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बिजली उत्पादन में एआई से बदलेंगे ऑपरेशन के तरीके

  • आईआईटी कानपुर में तीन दिन चला प्रशिक्षण कार्यक्रम, मेजा ऊर्जा निगम के सहयोग से अधिकारियों ने सीखी AI, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की उपयोगिता; मशीन खराब होने से पहले संकेत पहचानने और डेटा आधारित फैसलों पर जोर

भारत 19

कानपुर। बिजलीघर में मशीन के अचानक ठप होने के बाद मरम्मत शुरू करने के बजाय अगर उसके खराब होने के संकेत पहले ही पकड़ लिए जाएं तो उत्पादन में होने वाले नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता है। ऊर्जा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स इसी दिशा में नई संभावनाएं खोल रहे हैं। इन्हीं तकनीकों को औद्योगिक जरूरतों से जोड़ने के लिए आईआईटी कानपुर में तीन दिवसीय प्रमाणित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

आईआईटी कानपुर के वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स (WSAIS) की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम मेजा ऊर्जा निगम प्राइवेट लिमिटेड (MUNPL) के प्रायोजन में 22 से 24 सितंबर तक चला। इसमें MUNPL के साथ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) के प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का फोकस केवल एआई की तकनीकी जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समझने पर रहा कि इन तकनीकों को बिजली उत्पादन और औद्योगिक संचालन की वास्तविक जरूरतों में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

मशीन बंद होने से पहले मिल सकता है संकेत

औद्योगिक संयंत्रों में मशीन का अचानक बंद होना केवल मरम्मत का खर्च नहीं बढ़ाता, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। प्रशिक्षण में प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस यानी पूर्वानुमान आधारित रखरखाव की इसी उपयोगिता पर जोर दिया गया। एआई और मशीन लर्निंग मॉडल मशीनों से लगातार मिलने वाले आंकड़ों में होने वाले बदलावों को पहचानकर संभावित गड़बड़ी के संकेत तलाश सकते हैं। इसका उद्देश्य खराबी होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय उसके संभावित संकेत पहले पहचानना है। औद्योगिक स्तर पर ऐसी डेटा आधारित व्यवस्था अनियोजित बंदी कम करने और रखरखाव की योजना बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

डेटा बताएगा, कहां सुधार की गुंजाइश

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि किसी औद्योगिक इकाई में मौजूद आंकड़े केवल रिकॉर्ड रखने के लिए नहीं, बल्कि निर्णय लेने का आधार भी बन सकते हैं। उत्पादन, मशीनों के प्रदर्शन और परिचालन से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर ऐसी प्रवृत्तियों को पहचाना जा सकता है, जिन पर सामान्य निगरानी में ध्यान जाना मुश्किल होता है। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों और संकाय सदस्यों ने प्रतिभागियों को AI, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स के व्यावहारिक इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं से परिचित कराया। मकसद यह था कि प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी अपने संगठनों में तकनीक के संभावित इस्तेमाल के क्षेत्रों की पहचान कर सकें।

एआई का मतलब सिर्फ ऑटोमेशन नहीं

ऊर्जा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल की चर्चा अक्सर ऑटोमेशन तक सीमित रह जाती है, लेकिन प्रशिक्षण का जोर डेटा से बेहतर निर्णय लेने पर भी रहा। यानी मशीन के प्रदर्शन में बदलाव को समझना, संभावित समस्या की पहचान करना और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर परिचालन संबंधी फैसलों को अधिक सटीक बनाना। यही वजह है कि प्रशिक्षण में AI के साथ मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स को भी समान महत्व दिया गया। WSAIS की स्थापना ही ऐसे इंटेलिजेंट सिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से की गई है जो मशीन इंटेलिजेंस को वास्तविक दुनिया की जरूरतों से जोड़ सकें।

उद्योग की जरूरतों से जुड़ रही आईआईटी की विशेषज्ञता

आईआईटी कानपुर का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच तकनीकी ज्ञान के हस्तांतरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों का वास्तविक औद्योगिक समस्याओं से जुड़ना तभी प्रभावी होता है, जब उद्योग के कर्मचारियों को उनके इस्तेमाल की व्यावहारिक समझ भी मिले। WSAIS का घोषित उद्देश्य भी AI और इंटेलिजेंट सिस्टम से जुड़ी अकादमिक क्षमता को वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों से जोड़ना है। संस्थान ने हाल के वर्षों में AI, इंटेलिजेंट सिस्टम और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है।

प्रशिक्षण के बाद काम में उतारने पर जोर

कार्यक्रम के समापन सत्र में मेजा ऊर्जा निगम के सीईओ जी. श्रीनिवासा राव ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से मिले ज्ञान को अपने कार्यक्षेत्र में इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने संगठनों में इन तकनीकों के क्रियान्वयन में योगदान देने का आह्वान किया। दरअसल, किसी भी औद्योगिक इकाई में AI लागू करने की असली चुनौती तकनीक समझने के बाद शुरू होती है—उपलब्ध डेटा की गुणवत्ता, उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना और उससे मिलने वाले निष्कर्षों को वास्तविक परिचालन फैसलों में बदलना। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम इस प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों की क्षमता तैयार करने की दिशा में एक कदम हैं।

बिजली उत्पादन में डिजिटल बदलाव की दस्तक

बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्र में जहां मशीनों की विश्वसनीयता, लगातार संचालन और रखरखाव सीधे उत्पादन से जुड़े हैं, वहां डेटा आधारित तकनीकों की भूमिका आने वाले समय में बढ़ सकती है। आईआईटी कानपुर का यह प्रशिक्षण इसी बदलाव की ओर संकेत करता है।

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