- 11 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान; भाजपा ने अंतिम छह नाम घोषित कर सभी सीटों पर प्रत्याशी तय किए, सपा पहले ही 11 उम्मीदवार उतार चुकी है, दोनों की सूची में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दिया गया है
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही भाजपा और समाजवादी पार्टी की तैयारियां औपचारिक चुनावी चरण में पहुंच गई हैं। इन सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मतदान 23 अक्टूबर को और मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। 29 सितंबर को भाजपा ने अंतिम छह प्रत्याशियों के नाम घोषित कर अपनी 11 सीटों की सूची पूरी कर दी।
भाजपा की सूची में कई सवर्ण पृष्ठभूमि वाले चेहरे शामिल होने के कारण पार्टी के सामाजिक समीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हुई है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार सूची को उसके घोषित PDA यानि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक गठजोड़ के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा की ओर से इसे आधिकारिक तौर पर ‘सवर्ण रणनीति’ नहीं बताया गया है, इसलिए यह उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित राजनीतिक विश्लेषण है।
भाजपा की अंतिम सूची में छह नाम
भाजपा ने अंतिम चरण में वाराणसी स्नातक से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल, इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर, वाराणसी शिक्षक से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक से ध्रुव त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया है। इन छह नामों के साथ भाजपा की 11 सीटों की सूची पूरी हो गई। पार्टी ने तीन मौजूदा एमएलसी को भी दोबारा मैदान में उतारा है। भाजपा की सूची में निरंतरता और नए चेहरों का मिश्रण दिखाई देता है।
भाजपा की पूरी सूची में सामाजिक समीकरण
भाजपा की पहले घोषित सूची में लखनऊ स्नातक से अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक से हरि सिंह ढिल्लों और मेरठ शिक्षक से श्रीचंद शर्मा शामिल थे। अंतिम सूची आने के बाद उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर विश्लेषण तेज हुआ है। खासकर ब्राह्मण और अन्य सवर्ण पृष्ठभूमि वाले कई चेहरों की मौजूदगी को भाजपा के पारंपरिक सामाजिक आधार के संदर्भ में देखा जा रहा है। यह विश्लेषण है, भाजपा की ओर से घोषित चुनावी रणनीति नहीं।
सपा की सूची में PDA का सामाजिक आधार
समाजवादी पार्टी पहले ही सभी 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। पार्टी की सूची में मौजूदा एमएलसी लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा और डॉ. मान सिंह यादव भी शामिल हैं। सपा की राजनीति में PDA का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को एक राजनीतिक गठजोड़ में जोड़ना रहा है। उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि और पार्टी के राजनीतिक संदेश को इसी संदर्भ में पढ़ा जा रहा है। हालांकि किसी प्रत्याशी की व्यक्तिगत सामाजिक पहचान के आधार पर पूरी सूची को PDA प्रतिनिधित्व का प्रमाण मानना राजनीतिक विश्लेषण होगा।
सपा ने किन सीटों पर उतारे उम्मीदवार
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा ने लखनऊ से कांति सिंह, वाराणसी-मिर्जापुर से आशुतोष सिन्हा, इलाहाबाद-झांसी से डॉ. मान सिंह यादव, मेरठ-सहारनपुर से प्रमेंद्र भाटी और आगरा से शशांक यादव को प्रत्याशी बनाया है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ से सुशील कुमार पटेल, वाराणसी-मिर्जापुर से लाल बिहारी यादव, गोरखपुर-फैजाबाद से कमलेश यादव, मेरठ-गाजियाबाद से नितिन कुमार तोमर, आगरा-अलीगढ़ से डॉ. प्रकाश चंद्र गुप्ता और बरेली-मुरादाबाद से हाजी मोहम्मद दानिश अख्तर को मैदान में उतारा गया है।
शिक्षक और स्नातक सीटों का अलग समीकरण
विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं, जबकि छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में संबंधित पात्र मतदाता मतदान करते हैं और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है। ऐसे में प्रत्याशियों का व्यक्तिगत संपर्क, संगठनात्मक नेटवर्क और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच पकड़ चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं।
2027 से पहले सामाजिक रणनीतियों की परीक्षा
इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों की संगठनात्मक तैयारियों और सामाजिक पहुंच के संदर्भ में देखा जा रहा है। विधान परिषद में भाजपा-नीत एनडीए के पास वर्तमान में स्पष्ट बहुमत है, जबकि सपा के लिए अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखना महत्वपूर्ण है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन चुनावों के संदर्भ में शिक्षकों, पुरानी पेंशन योजना, शिक्षा व्यवस्था और भर्ती जैसे मुद्दों को भी उठाया है। इससे स्पष्ट है कि पार्टी केवल सामाजिक समीकरण के साथ-साथ शिक्षक-कर्मचारी मुद्दों को भी चुनावी विमर्श में शामिल कर रही है।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 को मतगणना
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर तक नाम वापसी होगी। 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। इन 11 सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी की जा रही है।
भाजपा और सपा के सामने अलग राजनीतिक संदेश
भाजपा की अंतिम सूची में कई सवर्ण चेहरों की मौजूदगी को उसके सामाजिक आधार के संदर्भ में देखा जा रहा है, जबकि सपा अपनी उम्मीदवार सूची और राजनीतिक संदेश को PDA के व्यापक सामाजिक गठजोड़ से जोड़ रही है। इसके साथ दोनों दल शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के मुद्दों को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता दे रहे हैं। इस चुनाव का वास्तविक परिणाम 27 अक्टूबर को सामने आएगा। उससे पहले उम्मीदवारों की अंतिम सूची, नामांकन और क्षेत्रवार चुनावी गतिविधियां यह बताएंगी कि दोनों दल अपने-अपने सामाजिक और संगठनात्मक समीकरण को किस तरह जमीन पर उतारते हैं।


