- हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को दी थी अपनी मर्जी से रहने की आजादी, पिता का आरोप- सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्ला बेटे को साथ ले गए
भारत 19
लखनऊ। चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के करीब दो सप्ताह बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। 16 सितंबर को हाईकोर्ट ने बालिग आयुष मलिक को अपनी इच्छा के अनुसार रहने, धर्म का पालन करने और जीवनसाथी को लेकर फैसला करने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बाद आयुष शामली स्थित अपने घर वापस नहीं लौटा। अब उसके पिता देवराज सिंह मलिक की शिकायत पर पुलिस ने सुल्तान कारी और देवबंद के मुफ्ती अब्दुल्ला के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की है।
हाईकोर्ट में आयुष ने क्या कहा था?
16 सितंबर को न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ के सामने पेश हुए आयुष ने खुद को करीब 31 वर्ष का और बी-फार्मा शिक्षित बताया था। अदालत के समक्ष उसने कहा था कि उसने वर्ष 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया और उस फैसले में किसी तरह का दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था। उसने चांदनी कुरैशी के साथ वैवाहिक संबंध बनाने की इच्छा भी जताई थी। अदालत ने कहा था कि एक बालिग व्यक्ति के धर्म, निवास और जीवनसाथी से जुड़े फैसलों पर उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने आयुष को अपनी पसंद के स्थान और व्यक्ति के साथ रहने तथा अपनी पसंद के धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी थी।
पिता ने अब दोनों पर लगाए गंभीर आरोप
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयुष के घर नहीं लौटने को लेकर उसके पिता देवराज सिंह मलिक ने पुलिस में शिकायत दी। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्ला आयुष को अपने साथ ले गए और इसके बाद परिवार को उसके बारे में जानकारी नहीं मिली। पिता ने बेटे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पिता की शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पहले भी दर्ज हो चुका है धर्मांतरण से जुड़ा केस
आयुष मलिक प्रकरण की शुरुआत जून में हुई थी, जब उसके पिता की शिकायत पर शामली कोतवाली में चांदनी कुरैशी और उसके परिवार समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई थीं। बाद में इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में आयुष के कथित धर्म परिवर्तन और फिर धर्म बदलने के दावों को लेकर विवाद बढ़ता गया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पिता और बेटे के बयानों में भी अंतर सामने आया था। पिता ने आयुष के फैसले को प्रभावित किए जाने की बात कही थी, जबकि आयुष ने अदालत के सामने अपने फैसले को स्वैच्छिक बताया था।
अब जांच का केंद्र आयुष का पता और नई FIR
नई एफआईआर के बाद पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि हाईकोर्ट से स्वतंत्रता मिलने के बाद आयुष कहां गया और उसके बाद उसके संपर्क में कौन-कौन लोग रहे। पुलिस को पिता की शिकायत में लगाए गए आरोपों, आयुष की पिछली गतिविधियों और हाईकोर्ट में दिए गए उसके बयान, इन सभी पहलुओं को सामने रखकर जांच करनी होगी। इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश और पिता की ओर से दर्ज कराई गई नई एफआईआर दो अलग-अलग तथ्य हैं। अदालत ने आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर आदेश दिया था, जबकि नई एफआईआर में पिता ने दो व्यक्तियों पर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।


