- ट्रंप-शी वार्ता में सम्मान और रणनीतिक स्थिरता पर जोर; व्यापार समझौता दो महीने बढ़ा, एआई सहयोग की राह खुली, पुतिन के G20 न्योते पर 14 अमेरिकी सीनेटरों ने मांगा जवाब
भारत 19 डेस्क
अमेरिका और चीन के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को संवाद, पारस्परिक सम्मान और रणनीतिक स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। शी ने सहयोग को प्राथमिकता देने, प्रतिस्पर्धा को उचित सीमा में रखने और मतभेदों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने पर जोर दिया।
सम्मान और रणनीतिक स्थिरता पर शी का जोर
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका-चीन संबंधों में समानता, पारस्परिक सम्मान और पारस्परिक लाभ को महत्वपूर्ण बताया। चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी वार्ता के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, शी ने कहा कि दोनों देशों को सहयोग को प्रमुख आधार बनाना चाहिए, प्रतिस्पर्धा को उचित सीमा में रखना चाहिए और मतभेदों को नियंत्रित करते हुए संबंधों में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखनी चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को स्थिर और टिकाऊ बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और तकनीक को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
व्यापार समझौता दो महीने बढ़ाने पर सहमति
ट्रंप-शी बातचीत में व्यापार तनाव को तत्काल बढ़ने से रोकने की दिशा में भी कदम उठाया गया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और चीन ने नवंबर में समाप्त होने वाली मौजूदा व्यापारिक व्यवस्था को करीब दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई है। इस विस्तार से दोनों देशों को शुल्क, दुर्लभ खनिजों, चीनी खरीद और तकनीकी प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर आगे बातचीत के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। Reuters के मुताबिक, यह स्थायी व्यापार समझौता नहीं है और कई मूलभूत विवाद अभी भी दोनों देशों के बीच बने हुए हैं।
एआई में प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की राह खुली
अमेरिका और चीन के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शी ने कहा कि दोनों देशों के पास एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षमताएं हैं और प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की भी गुंजाइश है। चीनी पक्ष ने एआई के संभावित जोखिमों और लाभों पर संवाद बढ़ाने तथा तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सहयोग की जरूरत बताई। इससे एआई अब अमेरिका-चीन संबंधों में केवल तकनीकी और कारोबारी मुद्दा नहीं, बल्कि रणनीतिक संवाद का भी हिस्सा बनता दिख रहा है।
ताइवान पर अमेरिका-चीन मतभेद बरकरार
सहमति के बावजूद ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों देशों के मतभेद खत्म नहीं हुए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शी ने अमेरिका से ‘ताइवान स्वतंत्रता’ का विरोध करने और ताइवान से जुड़े मुद्दे को सावधानी से संभालने का आग्रह किया। वार्ता में यूक्रेन, मध्य-पूर्व और कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति पर भी चर्चा हुई। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को व्यापक राजनीतिक समझौते के बजाय दोनों महाशक्तियों के बीच संवाद और तनाव प्रबंधन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पुतिन ने ट्रंप-शी वार्ता का किया स्वागत
अमेरिका और चीन के बीच बातचीत के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप और शी जिनपिंग की वार्ता का स्वागत किया। रूस के लिए अमेरिका-चीन संबंधों में किसी भी तरह की स्थिरता महत्वपूर्ण है, क्योंकि मॉस्को के दोनों देशों के साथ अलग-अलग रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। पुतिन की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब रूस, अमेरिका और चीन के बीच संबंधों का असर यूक्रेन युद्ध, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई मुद्दों पर पड़ रहा है।
पुतिन के G20 न्योते पर 14 सीनेटरों का सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी राष्ट्रपति पुतिन को G20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने पर अमेरिकी सीनेट के 14 द्विदलीय सदस्यों ने सवाल उठाया है। यहां 14 सांसदों का उल्लेख सीनेटरों के रूप में करना सही है। Anadolu Agency की रिपोर्ट के अनुसार, 14 रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन को पत्र लिखकर पूछा कि यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन को अमेरिका में होने वाले G20 सम्मेलन के लिए आमंत्रित करने का निर्णय क्यों लिया गया। Anadolu Agency के मुताबिक, पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर, मिच मैककोनेल, जॉन कॉर्निन और जेरी मोरन तथा डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन, शेल्डन व्हाइटहाउस, माइकल बेनेट, क्रिस कून्स, रिचर्ड ब्लूमेंथल और टिम केन समेत दोनों दलों के सदस्य शामिल हैं। सीनेटरों ने अपने पत्र में पुतिन के संभावित G20 दौरे और रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध नीति के बीच तालमेल को लेकर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।
मियामी में होगा 2026 का G20 सम्मेलन
पुतिन का निमंत्रण दिसंबर 2026 में मियामी में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के संदर्भ में है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पुतिन को सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने की पुष्टि की थी। Al Jazeera ने AFP और Reuters के हवाले से बताया कि ट्रंप प्रशासन ने रूसी राष्ट्रपति को सम्मेलन में आमंत्रित किया है। हालांकि पुतिन स्वयं सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन ने पुतिन की संभावित अमेरिका यात्रा पर तत्काल अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
अमेरिका-चीन रिश्तों में संवाद की नई कोशिश
Associated Press (AP) ने अमेरिका-चीन संबंधों पर अपनी रिपोर्ट में व्यापारिक समझ के बावजूद दोनों देशों के बीच तकनीक, एआई, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े मतभेदों की ओर ध्यान दिलाया है। ऐसे में ट्रंप-शी बातचीत को मतभेदों के तत्काल समाधान से अधिक संवाद बनाए रखने और तनाव नियंत्रित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने आगे भी उच्चस्तरीय संपर्क और सहयोग जारी रखने की जरूरत पर सहमति जताई है। दोनों पक्षों ने 2026 में होने वाले APEC और G20 आयोजनों की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करने पर भी सहमति व्यक्त की।
रिश्तों में नरमी के संकेत, विवाद अभी बाकी
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका और चीन के बीच बड़े स्थायी समझौते की बजाय बातचीत जारी रखने पर जोर दिखाई देता है। व्यापार समझौते का विस्तार, एआई पर संवाद और रणनीतिक स्थिरता की भाषा दोनों देशों के बीच तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश के संकेत हैं। वहीं, पुतिन द्वारा ट्रंप-शी वार्ता का स्वागत और उनके G20 निमंत्रण पर अमेरिकी सीनेटरों के सवाल वैश्विक शक्ति-संतुलन के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं। आने वाले समय में अमेरिका-चीन व्यापार, एआई, ताइवान, यूक्रेन और G20 में रूस की भागीदारी** अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।


