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चुनाव से पहले योगी सरकार ने दिखाई कानून-व्यवस्था की तस्वीर

  • 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और 15,233 करोड़ की संपत्ति जब्ती का सरकारी आंकड़ा; 87,835 पर गैंगस्टर एक्ट और 995 पर एनएसए की कार्रवाई, 68 चिह्नित माफिया गिरोहों के खिलाफ 909 मुकदमे, साइबर अपराध में 874.58 करोड़ रुपये फ्रीज कराने का दावा

भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पिछले साढ़े नौ वर्षों की कार्रवाई का विस्तृत आंकड़ा सामने रखा है। सरकार के मुताबिक 20 मार्च 2017 से अब तक 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए और 12,202 घायल हुए। ये आंकड़े सरकार की ओर से जारी किए गए हैं और मुख्य रूप से पुलिस कार्रवाई का पैमाना बताते हैं।

गैंगस्टर एक्ट से माफिया नेटवर्क पर कार्रवाई

 साढ़े नौ वर्ष में 87,835 लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। अपराधियों और माफिया तत्वों से जुड़ी 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल-अचल संपत्तियां जब्त की गईं। 995 लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई हुई। 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों व सहयोगियों पर अलग से कार्रवाई की गई। सरकार के अनुसार इनके खिलाफ 909 मुकदमे दर्ज किए गए और 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे सरकार के उस मॉडल का पता चलता है जिसमें केवल गिरफ्तारी के बजाय गिरोहों की संपत्ति और नेटवर्क पर भी कार्रवाई को शामिल किया गया है।

साइबर अपराध पर 874.58 करोड़ की रकम फ्रीज

अपराध का बदलता स्वरूप सरकार के आंकड़ों में साइबर अपराध के रूप में भी दिखाई देता है। यूपी के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित हैं। स्थानीय थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के जरिए अगस्त 2019 से जून 2026 के बीच 874.58 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज या होल्ड कराई गई। सरकार का कहना है कि साइबर अपराध पर कार्रवाई से जुड़ी मार्च 2026 की रैंकिंग में यूपी देश में पहले स्थान पर रहा। यह रैंकिंग संबंधी दावा भी सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों पर आधारित है।

चुनाव से पहले आंकड़ों का राजनीतिक महत्व

इन आंकड़ों का समय महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी धीरे-धीरे राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आ रही है और कानून-व्यवस्था लंबे समय से राज्य की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रही है। सरकार ने अपने आंकड़ों के जरिए गिरफ्तारी, मुठभेड़, गैंगस्टर एक्ट, संपत्ति जब्ती, माफिया नेटवर्क और साइबर अपराध—इन सभी मोर्चों पर कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने रखा है। इससे साफ है कि सरकार कानून-व्यवस्था को केवल पारंपरिक अपराध नियंत्रण के बजाय संगठित अपराध और डिजिटल अपराध तक विस्तारित कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है।

आंकड़े कार्रवाई बताते हैं, अपराध की पूरी तस्वीर नहीं

इन सरकारी आंकड़ों से पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई का दायरा सामने आता है, लेकिन केवल इन्हीं के आधार पर प्रदेश में अपराध घटने या कानून-व्यवस्था बेहतर होने का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उसके लिए हत्या, लूट, डकैती, दुष्कर्म, अपहरण और साइबर अपराध समेत अलग-अलग श्रेणियों में एफआईआर की संख्या, अपराध दर, जांच की स्थिति, आरोपपत्र, दोषसिद्धि और लंबित मामलों का तुलनात्मक अध्ययन जरूरी होगा। इसलिए चुनाव से पहले जारी यह आंकड़ा फिलहाल योगी सरकार की ओर से अपने कानून-व्यवस्था रिकॉर्ड का प्रस्तुतिकरण है। इसका राजनीतिक महत्व अपनी जगह है, लेकिन इसकी स्वतंत्र समीक्षा के लिए व्यापक अपराध और न्यायिक आंकड़ों को साथ देखना जरूरी होगा।

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