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राम मंदिर आंदोलन ने संतों और समाज को जोड़ा

  • अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का कानपुर में शुभारंभ, शिलापूजन, कारसेवा और गांव-गांव जनजागरण के जरिए आंदोलन को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की भूमिका पर चर्चा

भारत 19

कानपुर। अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत कानपुर में उनके उस दौर के कार्यों की चर्चा के साथ हुई, जब श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को संतों और समाज के व्यापक वर्गों से जोड़ने की कोशिश की गई। बुधवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बेनाझाबर में आयोजित समारोह में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने अशोक सिंहल की भूमिका को याद किया और कहा कि उन्होंने विभिन्न मत, पंथ और संप्रदायों के संतों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन से जोड़ा।

चंपत राय ने कहा कि शिलापूजन, कारसेवा और गांव-गांव जनजागरण के जरिए श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को समाज के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया गया। उनके अनुसार अशोक सिंहल ने ऐसे समय में हिंदू समाज की आस्था, पहचान और सांस्कृतिक स्वाभिमान से जुड़े मुद्दों को सामने रखा, जब इन विषयों पर आवाज उठाना चुनौतीपूर्ण माना जाता था।

1984 की धर्म संसद से शुरू हुआ बड़ा अध्याय

चंपत राय ने 1984 की धर्म संसद से लेकर शिलापूजन और कारसेवा तक के दौर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंहल का सार्वजनिक जीवन लंबे समय तक श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा और उन्होंने संतों तथा समाज को साथ लाने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को अशोक सिंहल की दीर्घकालिक सक्रियता के साथ-साथ संतों और रामभक्तों के संघर्ष से जोड़ा। उनके मुताबिक सिंहल के लिए राम मंदिर केवल एक भवन का विषय नहीं था, बल्कि भारत के सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ा मुद्दा था।

संतों को एक मंच पर लाने पर रहा जोर

मुख्य अतिथि अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अशोक सिंहल संतों के बीच गहरा प्रभाव रखते थे। उन्होंने देश की संत शक्ति को संगठित कर राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों में योगदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के हिंदू समाज को एक सूत्र में जोड़ने की दिशा में अशोक सिंहल के प्रयासों को याद किया जाना चाहिए।

सामाजिक समरसता और सेवा कार्यों का भी जिक्र

चंपत राय ने अशोक सिंहल से जुड़े सामाजिक समरसता, वंचित वर्गों के उत्थान और धर्मांतरण रोकने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाना उनके प्रति श्रद्धांजलि होगी। यानी जन्मशताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में केवल रामजन्मभूमि आंदोलन की स्मृतियों तक सीमित रहने के बजाय उनके सामाजिक कार्यों को भी सामने रखने की बात कही गई।

एक साल तक गांव-गांव होंगे कार्यक्रम

बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में आयोजित समारोह की शुरुआत श्रीराम दरबार के पूजन के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोहिया कॉर्प लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजकुमार लोहिया ने की। विहिप के प्रान्त मंत्री राजू पोरवाल ने बताया कि अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष के दौरान अगले एक साल तक कानपुर प्रान्त के प्रत्येक जिले, प्रखंड और ग्राम स्तर पर कार्यक्रम होंगे। इनमें विचार गोष्ठियां, धर्मसभाएं, समरसता सम्मेलन और सेवा कार्य शामिल रहेंगे।

साथ काम करने वाले स्वयंसेवकों को सम्मान

समारोह में अशोक सिंहल के साथ काम करने वाले वरिष्ठ स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया। ज्ञानेन्द्र मिश्रा, प्रकाश शर्मा, दीपक राजे और अशोक बाजपेई ने उनके साथ जुड़े संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक, कानपुर प्रान्त संघचालक भवानीभीख, पंचदशनाम जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर मां योगेश्वरी यति, विहिप क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, प्रान्त अध्यक्ष राजीव महाना और प्रान्त कार्याध्यक्ष डॉ. उमेश पालीवाल समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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