लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रतीकात्मक अस्थिकलश यात्रा निकालकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की। हजरतगंज में पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी।
Bharat 19/ लखनऊ में सोमवार को समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जनपथ मार्केट के पास एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में अस्थिकलश लेकर विधानसभा की ओर जाने की कोशिश की। उनका कहना था कि वे चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में यह प्रतीकात्मक यात्रा निकाल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनका आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। उन्होंने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की।
हजरतगंज में पुलिस ने रोका
प्रदर्शनकारी जब हजरतगंज की ओर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद मौके पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की। फाइल में दी गई जानकारी के अनुसार, इस दौरान कई महिला और पुरुष कार्यकर्ता जमीन पर लेट गए। पुलिसकर्मियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों को उठाकर और घसीटते हुए पुलिस वैन तक पहुंचाया। बाद में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन ले जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन में बाराबंकी से पहुंचे अभिषेक यादव ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र के साथ अन्याय किया है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में वोटों की कथित चोरी के जरिए अलग-अलग राज्यों और केंद्र में भाजपा की सरकार बनाने में मदद की गई। यह आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप
प्रदर्शनकारी छोटू ने अस्थिकलश को चुनाव आयोग का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। उनका कहना था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में शामिल रिंकी सिंह ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लंबे समय से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं और कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूत दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
फिलहाल इस घटनाक्रम का प्रमुख असर राजनीतिक प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के रूप में सामने आया है। प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन को लेकर पुलिस की ओर से क्या आधिकारिक कार्रवाई दर्ज की जाती है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया देता है या नहीं। लखनऊ में चुनाव आयोग के खिलाफ सपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन पुलिस से टकराव के बाद चर्चा में आ गया है। अस्थिकलश यात्रा के जरिए प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। हालांकि, वोट चोरी और चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़े आरोप फिलहाल प्रदर्शनकारियों के दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है।


