- मेरठ जिला अदालत ने सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोनों को दोषी माना; 13 महीने की सुनवाई, 126 पेशियां और 22 से ज्यादा गवाहों के बाद मुकदमा सजा के चरण में पहुंचा
भारत 19
मेरठ। बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मेरठ की जिला अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने दोनों को हत्या के मामले में दोषसिद्ध किया है। हालांकि, सजा का ऐलान अभी नहीं हुआ है। अब अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी।
सौरभ राजपूत की हत्या का यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। अभियोजन के मुताबिक सौरभ की हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले ड्रम में रखा गया था और ड्रम में सीमेंट भरकर उसे छिपाने की कोशिश की गई थी। मामले के खुलासे के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया था।
13 महीने चली सुनवाई, 126 बार हुई पेशी
नीला ड्रम हत्याकांड की सुनवाई करीब 13 महीने चली। इस दौरान अदालत में 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अंतिम बहस 17 सितंबर को पूरी हुई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसले के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ कई ऐसे तथ्य रखे, जिनका संबंध हत्या से पहले और बाद की कथित तैयारियों से था। इनमें चाकू, उस्तरा, नीला ड्रम, सीमेंट और बालू की खरीद से जुड़े साक्ष्य भी शामिल थे।
अभियोजन ने मांगी थी अधिकतम सजा
मुकदमे की अंतिम बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। सरकारी पक्ष ने अदालत के सामने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच से जुड़े तथ्यों को आधार बनाया। हालांकि, दोषसिद्धि के बाद भी यह तय नहीं हुआ है कि मुस्कान और साहिल को कौन-सी सजा मिलेगी। अब अदालत दोनों पक्षों को सजा के बिंदु पर सुनने के बाद फैसला करेगी।
क्या था सौरभ राजपूत हत्याकांड
मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, मर्चेंट नेवी से जुड़े सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। 3 मार्च को उनकी हत्या किए जाने का आरोप है। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे ड्रम में छिपाया गया। जांच के दौरान पुलिस ने घर से नीला ड्रम बरामद किया। इसके बाद मामला सामने आया और मुस्कान तथा साहिल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की जांच के आधार पर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया और जुलाई 2025 से जिला जज की अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
गवाहों और फोरेंसिक साक्ष्यों पर टिका मुकदमा
मामले में अभियोजन पक्ष ने सौरभ के परिवार के सदस्यों, परिचितों और उन लोगों की गवाही कराई जिनसे कथित तौर पर ड्रम, चाकू, सीमेंट और अन्य सामान की खरीद से जुड़े तथ्य सामने आए थे। पुलिस और फोरेंसिक टीम के सदस्यों की गवाही भी मुकदमे का हिस्सा रही। अभियोजन ने इन साक्ष्यों को हत्या की परिस्थितियों से जोड़ते हुए अदालत के सामने रखा। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने मुकदमे के दौरान अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए और प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने की दलील दी। बचाव पक्ष ने आरोपियों को राहत दिए जाने की मांग की थी।
फैसले के बाद अब सजा पर टिकी नजर
अदालत के दोषसिद्धि वाले फैसले के बाद नीला ड्रम हत्याकांड अब अपने अगले महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला दोषी करार दिए जा चुके हैं, लेकिन उनकी सजा अभी तय नहीं हुई है। अब अदालत सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि दोषियों को उम्रकैद या उससे अधिक कठोर दंड में से क्या सजा दी जाती है। अभियोजन पहले ही अधिकतम सजा की मांग कर चुका है।


