- गांधी जयंती पर ‘नो UPI डे’ मनाकर व्यापारियों ने जताया विरोध, 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI भुगतानों पर प्रस्तावित 0.4% MDR और 18% GST से लागत बढ़ने की चिंता, 10 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन
भारत 19
कानपुर। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब चुनिंदा UPI भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ कानपुर में व्यापारियों का विरोध तेज हो गया है। गांधी जयंती पर व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ मनाकर इसका विरोध किया। सागर मार्केट, केनाल रोड के बाहर भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में ‘व्यापारियों की आवाज सुनो सत्याग्रह’ के तहत नगाड़ा-डमरू बजाकर प्रदर्शन किया गया। व्यापारियों ने पोस्टर लेकर प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की।
व्यापारियों का कहना है कि UPI भुगतान अब रोजमर्रा के कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में शुल्क लगने से खासकर छोटे कारोबारियों और कम मार्जिन वाले व्यापारों की लागत बढ़ने की आशंका है। उनका कहना है कि सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया, जिसके बाद व्यापारियों ने अपने कारोबार में यह व्यवस्था अपनाई। अब शुल्क लगाने की तैयारी से उनमें असंतोष है।
0.4% MDR और GST को लेकर चिंता
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR की प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि MDR पर 18 प्रतिशत GST जुड़ने से प्रभावी शुल्क 0.472 प्रतिशत हो जाएगा। अनरजिस्टर्ड व्यापारियों को इस GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलने की स्थिति में अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की बात भी उन्होंने कही। मिश्र के मुताबिक UPI डिजिटल कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। अतिरिक्त शुल्क की स्थिति में बड़े भुगतान के लिए कुछ व्यापारी नकद को प्राथमिकता दे सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि दीपावली और त्योहारी सीजन में कारोबार बढ़ने के दौरान इसका असर अधिक महसूस हो सकता है। व्यापारियों ने सरकार से प्रस्तावित MDR व्यवस्था वापस लेने की मांग की।
छोटे और कम मार्जिन वाले कारोबार पर फोकस
कानपुर मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज बलेचा, संरक्षक सुरेश सिंहवानी और उपाध्यक्ष सुशील तुली ने कहा कि मोबाइल और थोक कारोबार में मार्जिन पहले से सीमित है। ऐसे में अतिरिक्त MDR कारोबार की लागत बढ़ा सकता है। प्रदेश मंत्री रोशन गुप्ता और जिला वरिष्ठ महामंत्री मनीष गुप्ता सलोने ने कहा कि शुल्क का असर ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार के बीच प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है। प्रदेश संगठन मंत्री संजय भदौरिया, जिला युवा अध्यक्ष आशीष मिश्र, जिला कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता कुक्कू, प्रदेश युवा संगठन महामंत्री विनायक पोद्दार और युवा महामंत्री मनोज विश्वकर्मा ने छोटे दुकानदारों और रिटेल कारोबार पर संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाया।
व्यापारियों ने डिजिटल व्यवस्था अपनाने का दिया हवाला
कानपुर उद्योग व्यापार मंडल के जिला महामंत्री कृपाशंकर त्रिवेदी ने कहा कि व्यापारियों को लगातार डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। समय के साथ UPI बाजार के सामान्य लेनदेन का हिस्सा बन गया और व्यापारियों ने इसके लिए जरूरी व्यवस्था विकसित की। अब उसी व्यवस्था पर शुल्क लगाने की तैयारी से अतिरिक्त लागत की चिंता पैदा हुई है। जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता गोरे ने कहा कि व्यापारी अतिरिक्त शुल्क को अपनी लागत में शामिल करने का प्रयास कर सकते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है। व्यापारियों के मुताबिक ऐसी व्यवस्था से डिजिटल और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयास भी प्रभावित हो सकते हैं। व्यापारियों ने यह भी कहा कि नीतियों में बार-बार बदलाव से कारोबारियों को अपनी व्यवस्था बदलनी पड़ती है और लागत के साथ अनिश्चितता बढ़ती है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें व्यापारी और ग्राहक पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
10 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन
गांधी जयंती के कार्यक्रम में व्यापारियों ने शुल्क वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में आंदोलन तेज करने की बात कही। कानपुर उद्योग व्यापार मंडल ने 10 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। व्यापारियों ने कहा कि उनका विरोध डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रस्तावित MDR की अतिरिक्त लागत को लेकर है। उनका कहना है कि सरकार को छोटे व्यापारियों, कम मार्जिन वाले कारोबार और रोजमर्रा के डिजिटल लेनदेन पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए। संगठन के अनुसार कानपुर के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी व्यापारियों ने गांधी जयंती पर ‘नो UPI डे’ मनाकर विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन में रामेश्वर गुप्ता, लाला भैया, प्रदीप गुप्ता, चंद्र प्रकाश ओमर, सुरेश गुप्ता, महेंद्र गुप्ता, देवी खन्ना, सुशील गुप्ता, केबी सिंह, विराट गुप्ता, पवन दुबे, सत्य प्रकाश जायसवाल, पवन गुप्ता, मनोज गुप्ता, कामिल अंसारी, अमित दोसर, राजेश गुप्ता, मृदुल गुप्ता, सौरभ त्रिवेदी, राकेश भाटिया, पंकज अग्रवाल, ओम प्रकाश चौटाला, एहसान हजारी, मनीष जायसवाल, संतोष कुमार, संजीव अग्रवाल, अजीत सिंह, विशन गुप्ता, संतोष शर्मा, दिनेश गुप्ता, अभिषेक तिवारी, राजेश जायसवाल, विजय रुद्रा, मयंक यादव, सुरेश गुप्ता, दीपू गुप्ता, आकाश ओमर, पंकज राठौर, सीटू गुप्ता समेत अन्य व्यापारी मौजूद रहे।


