आर्थिक समझ विकसित करने की पहल
बच्चों में बचपन से ही बचत और आर्थिक जिम्मेदारी की समझ विकसित करना गतिविधि का अहम हिस्सा रहा। बच्चों को यह समझाने की कोशिश की गई कि जरूरत और इच्छा अलग-अलग होती हैं और उपलब्ध धन का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। मिनी बैंक गतिविधि में वित्तीय साक्षरता को बच्चों के रोजमर्रा के अनुभवों से जोड़ने का प्रयास किया गया। इससे उन्हें पैसे के मूल्य और उसके इस्तेमाल को व्यवहारिक उदाहरणों के जरिए समझने का अवसर मिला।
व्यवहारिक शिक्षा से बच्चों को मिला नया अनुभव
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यवहारिक और कौशलपरक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। संविलियन विद्यालय डेराकरीमनगर में आयोजित यह मिनी बैंक गतिविधि इसी सोच से जुड़ी पहल रही। बैंकिंग, बचत और धन प्रबंधन जैसी जानकारी बच्चों के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है। इसलिए इसे केवल कक्षा में समझाने के बजाय भूमिका निभाने, नुक्कड़ नाटक और डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया। बचपन में ही पैसे की अहमियत, बचत और जिम्मेदार खर्च की समझ विकसित करने वाली ऐसी गतिविधियां बच्चों को आगे चलकर आर्थिक फैसलों के प्रति अधिक जागरूक बनाने की दिशा में उपयोगी हो सकती हैं।


