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नकली रेबीज वैक्सीन में निकला कानपुर कनेक्शन, तीन पर FIR

  • नकली Abhayrab वैक्सीन की दिल्ली से शुरू हुई जांच कानपुर पहुंची; न्यू आरजे एजेंसीज से 592 वायल मिलने के बाद खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और बिलों में सामने आए विरोधाभास, तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा

भारत 19


कानपुर। दिल्ली के भागीरथ पैलेस से शुरू हुई नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन की जांच अब कानपुर में दर्ज एफआईआर तक पहुंच गई है। दिल्ली में संदिग्ध Abhayrab वैक्सीन की खेप पकड़े जाने के बाद सामने आए सप्लाई लिंक के आधार पर कानपुर में औषधि विभाग ने कार्रवाई की थी। पहले संबंधित प्रतिष्ठानों को सील किया गया और रिकॉर्ड खंगाले गए। अब जांच में खरीद-बिक्री के आंकड़ों, बिलों और संबंधित पक्षों के बयानों में विरोधाभास मिलने के बाद तीन लोगों के खिलाफ कलक्टरगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

मामले में न्यू आरजे एजेंसीज की प्रोपराइटर बलजीत कौर, राजिंदर सिंह और एलिक्सिर क्योर के संचालक तरनदीप सिंह को आरोपी बनाया गया है। पुलिस और औषधि विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि संदिग्ध वैक्सीन की खेप कहां से आई, किस रास्ते से कानपुर पहुंची और इसके बाद किन-किन शहरों में भेजी गई। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

दिल्ली में 481 वायल मिलने के बाद खुली कड़ी

मामले की पहली बड़ी कड़ी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित भागीरथ पैलेस में सामने आई। दिल्ली ड्रग कंट्रोल विभाग ने कार्रवाई के दौरान एक फर्म से Abhayrab एंटी-रेबीज वैक्सीन की 481 वायल बरामद की थीं। संबंधित बैच की निर्माता कंपनी ह्यूमन बायोलॉजिकल्स इंस्टीट्यूट से पुष्टि कराई गई तो उसे कंपनी का निर्मित उत्पाद नहीं बताया गया। इसके बाद दिल्ली में वैक्सीन की सप्लाई चेन खंगाली गई। इसी जांच में कानपुर की न्यू आरजे एजेंसीज का नाम सामने आया। दिल्ली से मिले इनपुट के आधार पर उत्तर प्रदेश के औषधि विभाग ने कानपुर में जांच शुरू की।

पहले सील हुए थे दो प्रतिष्ठान

दिल्ली की कार्रवाई के बाद कानपुर में औषधि विभाग की टीम ने संबंधित फर्मों पर छापेमारी की थी। 23 सितंबर को न्यू आरजे एजेंसीज और उससे जुड़े प्रतिष्ठान को सील किया गया था। उस समय मौके पर संदिग्ध वैक्सीन का बड़ा स्टॉक नहीं मिला, लेकिन खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज जांच के लिए अहम साबित हुए। इसके बाद विभाग ने फर्म के खरीद और बिक्री रिकॉर्ड का मिलान शुरू किया। इसी दौरान वैक्सीन की बड़ी मात्रा में खरीद और बिक्री का विवरण सामने आया, जिसने जांच को अगले चरण में पहुंचाया।

न्यू आरजे से मिलीं 592 वायल

जांच आगे बढ़ने पर न्यू आरजे एजेंसीज से 592 वायल बरामद होने की बात सामने आई। इनमें से 120 वायल नमूने के तौर पर जांच के लिए सुरक्षित की गईं, जबकि 462 वायल सीज कर सुरक्षित रखी गईं। अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि ये वायल किन-किन फर्मों से वापस आईं और इससे पहले कितनी वायल बाजार में भेजी जा चुकी थीं। बरामद स्टॉक और खरीद-बिक्री रिकॉर्ड का मिलान इसी दिशा में किया जा रहा है।

1859 वायल खरीदीं, 1798 की बिक्री

औषधि विभाग की जांच में न्यू आरजे एजेंसीज के रिकॉर्ड में 1859 वायल एलिक्सिर क्योर से खरीदे जाने का उल्लेख मिला। वहीं बिक्री रिकॉर्ड में 1798 वायल की बिक्री दर्ज थी। इस तरह 61 वायल का संतोषजनक हिसाब जांच में सवालों के घेरे में आया। रिकॉर्ड के मुताबिक संबंधित वैक्सीन दिल्ली के अलावा आगरा, हरदोई और उन्नाव समेत अन्य स्थानों पर भी भेजी गई थी। इससे जांच का दायरा केवल कानपुर तक सीमित नहीं रहा है। विभाग अब अलग-अलग फर्मों तक पहुंची खेप का मिलान कर रहा है।

तीन बिलों से सामने आया विरोधाभास

जांच में एलिक्सिर क्योर के तीन बिल भी अहम कड़ी बने हैं। न्यू आरजे एजेंसीज की ओर से इन बिलों के आधार पर वैक्सीन की खरीद का दावा किया गया। दूसरी ओर एलिक्सिर क्योर के संचालक तरनदीप सिंह ने इन बिलों को अपनी फर्म से जारी करने से इनकार किया। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और बयानों का मिलान किया तो दोनों पक्षों के दावों में अंतर सामने आया। इसी विरोधाभास के बाद जांच का फोकस केवल वैक्सीन के स्टॉक से आगे बढ़कर बिल तैयार होने और खरीद-बिक्री के पूरे रिकॉर्ड तक पहुंच गया।

WhatsApp चैट और लेनदेन भी जांच में

जांच के दौरान संबंधित लोगों के मोबाइल फोन में हुई WhatsApp बातचीत भी अधिकारियों के सामने आई। इसमें इनवाइस और खरीद से जुड़े संदेशों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अब पुलिस इन डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान दस्तावेजों और बैंक लेनदेन से कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि संबंधित वैक्सीन के लिए भुगतान किसे किया गया और खरीद-बिक्री के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी वास्तविक लेनदेन से मेल खाती है या नहीं।

कई शहरों तक पहुंची थी संदिग्ध खेप

जांच रिकॉर्ड में दिल्ली के साथ आगरा, हरदोई और उन्नाव की फर्मों को भी वैक्सीन भेजे जाने का विवरण सामने आया है। कुछ स्टॉक वापस आने की जानकारी भी जांच में मिली है। ऐसे में अब संबंधित फर्मों से वैक्सीन की खरीद, बिक्री और वापसी का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना भी है कि संबंधित बैच की कुल कितनी वायल बाजार में पहुंचीं और उनमें से कितनी वापस आ चुकी हैं।

जीवनरक्षक वैक्सीन होने से बढ़ी चिंता

एंटी-रेबीज वैक्सीन रेबीज से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवा है। इसलिए किसी संदिग्ध या नकली वैक्सीन की सप्लाई का मामला सामान्य दवा कारोबार से कहीं अधिक गंभीर हो जाता है। दिल्ली से शुरू हुई कार्रवाई के कानपुर तक पहुंचने और अब एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच का अगला फोकस संदिग्ध वैक्सीन के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क, दस्तावेजों की वास्तविकता और बाजार में पहुंची खेप पर है। नमूनों की जांच और पुलिस विवेचना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क की पूरी कड़ी कितनी दूर तक जाती है।

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